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NDPS केस में बड़ा मोड़… महिला आयोग ने उठाए गंभीर सवाल, कहा- ‘भरण-पोषण से बचने के लिए पत्नी को फंसाने की आशंका’; मेडिकल स्टोर, पुलिस जांच और पारिवारिक विवाद की होगी पड़ताल

Mohammed Israil
Mohammed Israil  - Editor
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बिलासपुर के चर्चित NDPS प्रकरण में राज्य महिला आयोग की अहम टिप्पणी; मेडिकल स्टोर की बिक्री पर भी जताया संदेह, पुलिस को दवा सप्लाई चेन से लेकर खरीद-बिक्री रिकॉर्ड तक की दोबारा जांच के निर्देश
बिलासपुर। सरकंडा थाना क्षेत्र के बहुचर्चित NDPS प्रकरण में छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग की सुनवाई के बाद मामला नया मोड़ लेता नजर आ रहा है। आयोग ने अपने आदेश में प्रथम दृष्टया यह आशंका व्यक्त की है कि पारिवारिक विवाद और भरण-पोषण की जिम्मेदारी से बचने के उद्देश्य से महिला को झूठे NDPS प्रकरण में फंसाया गया हो सकता है। आयोग ने पुलिस की जांच प्रक्रिया पर भी सवाल उठाते हुए पूरे मामले की सभी पहलुओं से दोबारा गहन जांच करने के निर्देश दिए हैं।


सुनिए छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष किरणमई नायक ने क्या कहा

आयोग ने यह भी कहा है कि यह पता लगाया जाए कि घर से बरामद बताई गई नशीली दवाइयां आखिर किस डीलर से खरीदी गईं, किसे बेची गई थीं और वे संबंधित महिला के घर तक कैसे पहुंचीं। साथ ही जिस मेडिकल स्टोर से मामले का संबंध बताया जा रहा है, उसके खरीद-बिक्री रिकॉर्ड और दवा स्टॉक की भी विस्तृत जांच करने के निर्देश दिए गए हैं।


क्या है पूरा मामला?

File photo

मामला बिलासपुर निवासी दो नाबालिक बहनों के द्वारा छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग में दायर मानसिक प्रताड़ना की शिकायत से जुड़ा है। शिकायत में आरोप लगाया गया कि उनके पिता रामकिशोर सिंह, जो श्रीराम मेडिकल स्टोर से जुड़े हैं, ने पारिवारिक विवाद के चलते उनकी मां रानी सिंह को झूठे NDPS मामले में फंसाने की साजिश रची।

आवेदन में दावा किया गया कि रानी सिंह के घर की छत पर करीब तीन हजार नशीली गोलियां रखवाई गईं, जिसके आधार पर पुलिस ने कार्रवाई करते हुए उन्हें गिरफ्तार किया। वर्तमान में रानी सिंह जेल में हैं।
महिला आयोग की सुनवाई में क्या सामने आया?
महिला आयोग के समक्ष हुई सुनवाई में आवेदिका ने बताया कि उनके माता-पिता कई वर्षों से अलग-अलग रह रहे हैं। पिता द्वारा भरण-पोषण नहीं दिए जाने, लगातार धमकाने और झूठे मामलों में फंसाने के आरोप लगाए गए।
सुनवाई के दौरान अनावेदक ने आयोग को बताया कि उन्होंने अपना मेडिकल स्टोर वर्ष 2022 में बेच दिया था और वर्तमान में वहां केवल कर्मचारी के रूप में कार्य कर रहे हैं।
हालांकि आयोग ने उपलब्ध दस्तावेजों और प्रस्तुत तथ्यों का परीक्षण करने के बाद आदेश में टिप्पणी की कि प्रथम दृष्टया ऐसा प्रतीत होता है कि मेडिकल स्टोर की बिक्री भरण-पोषण की जिम्मेदारी से बचने के उद्देश्य से की गई हो सकती है। आयोग ने यह भी उल्लेख किया कि अनावेदक आज भी उसी मेडिकल स्टोर में कार्यरत हैं, इसलिए पूरे लेन-देन की जांच आवश्यक है।
पुलिस जांच पर भी उठे सवाल
सुनवाई के दौरान उपस्थित अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक से आयोग ने NDPS मामले की जांच की प्रगति की जानकारी ली।
आयोग ने आदेश दिया कि पुलिस यह स्पष्ट करे—
बरामद दवाइयां किस डीलर से खरीदी गई थीं।
दवाओं की बिक्री किसे की गई थी।
वे दवाइयां संबंधित महिला के घर तक कैसे पहुंचीं।
श्रीराम मेडिकल स्टोर के खरीद-बिक्री और स्टॉक रिकॉर्ड का परीक्षण किया जाए।
जांच इस दृष्टिकोण से हो कि वास्तविक आरोपी तक पहुंचा जा सके और यदि महिला निर्दोष है तो उसे न्याय मिले।
भरण-पोषण के मामले में भी आयोग की अहम टिप्पणी
महिला आयोग ने अपने आदेश में यह भी उल्लेख किया कि अनावेदक द्वारा पूर्व में भरण-पोषण राशि दिए जाने संबंधी दस्तावेज प्रस्तुत किए गए, लेकिन रिकॉर्ड में कई तथ्य स्पष्ट नहीं पाए गए।
आयोग ने आवेदिका को सलाह दी कि यदि आवश्यक हो तो वह भरण-पोषण से जुड़े पुराने मामले को दोबारा खुलवाने, बकाया राशि की वसूली, नियमित भरण-पोषण प्राप्त करने तथा वैवाहिक विवाद से जुड़े अन्य कानूनी उपायों के लिए सक्षम न्यायालय का दरवाजा खटखटा सकती हैं।
इधर… पीड़ित पक्ष फिर पहुंचा कलेक्टर जनदर्शन
महिला आयोग की सुनवाई के समानांतर पीड़ित पक्ष ने प्रशासन के समक्ष भी न्याय की मांग तेज कर दी है।
रानी सिंह के भाई शिवराज सिंह ने मंगलवार को कलेक्टर जनदर्शन में कलेक्टर संजय अग्रवाल को ज्ञापन सौंपकर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की।
उन्होंने बताया कि इससे पहले एसपी और आईजी को भी शिकायत दी जा चुकी है, लेकिन अब तक संतोषजनक कार्रवाई नहीं हुई।
पुलिस पर भी लगाए गंभीर आरोप
शिवराज सिंह ने आवेदन में आरोप लगाया कि 15 फरवरी, महाशिवरात्रि के दिन सरकंडा पुलिस उनके घर पहुंची और सीधे छत की ओर जाने लगी।
उनका दावा है कि उनकी बहन ने स्वयं पुलिस को दवाइयों से भरा बैग सौंप दिया था। इसके बावजूद उन्हें गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया, जबकि उनके नाबालिग बेटे को पूरे दिन थाने में बैठाए रखने के बाद छोड़ा गया।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सरकंडा थाने में पदस्थ एक पुलिसकर्मी ने कार्रवाई प्रभावित करने के नाम पर दो लाख रुपये की मांग की थी। इस संबंध में भी निष्पक्ष जांच की मांग की गई है।
कलेक्टर ने क्या किया?
कलेक्टर संजय अग्रवाल ने पीड़ित पक्ष का आवेदन स्वीकार करते हुए उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया। शिकायत की प्रति आगे की जांच के लिए वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को भी भेजी गई है।
अब आगे क्या?
महिला आयोग ने भले ही अपनी कार्यवाही पूर्ण करते हुए प्रकरण नस्तीबद्ध कर दिया हो, लेकिन अपने आदेश में पुलिस को विस्तृत और निष्पक्ष जांच के स्पष्ट निर्देश दिए हैं। ऐसे में अब इस चर्चित NDPS मामले में जांच एजेंसियों की अगली कार्रवाई पर सभी की नजरें टिकी हैं।
महत्वपूर्ण तथ्य
महिला आयोग ने किसी को दोषी घोषित नहीं किया है।
आयोग ने उपलब्ध तथ्यों के आधार पर प्रथम दृष्टया आशंका व्यक्त करते हुए विस्तृत जांच की आवश्यकता बताई है।
NDPS प्रकरण की अंतिम सच्चाई का निर्धारण पुलिस जांच और सक्षम न्यायालय द्वारा ही किया जाएगा।

नोट: यह समाचार महिला आयोग के आदेश और उसमें दर्ज टिप्पणियों पर आधारित है। आयोग की टिप्पणियां अंतिम न्यायिक निष्कर्ष नहीं हैं। मामले से जुड़े आरोपों की पुष्टि सक्षम न्यायालय या जांच एजेंसी द्वारा की जानी शेष है।

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