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सर्टिफिकेट वाले’ असली कांग्रेसी कहाँ थे? राम मंदिर मुद्दे पर सड़क पर उतरी कांग्रेस पर नई टीम के कई चेहरे रहे गायब

Mohammed Israil
Mohammed Israil  - Editor
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राम मंदिर से विधानसभा तक कांग्रेस का ‘घेराव प्लान’, लेकिन सड़क पर उठे अपने ही सवाल; पहली ताकत दिखाने की परीक्षा में क्यों गायब रहे कई नए पदाधिकारी?
बिलासपुर। राम मंदिर में चढ़ावा चोरी का मामला अब केवल कानून-व्यवस्था का मुद्दा नहीं रह गया है। इस मुद्दे पर कांग्रेस ने एक साथ विधानसभा और सड़क—दोनों मोर्चों पर सरकार को घेरने की रणनीति अपनाई। एक ओर छत्तीसगढ़ विधानसभा में कांग्रेस विधायकों ने इस मुद्दे को लेकर सरकार को घेरने की कोशिश की और जोरदार हंगामा किया, वहीं दूसरी ओर बिलासपुर में शहर कांग्रेस कमेटी और जिला कांग्रेस कमेटी ने कांग्रेस भवन से देवकीनंदन चौक तक पदयात्रा निकालकर विरोध-प्रदर्शन किया।


प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस नेताओं ने केंद्र की मोदी सरकार, राज्य सरकार और आरएसएस के खिलाफ नारेबाजी करते हुए मंदिरों की सुरक्षा, कानून-व्यवस्था और प्रशासनिक जवाबदेही पर सवाल उठाए। लेकिन राजनीतिक हलकों में दिनभर चर्चा का विषय केवल कांग्रेस का विरोध प्रदर्शन नहीं रहा, बल्कि उस प्रदर्शन में दिखाई दी संगठन की तस्वीर भी रही।


विधानसभा में आक्रामक विपक्ष, सड़क पर संगठन की पहली परीक्षा
राम मंदिर चढ़ावा चोरी के मुद्दे पर कांग्रेस ने विधानसभा के भीतर सरकार को घेरने का प्रयास किया। सदन में विपक्ष के तेवर आक्रामक रहे और इस मुद्दे को लेकर जमकर हंगामा हुआ। इसके समानांतर प्रदेशभर में जिला स्तर पर विरोध कार्यक्रम आयोजित किए गए, जिनमें बिलासपुर का प्रदर्शन भी शामिल रहा।
राजनीतिक दृष्टि से यह प्रदर्शन इसलिए भी अहम माना गया क्योंकि हाल ही में शहर और जिला कांग्रेस की नई कार्यकारिणी घोषित हुई है। नई टीम बनने के बाद यह पहला बड़ा सार्वजनिक आंदोलन था, जिस पर संगठन की सक्रियता को लेकर सभी की निगाहें टिकी थीं।
दो दिन पहले मंच पर, आंदोलन के दिन नहीं दिखे कई चेहरे
प्रदर्शन से महज दो दिन पहले नई कार्यकारिणी के पदाधिकारियों को प्रमाण-पत्र (सर्टिफिकेट) प्रदान किए गए थे। उस कार्यक्रम में मंच और फोटो में प्रमुखता से दिखाई देने वाले कई पदाधिकारी सोमवार के विरोध प्रदर्शन में नजर नहीं आए। कई चेहरे पूरे कार्यक्रम से अनुपस्थित रहे, जबकि कुछ पदाधिकारी सक्रिय भूमिका में दिखाई नहीं दिए।
इसी बिंदु ने कांग्रेस के भीतर नई राजनीतिक चर्चा को जन्म दे दिया। संगठन के अंदर यह सवाल उठने लगे कि नई जिम्मेदारी मिलने के तुरंत बाद हुए पहले बड़े आंदोलन में कई पदाधिकारी आखिर सक्रिय क्यों नहीं दिखे।
‘सर्टिफिकेट वाले कांग्रेसी’ बना नया राजनीतिक जुमला
प्रदर्शन के बाद कांग्रेस के अंदरूनी राजनीतिक गलियारों में एक नई टिप्पणी भी सुनाई देने लगी—”सर्टिफिकेट वाले कांग्रेसी”। यह टिप्पणी उन पदाधिकारियों को लेकर की जा रही है, जो कार्यकारिणी गठन और सम्मान समारोह में तो दिखाई दिए, लेकिन सड़क पर हुए विरोध प्रदर्शन में उनकी उपस्थिति दर्ज नहीं हुई।
हालांकि इस संबंध में पार्टी की ओर से कोई आधिकारिक टिप्पणी सामने नहीं आई है, लेकिन संगठन के भीतर इसको लेकर चर्चाएं लगातार जारी हैं।
बूथ स्तर की सक्रियता पर भी उठी चर्चा
राजनीतिक पर्यवेक्षकों की नजर केवल मंच पर मौजूद नेताओं तक सीमित नहीं रही। चर्चा इस बात की भी रही कि बूथ स्तर के कार्यकर्ताओं की भागीदारी कितनी रही, विभिन्न ब्लॉकों से कितनी संख्या में कार्यकर्ता पहुंचे और नई कार्यकारिणी अपने पहले बड़े राजनीतिक कार्यक्रम में संगठन को किस स्तर तक सक्रिय कर पाई।
यही वजह रही कि प्रदर्शन के बाद कांग्रेस के भीतर संगठनात्मक सक्रियता, समन्वय और जमीनी उपस्थिति को लेकर भी सवाल उठते रहे।
सरकार पर हमला, संगठन पर निगाह
प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस ने राम मंदिर में चढ़ावा चोरी को गंभीर सुरक्षा चूक बताते हुए सरकार को निशाने पर रखा। नेताओं ने मंदिरों की सुरक्षा व्यवस्था और कानून-व्यवस्था को लेकर सवाल उठाए। वहीं दूसरी ओर राजनीतिक विश्लेषकों और पार्टी के अंदर भी चर्चा का केंद्र संगठन की आंतरिक सक्रियता बन गई।
राजनीतिक संदेश के साथ संगठनात्मक परीक्षा
विधानसभा में सरकार को घेरने की रणनीति और सड़क पर विरोध प्रदर्शन—दोनों के जरिए कांग्रेस ने राजनीतिक संदेश देने की कोशिश की। लेकिन बिलासपुर में इस पूरे घटनाक्रम के दौरान नई कार्यकारिणी के कई पदाधिकारियों की अनुपस्थिति भी समानांतर राजनीतिक चर्चा का विषय बन गई।
फिलहाल कांग्रेस की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है। वहीं राजनीतिक गलियारों में अलग-अलग स्तर पर संगठनात्मक सक्रियता, स्थानीय व्यस्तता और आंतरिक समन्वय को लेकर चर्चाओं का दौर जारी है।

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