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शिक्षा विभाग में बड़ा उलटफेर, 6 महीने पहले बने प्राचार्य को मिली जिले की कमान, वरिष्ठता दरकिनार होने पर भड़का असंतोषबिलासपुर में डीईओ नियुक्ति पर बवाल, सीनियर प्राचार्यों में नाराजगी; हाईकोर्ट जाने की तैयारी

Mohammed Israil
Mohammed Israil  - Editor
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बिलासपुर। स्कूल शिक्षा विभाग में जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) की नई नियुक्ति ने बड़ा प्रशासनिक और वरिष्ठता विवाद खड़ा कर दिया है। जिले के डीईओ विजय टांडे के स्थानांतरण के बाद शासन ने शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय जेवरा, मस्तूरी के प्राचार्य रामेश्वर जायसवाल को प्रभारी जिला शिक्षा अधिकारी नियुक्त कर दिया है। नियुक्ति के तुरंत बाद विभागीय गलियारों में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है। कई वरिष्ठ प्राचार्यों ने इस फैसले पर सवाल खड़े किए हैं और इसे वरिष्ठता क्रम की अनदेखी बताते हुए न्यायालय की शरण लेने की तैयारी शुरू कर दी है।
शिक्षा विभाग में चर्चा का सबसे बड़ा विषय यह है कि जिस अधिकारी को महज छह माह पहले प्राचार्य पद पर पदोन्नति मिली, उसे जिले के सर्वोच्च शैक्षणिक प्रशासनिक पद की जिम्मेदारी कैसे सौंप दी गई। विभाग के भीतर इसे लेकर असंतोष खुलकर सामने आने लगा है।
विजय टांडे का तबादला, सक्ती भेजे गए
शासन द्वारा जारी आदेश के अनुसार बिलासपुर के जिला शिक्षा अधिकारी विजय टांडे का तबादला कर उन्हें सक्ती जिले का जिला शिक्षा अधिकारी बनाया गया है। इसके साथ ही बिलासपुर जिले की जिम्मेदारी रामेश्वर जायसवाल को सौंपी गई है।
विजय टांडे का कार्यकाल कई कारणों से चर्चा में रहा। विभागीय स्तर पर विभिन्न प्रशासनिक निर्णयों, पदस्थापनाओं और अन्य मामलों को लेकर लगातार सवाल उठते रहे। वहीं हाल के महीनों में जिले के शैक्षणिक प्रदर्शन को लेकर भी शासन स्तर पर गंभीर समीक्षा हुई थी।
बोर्ड परीक्षा परिणामों के बाद बढ़ी थी जवाबदेही
सूत्रों के अनुसार हाल ही में सुशासन तिहार के दौरान आयोजित समीक्षा बैठकों में जिले के 10वीं और 12वीं बोर्ड परीक्षा परिणामों पर गंभीर चर्चा हुई थी। जिले के अपेक्षित प्रदर्शन नहीं कर पाने को लेकर उच्च स्तर पर नाराजगी भी व्यक्त की गई थी। इसके बाद से ही शिक्षा विभाग में प्रशासनिक बदलाव की चर्चाएं तेज हो गई थीं।
आखिरकार शासन ने डीईओ स्तर पर बदलाव करते हुए विजय टांडे को सक्ती भेज दिया और नए प्रभारी डीईओ की नियुक्ति कर दी।
कौन हैं रामेश्वर जायसवाल?
नवनियुक्त प्रभारी डीईओ रामेश्वर जायसवाल शिक्षा विभाग के लिए नया नाम नहीं हैं। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत शिक्षाकर्मी के रूप में की थी। बाद में विभागीय प्रक्रियाओं के तहत वे नियमित सेवा में आए और विभिन्न पदों पर कार्य करते रहे।
करीब छह माह पहले उन्हें प्राचार्य पद पर पदोन्नति मिली थी तथा उनकी पदस्थापना शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय जेवरा, मस्तूरी में की गई थी। अब उन्हें सीधे बिलासपुर जिले के प्रभारी जिला शिक्षा अधिकारी की जिम्मेदारी सौंप दी गई है।
यही तथ्य विभागीय विवाद का केंद्र बन गया है।
वरिष्ठता बनाम नियुक्ति का सवाल
शिक्षा विभाग के कई वरिष्ठ अधिकारियों का मानना है कि जिले में ऐसे अनेक प्राचार्य पदस्थ हैं जिन्हें प्रशासनिक अनुभव और सेवा अवधि के आधार पर अधिक वरिष्ठ माना जाता है। ऐसे में जूनियर अधिकारी को प्रभारी डीईओ बनाए जाने से वरिष्ठता व्यवस्था पर प्रश्न खड़े हो रहे हैं।
विभागीय सूत्रों के अनुसार कई वरिष्ठ प्राचार्य इस निर्णय को लेकर आपसी चर्चा कर रहे हैं। नियुक्ति आदेश की वैधानिकता, वरिष्ठता सूची और प्रशासनिक प्रक्रिया का अध्ययन भी कराया जा रहा है।
न्यायालय जाने की तैयारी
जानकारी के अनुसार कुछ वरिष्ठ प्राचार्य इस नियुक्ति को चुनौती देने की तैयारी में हैं। विभागीय स्तर पर कानूनी सलाह ली जा रही है और नियुक्ति आदेश से संबंधित दस्तावेजों का परीक्षण किया जा रहा है।
सूत्रों का कहना है कि यदि वरिष्ठता संबंधी दावों को पर्याप्त आधार मिला तो मामले को हाईकोर्ट में चुनौती दी जा सकती है। हालांकि इस संबंध में अभी तक किसी पक्ष की ओर से औपचारिक याचिका दायर नहीं की गई है।
दूसरी तरफ: डीईओ के तबादले को लेकर कांग्रेस नेता अंकित गौरहा का दावा


“यह सिर्फ तबादला नहीं, लंबे संघर्ष की शुरुआती सफलता”
जिला शिक्षा अधिकारी विजय टांडे के स्थानांतरण के बाद कांग्रेस नेता अंकित गौरहा ने इसे शिक्षा विभाग में जवाबदेही और पारदर्शिता की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया है।
अंकित गौरहा का कहना है कि पिछले कई महीनों से वे शिक्षा विभाग में कथित अनियमितताओं, भ्रष्टाचार और प्रशासनिक विसंगतियों को लेकर लगातार शिकायतें और दस्तावेज संबंधित अधिकारियों को सौंपते रहे हैं। उनके अनुसार यह बदलाव उसी दबाव और संघर्ष का परिणाम है।
इन मुद्दों को लेकर उठाते रहे सवाल
अंकित गौरहा के अनुसार उन्होंने समय-समय पर निम्न मामलों में शिकायतें दर्ज कराई थीं—
युक्तियुक्तकरण प्रक्रिया
अनुकंपा नियुक्तियां
शिक्षकों के अटैचमेंट
पदोन्नति संशोधन
पदस्थापना आदेश
प्रशासनिक निर्णयों में कथित अनियमितताएं
उन्होंने दावा किया कि इन मामलों से संबंधित दस्तावेज कलेक्टर, संभाग आयुक्त, संयुक्त संचालक, लोक शिक्षण संचालनालय, शिक्षा सचिव और शासन स्तर तक प्रस्तुत किए गए थे।
हाईकोर्ट और डीपीआई आदेशों की अवहेलना का आरोप
गौरहा ने आरोप लगाया कि जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय में कुछ मामलों में हाईकोर्ट और लोक शिक्षण संचालनालय (डीपीआई) के निर्देशों के अनुरूप कार्रवाई नहीं की गई।
उनका कहना है कि पदोन्नति संशोधन और पदस्थापना से जुड़े कुछ मामलों में नियमों को दरकिनार कर चयनित व्यक्तियों को लाभ पहुंचाने के प्रयास किए गए, जिसकी स्वतंत्र जांच आवश्यक है।
अनुकंपा नियुक्तियों पर भी उठे सवाल
कांग्रेस नेता ने दावा किया कि अनुकंपा नियुक्तियों से जुड़े मामलों में भी कई शिकायतें प्राप्त हुई हैं। आरोप है कि पात्रता संबंधी नियमों की अनदेखी कर कुछ मामलों में लाभ दिया गया।
उन्होंने कहा कि इन शिकायतों की निष्पक्ष जांच अभी भी लंबित है और पूरे मामले की जांच आवश्यक है।
“केवल तबादला समाधान नहीं”
अंकित गौरहा ने कहा कि केवल एक अधिकारी का स्थानांतरण अंतिम समाधान नहीं माना जा सकता। उनके अनुसार जिन मामलों में नियमों की अनदेखी हुई है या जिन व्यक्तियों को कथित रूप से अनुचित लाभ मिला है, उनकी भी जांच होनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि जब तक सभी शिकायतों की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई नहीं होती, तब तक उनका अभियान जारी रहेगा।
शिक्षा विभाग में बढ़ी हलचल
डीईओ के तबादले और नए प्रभारी डीईओ की नियुक्ति के बाद शिक्षा विभाग में हलचल तेज हो गई है। एक ओर वरिष्ठता को लेकर सवाल उठ रहे हैं तो दूसरी ओर पूर्व प्रशासनिक निर्णयों और विभागीय शिकायतों को लेकर बहस फिर से केंद्र में आ गई है।
आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि वरिष्ठता विवाद किस दिशा में आगे बढ़ता है और विभागीय शिकायतों पर शासन तथा प्रशासन क्या रुख अपनाते हैं। :::

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