रायपुर, बिलासपुर।
छत्तीसगढ़ में पांच नए शासकीय मेडिकल कॉलेजों की स्थापना के बीच अब उनके नामकरण को लेकर भी मांग उठने लगी है। जूनियर डॉक्टर्स एसोसिएशन (JDA) छत्तीसगढ़ ने राज्य सरकार से आग्रह किया है कि इन पांच मेडिकल कॉलेजों में से किसी एक का नाम ‘पद्म विभूषण स्वर्गीय डॉ. तीजन बाई शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय’ रखा जाए। एसोसिएशन का कहना है कि यह फैसला प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत को सम्मान देने के साथ नई पीढ़ी के चिकित्सा विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगा।

JDA के प्रदेश महासचिव डॉ. योगेश्वर जायसवाल ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय को भेजे पत्र में कहा कि डॉ. तीजन बाई केवल पंडवानी की महान लोक कलाकार नहीं थीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान, लोक अस्मिता और गौरव की जीवंत प्रतीक थीं। उन्होंने अपनी अद्भुत प्रतिभा और आजीवन साधना के दम पर पंडवानी कला को अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचाकर प्रदेश को वैश्विक पहचान दिलाई।
डॉ. जायसवाल ने कहा कि किसी शासकीय मेडिकल कॉलेज का नाम किसी महान विभूति के नाम पर रखना केवल औपचारिक नामकरण नहीं होता, बल्कि यह आने वाली पीढ़ियों के लिए आदर्श, सेवा और समर्पण का संदेश भी होता है। उनके अनुसार यदि मेडिकल कॉलेज का नाम डॉ. तीजन बाई के नाम पर रखा जाता है तो चिकित्सा शिक्षा प्राप्त करने वाले छात्र-छात्राओं को संघर्ष, उत्कृष्टता, सेवा भावना और अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़े रहने की प्रेरणा मिलेगी।
उन्होंने पत्र में यह भी उल्लेख किया कि हाल ही में डॉ. तीजन बाई के निधन से पूरा प्रदेश शोक में डूबा हुआ है। ऐसे समय में यदि राज्य सरकार उनके नाम पर किसी नए मेडिकल कॉलेज का नामकरण करती है तो यह उनके अतुलनीय योगदान के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी और छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विरासत के सम्मान का ऐतिहासिक संदेश भी देगा।
JDA ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व वाली सरकार से जनभावनाओं का सम्मान करते हुए इस मांग पर सकारात्मक निर्णय लेने की अपेक्षा जताई है। एसोसिएशन का कहना है कि यह केवल नामकरण का प्रस्ताव नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की आत्मा, संस्कृति और गौरव को चिकित्सा शिक्षा के इतिहास में स्थायी स्थान दिलाने का प्रयास है।



