

बिलासपुर।
जिले के ग्रामीण अंचलों में खनिज चोरी का नेटवर्क किस कदर सक्रिय है, इसका ताजा उदाहरण ग्राम पंचायत लोफंदी में सामने आया है। यहां दिन के उजाले में पोकलेन मशीनों से मुरूम की अवैध खुदाई की जा रही है, जबकि प्रशासनिक दावे लगातार कार्रवाई के हैं। जमीनी हकीकत इससे उलट नजर आ रही है, जिससे पूरे सिस्टम पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
अयोध्या देवांगन, सरपंच ग्राम पंचायत लोफंदी।
बिलासपुर शहर से चंद किलोमीटर दूर स्थित इस गांव में खनिज माफिया बेखौफ होकर सक्रिय हैं। ग्रामीणों के अनुसार, अब स्थिति इतनी गंभीर हो चुकी है कि चोरों को किसी तरह का डर नहीं रहा और वे खुलेआम अवैध खनन कर रहे हैं।
ग्राम पंचायत के सरपंच और स्थानीय ग्रामीणों ने इस मामले को लेकर कलेक्टर से शिकायत दर्ज कराई है। उनका कहना है कि खनिज विभाग को चार से पांच बार लिखित और मौखिक रूप से जानकारी दी गई, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो सकी। शिकायतों का सिलसिला जारी है, लेकिन हालात जस के तस बने हुए हैं।
ग्रामीणों ने यह भी बताया कि जब-जब कार्रवाई के लिए टीम पहुंचने की सूचना मिलती है, उससे पहले ही खनिज चोर मौके से फरार हो जाते हैं। इससे यह सवाल उठने लगा है कि आखिर कार्रवाई की सूचना पहले ही कैसे लीक हो जाती है।
स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया है कि खनिज विभाग के कुछ अधिकारियों के संरक्षण में यह अवैध कारोबार फल-फूल रहा है। उनका कहना है कि हर बार शिकायत करने पर केवल आश्वासन दिया जाता है, लेकिन जमीनी स्तर पर कोई ठोस कार्रवाई नजर नहीं आती।
ग्राम पंचायत लोफंदी के सरपंच अयोध्या देवांगन ने बताया कि गांव में लगातार मुरूम की चोरी हो रही है और कई बार शिकायत के बावजूद कोई स्थायी समाधान नहीं निकल पाया है।



वहीं इस पूरे मामले पर कलेक्टर संजय अग्रवाल ने कहा कि प्रशासन द्वारा लगातार कार्रवाई की जा रही है, लेकिन संसाधनों और समय की सीमाओं के चलते हर स्थान पर एक साथ पहुंचना चुनौतीपूर्ण होता है। उन्होंने ग्रामीणों से अपील की कि वे एकजुट होकर विरोध करें, जिससे अवैध खनन पर प्रभावी नियंत्रण संभव हो सके।
कलेक्टर ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि किसी के पास अधिकारियों की संलिप्तता के प्रमाण हैं, तो उन्हें सामने लाया जाए, ताकि संबंधितों पर सख्त कार्रवाई की जा सके।
ग्राम पंचायत लोफंदी में मुरूम की अवैध खुदाई का यह मामला फिलहाल क्षेत्र में चर्चा का केंद्र बना हुआ है, जहां खनिज माफियाओं की सक्रियता और प्रशासनिक कार्रवाई के बीच की दूरी साफ नजर आ रही है।

