

बिलासपुर, 23 जून। प्रसिद्ध इस्लामी विद्वान एवं आलिम मुफ्ती मुख्तार अशरफ ने कहा कि भारत दुनिया में “अनेकता में एकता” की मिसाल है और देश की असली ताकत प्रेम, भाईचारा तथा सामाजिक सौहार्द में निहित है। उन्होंने कहा कि शिक्षा से दूरी मुसलमानों की अनेक समस्याओं का प्रमुख कारण रही है और वर्तमान समय में समाज को आगे बढ़ाने का सबसे प्रभावी माध्यम गुणवत्तापूर्ण शिक्षा है।
बिलासपुर प्रेस क्लब में आयोजित प्रेस वार्ता में उन्होंने कहा कि इस्लाम का पहला संदेश “पढ़ो” था, इसलिए शिक्षा हासिल करना प्रत्येक व्यक्ति की जिम्मेदारी है। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे शिक्षा प्राप्त करें, संविधान के दायरे में रहकर देश और समाज की सेवा करें तथा सकारात्मक भूमिका निभाएं।
मुफ्ती अशरफ ने कहा कि कुरान का संदेश है कि बुराई का जवाब भलाई से दिया जाए। उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि हाल ही में महाराष्ट्र के भिवंडी में नीट परीक्षा के दौरान एक मदरसे ने विभिन्न समुदायों के अभिभावकों के लिए भोजन और विश्राम की व्यवस्था कर मानवता का परिचय दिया। ऐसे कार्य समाज में विश्वास और सौहार्द को मजबूत करते हैं।
उन्होंने कहा कि मंदिर-मस्जिद और हिंदू-मुस्लिम की राजनीति से देश का विकास नहीं हो सकता। वास्तविक मुद्दे शिक्षा, रोजगार, स्वास्थ्य और सामाजिक विकास से जुड़े हैं, जिन पर गंभीर चर्चा और कार्य होना चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत की स्वतंत्रता में सभी धर्मों के लोगों ने मिलकर योगदान दिया और आज भी देश की प्रगति आपसी एकता और सहयोग से ही संभव है।
एक प्रश्न के उत्तर में उन्होंने कहा कि “जिहाद” का वास्तविक अर्थ संघर्ष और प्रयास है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस्लाम में जिहाद का अर्थ आतंकवाद नहीं, बल्कि बुराइयों, भ्रष्टाचार, अशिक्षा और अन्याय के खिलाफ संघर्ष करना है। माता-पिता की सेवा करना, शिक्षा प्राप्त करना, समाज कल्याण के लिए कार्य करना और मानवता की सेवा करना भी जिहाद की श्रेणी में आता है।
उन्होंने कहा कि सभी धर्मों के लोगों को एक-दूसरे के रीति-रिवाजों, त्योहारों और आस्थाओं का सम्मान करना चाहिए। समाज में सहिष्णुता और सहयोग की भावना ही शांति और विकास की आधारशिला है।
प्रेस वार्ता में शहर के पत्रकार, सामाजिक कार्यकर्ता एवं विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधि उपस्थित थे।



