बिलासपुर में बिजली कंपनी की बड़ी लापरवाही! बिना ग्लव्स और सेफ्टी बेल्ट पोल पर चढ़ाया, करंट लगते ही ठेका कर्मी की मौत
बिलासपुर/कोटा। कोटा क्षेत्र के गढ़ापारा में बिजली विभाग की कथित घोर लापरवाही ने एक 25 वर्षीय ठेका कर्मी की जान ले ली। आरोप है कि बिजली लाइन के मेंटेनेंस कार्य के दौरान कर्मचारी को बिना ग्लव्स, बिना सेफ्टी बेल्ट और बिना हेलमेट के सीधे बिजली के खंभे पर चढ़ा दिया गया। जैसे ही उसने तार को छुआ, उसे जोरदार करंट लगा और वह खंभे से नीचे गिर पड़ा। गंभीर रूप से झुलसे कर्मचारी को अस्पताल पहुंचाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
घटना के बाद बिजली कंपनी और संबंधित ठेकेदार की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब हाई वोल्टेज लाइन पर काम कराया जा रहा था, तब सुरक्षा के अनिवार्य उपकरण आखिर क्यों उपलब्ध नहीं कराए गए?
25 वर्षीय नीलकमल की ड्यूटी बनी मौत का कारण
मृतक की पहचान कोटा के अमाली निवासी नीलकमल भारद्वाज (25 वर्ष) के रूप में हुई है। वह बिजली विभाग में ठेका कर्मचारी के रूप में कार्यरत था। बुधवार सुबह गढ़ापारा में बिजली लाइन के मेंटेनेंस का काम चल रहा था। मौके पर विभाग के अधिकारी और ठेकेदार का स्टाफ मौजूद था।
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक अधिकारियों के निर्देश पर नीलकमल को बिना किसी सुरक्षा उपकरण के पोल पर चढ़ा दिया गया। काम शुरू करते ही करंट की चपेट में आने से वह बुरी तरह झुलस गया और खंभे से नीचे गिर पड़ा।
अस्पताल पहुंचने से पहले ही टूट गई जिंदगी
साथी कर्मचारी आनन-फानन में उसे सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र कोटा लेकर पहुंचे, लेकिन चिकित्सकों ने जांच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया। डॉक्टरों ने प्राथमिक तौर पर मौत का कारण करंट लगना बताया है।
बिजली कंपनी और ठेकेदार पर उठे गंभीर सवाल
इस हादसे ने बिजली कंपनी की सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोल दी है। बिजली लाइन पर कार्य करते समय ग्लव्स, हेलमेट, सेफ्टी बेल्ट और लाइन शटडाउन जैसी व्यवस्थाएं अनिवार्य मानी जाती हैं। इसके बावजूद यदि कर्मचारी को बिना सुरक्षा उपकरणों के पोल पर चढ़ाया गया, तो यह सीधे-सीधे गंभीर लापरवाही का मामला माना जा रहा है।
यह भी जांच का विषय है कि—
क्या लाइन पूरी तरह बंद (शटडाउन) की गई थी?
सुरक्षा उपकरण उपलब्ध थे या नहीं?
यदि थे, तो उनका उपयोग क्यों नहीं कराया गया?
ठेका कंपनी सुरक्षा मानकों का पालन कर रही थी या नहीं?
मौके पर मौजूद अधिकारियों ने जोखिम भरा काम क्यों कराया?
जेई सहित जिम्मेदार अधिकारियों से पूछताछ
घटना के बाद कोटा पुलिस मौके पर पहुंची और मर्ग कायम कर शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। पुलिस बिजली विभाग के जेई आशीष कुमार, मौके पर मौजूद कर्मचारियों तथा संबंधित ठेकेदार से पूछताछ कर रही है। जांच में यदि लापरवाही की पुष्टि होती है तो जिम्मेदार अधिकारियों और ठेकेदार के खिलाफ गैर-इरादतन हत्या सहित अन्य धाराओं में कार्रवाई हो सकती है।
एसडीओपी नूपुर उपाध्याय ने क्या कहा
कोटा एसडीओपी नूपुर उपाध्याय ने बताया कि “मामले में मर्ग कायम कर लिया गया है। सभी पहलुओं की जांच की जा रही है। जांच के आधार पर आगे की वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।”
बड़ा सवाल
एक युवा ठेका कर्मचारी की जान चली गई, लेकिन अब सवाल सिर्फ एक मौत का नहीं, बल्कि उस व्यवस्था का है जिसमें ठेका कर्मियों से जान जोखिम में डालकर काम कराया जाता है। यदि सुरक्षा उपकरण नहीं थे या उनका इस्तेमाल नहीं कराया गया, तो इसकी जिम्मेदारी केवल कर्मचारी की नहीं, बल्कि बिजली कंपनी, संबंधित अधिकारियों और ठेकेदार की भी तय होनी चाहिए। अब सभी की नजर पुलिस जांच पर है कि जिम्मेदारों पर केवल विभागीय कार्रवाई होगी या आपराधिक जिम्मेदारी भी तय की जाएगी।



