
फेसबुक लाइव कार्यक्रम ‘संवाद’ में पूर्व मंत्री अमर अग्रवाल ने समान नागरिक संहिता (UCC) को देश की एकता, समानता और न्याय से जोड़ते हुए बड़ा मुद्दा बनाया। उन्होंने कहा कि अलग-अलग व्यक्तिगत कानूनों की वजह से पैदा हो रही असमानता को खत्म करने के लिए अब एक समान कानून की जरूरत है, जो हर नागरिक को बराबरी का अधिकार दे सके।
बिलासपुर।
पूर्व मंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेता अमर अग्रवाल ने अपने नियमित फेसबुक लाइव कार्यक्रम ‘संवाद’ में इस बार समान नागरिक संहिता (UCC) जैसे अहम विषय पर विस्तार से बात रखी। उन्होंने इसे संविधान की मूल भावना से जुड़ा विषय बताते हुए कहा कि देश में समानता और न्याय सुनिश्चित करने के लिए UCC जरूरी है।
अमर अग्रवाल ने कहा कि भारत एक राष्ट्र है और यहां का संविधान सभी नागरिकों को समान अधिकार देता है, ऐसे में अलग-अलग व्यक्तिगत कानूनों का अस्तित्व कई बार न्याय में असमानता पैदा करता है। UCC इस खाई को खत्म कर समान अवसर और समान न्याय की व्यवस्था स्थापित करेगा।
उन्होंने साफ किया कि UCC का उद्देश्य किसी धर्म विशेष को प्रभावित करना नहीं है, बल्कि यह केवल नागरिक जीवन से जुड़े मामलों—जैसे विवाह, तलाक और उत्तराधिकार—को एक समान कानूनी ढांचे में लाना है। इससे न्यायिक प्रक्रिया भी सरल और पारदर्शी बनेगी।
महिलाओं के अधिकार पर फोकस
कार्यक्रम में महिलाओं के अधिकारों का मुद्दा प्रमुखता से उठाया गया। अमर अग्रवाल ने कहा कि कई व्यक्तिगत कानूनों में महिलाओं को बराबरी का अधिकार नहीं मिल पाता, जिससे सामाजिक असंतुलन पैदा होता है। UCC महिलाओं को समान अधिकार, सुरक्षा और सम्मान दिलाने की दिशा में अहम भूमिका निभाएगा।
व्यवस्था और पारदर्शिता का तर्क
उन्होंने कहा कि मौजूदा व्यवस्था में अलग-अलग कानून होने के कारण न्यायिक प्रक्रिया जटिल हो जाती है। UCC लागू होने से न केवल प्रक्रिया आसान होगी, बल्कि फैसलों में एकरूपता भी आएगी।
उत्तराखंड मॉडल का जिक्र
अमर अग्रवाल ने उत्तराखंड में लागू UCC का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां इस कानून से किसी की धार्मिक स्वतंत्रता प्रभावित नहीं हुई है। इसके विपरीत, इससे प्रशासनिक व्यवस्था और पारदर्शिता को मजबूती मिली है।
छत्तीसगढ़ के संदर्भ में बात
उन्होंने कहा कि यदि छत्तीसगढ़ में UCC लागू होता है तो सामाजिक समरसता को बढ़ावा मिलेगा और खासतौर पर ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाओं को कानूनी सुरक्षा का लाभ मिलेगा। इससे न्याय प्रणाली भी तेज और प्रभावी बनेगी।
भ्रम बनाम वास्तविकता
कार्यक्रम के दौरान उन्होंने यह भी कहा कि UCC को लेकर कई तरह की भ्रांतियां फैलाई जा रही हैं, जबकि यह केवल नागरिक मामलों को व्यवस्थित करने वाला कानून है और संविधान द्वारा दी गई धार्मिक स्वतंत्रता इससे प्रभावित नहीं होती।
कार्यक्रम के अंत में उन्होंने पार्टी की विचारधारा का जिक्र करते हुए कहा कि समानता और विकास की दिशा में UCC एक अहम पहल के रूप में देखा जाना चाहिए।



