बिलासपुर। शहर में साइबर अपराधियों ने ब्लैकमेलिंग का नया तरीका अपनाते हुए एक सरकारी स्कूल की शिक्षिका को अपना शिकार बनाया। सिविल लाइन थाना क्षेत्र में रहने वाली 42 वर्षीय शिक्षिका को मोबाइल पर कॉल कर अश्लील वीडियो देखने का झूठा आरोप लगाया गया। इसके बाद वीडियो सोशल मीडिया और रिश्तेदारों के बीच वायरल करने की धमकी देकर डराया गया। घबराई शिक्षिका ने ठगों के दबाव में आकर पांच अलग-अलग किस्तों में 76 हजार 550 रुपये ट्रांसफर कर दिए।
जब पैसे भेजने के बाद भी ठग लगातार और रकम मांगते रहे, तब शिक्षिका को शक हुआ। परिवार को पूरी जानकारी देने के बाद उन्होंने तुरंत राष्ट्रीय साइबर अपराध पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई और सिविल लाइन थाने पहुंचकर एफआईआर कराई। समय रहते शिकायत होने के कारण साइबर हेल्पलाइन की कार्रवाई से 28 हजार 993 रुपये होल्ड करा लिए गए हैं। पुलिस अब बाकी रकम वापस दिलाने और आरोपियों की पहचान में जुटी है।
स्कूल में ड्यूटी के दौरान आया कॉल, घबराहट का उठाया फायदा
पुलिस के अनुसार घटना 4 जुलाई की है। शिक्षिका स्कूल में थीं, तभी एक अज्ञात नंबर से कॉल आया। कॉल करने वाले ने खुद को किसी एजेंसी का अधिकारी बताते हुए कहा कि उनके मोबाइल से आपत्तिजनक वेबसाइट देखी गई है और उसका वीडियो रिकॉर्ड मौजूद है। इसके बाद वीडियो वायरल करने, बदनाम करने और कानूनी कार्रवाई की धमकी देकर तत्काल पैसे जमा करने का दबाव बनाया गया।
डर और सामाजिक बदनामी के भय में शिक्षिका ने बिना किसी से सलाह लिए ठगों द्वारा बताए गए बैंक खाते में पांच बार में कुल 76,550 रुपये ट्रांसफर कर दिए।
पैसे लेने के बाद भी नहीं रुके ठग
रकम मिलने के बावजूद साइबर ठगों ने शिक्षिका का पीछा नहीं छोड़ा। वे बार-बार फोन कर और अधिक पैसे की मांग करने लगे। लगातार बढ़ती मांग के बाद शिक्षिका को एहसास हुआ कि वह साइबर ठगी का शिकार हो चुकी हैं। इसके बाद उन्होंने तत्काल परिवार को जानकारी दी और साइबर पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई।
फौरन शिकायत का मिला फायदा
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, शिकायत में देरी नहीं होने के कारण साइबर फ्रॉड से जुड़े बैंक खातों पर तत्काल कार्रवाई की गई। इसी वजह से 28,993 रुपये होल्ड करा लिए गए हैं। शेष राशि की रिकवरी और आरोपियों तक पहुंचने के लिए बैंक ट्रांजेक्शन, मोबाइल नंबर, आईपी लॉग और अन्य डिजिटल साक्ष्यों की जांच की जा रही है।
सिविल लाइन पुलिस कर रही जांच
सिविल लाइन थाना पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। शुरुआती जांच में यह अंतरराज्यीय साइबर गिरोह की करतूत होने की आशंका जताई जा रही है। पुलिस संबंधित बैंक खातों और मोबाइल नंबरों की जानकारी जुटा रही है।
साइबर अपराधियों का नया हथकंडा
विशेषज्ञों के अनुसार, हाल के महीनों में साइबर ठग “डिजिटल अरेस्ट”, “अश्लील वीडियो”, “सीबीआई/पुलिस अधिकारी” बनकर लोगों को डराने और ब्लैकमेल करने के मामलों में तेजी से सक्रिय हुए हैं। बदनामी और कानूनी कार्रवाई का डर दिखाकर वे लोगों से तत्काल ऑनलाइन पैसे ट्रांसफर करा लेते हैं।
क्या करें, यदि ऐसा कॉल आए?
किसी भी अनजान कॉलर की धमकी से घबराकर पैसे ट्रांसफर न करें।
वीडियो वायरल, गिरफ्तारी या अश्लील कंटेंट के नाम पर आने वाले कॉल अधिकांश मामलों में साइबर ठगी होते हैं।
तुरंत कॉल काटकर परिवार या पुलिस से संपर्क करें।
राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 पर तुरंत शिकायत करें।
cybercrime.gov.in पर ऑनलाइन शिकायत दर्ज करें।
जितनी जल्दी शिकायत होगी, रकम होल्ड या रिकवर होने की संभावना उतनी अधिक रहेगी।
“सिर्फ एक धमकी… और 76 हजार की चपत”
साइबर ठग अब तकनीकी हैकिंग से ज्यादा लोगों के डर और सामाजिक प्रतिष्ठा को निशाना बना रहे हैं। इस मामले में भी शिक्षिका ने तकनीकी गलती नहीं, बल्कि बदनामी के डर में आकर पैसे ट्रांसफर किए। राहत की बात यह रही कि समय पर शिकायत के कारण करीब 29 हजार रुपये सुरक्षित कर लिए गए, लेकिन यह मामला एक बार फिर साबित करता है कि साइबर अपराधियों का सबसे बड़ा हथियार डर है, तकनीक नहीं।



