कृषि, पोषण एवं स्वास्थ्य के समन्वय से बेहतर जनस्वास्थ्य का संदेश
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ आयुर्विज्ञान संस्थान (सिम्स) बिलासपुर में सेहत (सस्टेनेबल एनवायरनमेंट एंड हेल्थ थ्रू एग्रीकल्चर ट्रांसफॉर्मेशन) पहल के अंतर्गत अभिमुखीकरण (ओरिएंटेशन) कार्यक्रम का सफलतापूर्वक आयोजन किया गया। कार्यक्रम का आयोजन अधिष्ठाता डॉ. रमणेश मूर्ति, चिकित्सा अधीक्षक डॉ. लखन सिंह तथा सामुदायिक चिकित्सा विभागाध्यक्ष डॉ. हेमलता ठाकुर के मार्गदर्शन में सामुदायिक चिकित्सा विभाग एवं डायटेटिक्स विभाग के संयुक्त तत्वावधान में किया गया।
कार्यक्रम का शुभारंभ अधिष्ठाता डॉ. रमणेश मूर्ति, चिकित्सा अधीक्षक डॉ. लखन सिंह, विभागाध्यक्ष डॉ. हेमलता ठाकुर, डॉ. अर्चना सिंह एवं अन्य अतिथियों द्वारा दीप प्रज्ज्वलित कर किया गया। दीप प्रज्ज्वलन के साथ ही कार्यक्रम का औपचारिक शुभारंभ हुआ तथा उपस्थित प्रतिभागियों को सेहत पहल के उद्देश्यों एवं महत्व की जानकारी दी गई।
SEHAT भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) एवं भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) की संयुक्त राष्ट्रीय पहल है। देश के 150 चयनित मेडिकल कॉलेजों में इस कार्यक्रम का संचालन किया जा रहा है, जिनमें सिम्स बिलासपुर को भी महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त हुआ है। इस पहल का उद्देश्य कृषि नवाचारों के माध्यम से जनस्वास्थ्य को सुदृढ़ बनाना तथा जैव-संपोषित (बायोफोर्टिफाइड) एवं पौष्टिक खाद्य फसलों के उपयोग को बढ़ावा देकर कुपोषण, मधुमेह, उच्च रक्तचाप सहित विभिन्न गैर-संचारी रोगों की रोकथाम करना है।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए अधिष्ठाता डॉ. रमणेश मूर्ति ने कहा कि वर्तमान समय में स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों का समाधान केवल उपचार तक सीमित नहीं है, बल्कि स्वस्थ जीवनशैली एवं संतुलित पोषण को अपनाना भी अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने बायोफोर्टिफाइड फसलों के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इन फसलों में आवश्यक सूक्ष्म पोषक तत्व अधिक मात्रा में उपलब्ध होते हैं, जो कुपोषण एवं पोषण संबंधी कमियों को दूर करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने कहा कि कृषि, पोषण और स्वास्थ्य के बीच मजबूत समन्वय स्थापित कर ही स्वस्थ समाज का निर्माण किया जा सकता है तथा SEHAT जैसी पहलें इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम हैं।
चिकित्सा अधीक्षक डॉ. लखन सिंह ने अपने संबोधन में प्राकृतिक एवं पारंपरिक खान-पान की महत्ता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि स्थानीय स्तर पर उपलब्ध ताजे, प्राकृतिक एवं पौष्टिक खाद्य पदार्थों का नियमित सेवन अनेक बीमारियों से बचाव में सहायक होता है। उन्होंने लोगों से संतुलित आहार, नियमित व्यायाम एवं स्वस्थ जीवनशैली अपनाने का आह्वान किया।
कार्यक्रम के दौरान डॉ. किशोर ने उच्च रक्तचाप (हाइपरटेंशन) एवं मधुमेह (डायबिटीज) के बढ़ते बोझ पर विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि बदलती जीवनशैली एवं असंतुलित भोजन के कारण इन बीमारियों के मामलों में लगातार वृद्धि हो रही है, जिनकी रोकथाम में संतुलित एवं पौष्टिक आहार की महत्वपूर्ण भूमिका है।
इसके पश्चात डायटेटिक्स विभाग से श्री प्रांजुल श्रीवास्तव ने पौष्टिक आहार थाली (Nutritious Food Plate) का प्रदर्शन किया तथा संतुलित आहार की अवधारणा को सरल एवं व्यवहारिक तरीके से समझाया। उन्होंने दैनिक भोजन में विभिन्न खाद्य समूहों के संतुलित समावेश की आवश्यकता पर प्रकाश डालते हुए स्वस्थ भोजन की आदतों को अपनाने का संदेश दिया।
कार्यक्रम में डॉ. अर्चना सिंह, डॉ. श्रुति, डॉ. आशीष, डॉ. रवि, डॉ. मधु, डॉ. सुमित, डॉ. मेलिशा, डॉ. किशोर, डॉ. दुर्गा, नर्सिंग सुपरीटेंडेंट श्री मती स्वाति कुमारा श्री मती उज्जवला दास, श्री मती पिंकी दास, श्रीमती पुष्प लता शर्मा श्रीमतीनेहा उड़ान सहित अनेक संकाय सदस्य, विद्यार्थी एवं स्वास्थ्यकर्मी उपस्थित रहे। सभी प्रतिभागियों ने कार्यक्रम में उत्साहपूर्वक सहभागिता की।
कार्यक्रम के माध्यम से प्रतिभागियों को सेहत पहल के उद्देश्यों से अवगत कराया गया तथा कृषि, पोषण एवं स्वास्थ्य के समन्वित प्रयासों द्वारा निवारक स्वास्थ्य सेवाओं को सशक्त बनाने की आवश्यकता पर बल दिया गया। कार्यक्रम का समापन संवादात्मक चर्चा, प्रश्नोत्तर सत्र एवं धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ।



