Latest news

हाईकोर्ट के आदेशों की अवमानना पर सख्ती, 21 मार्च को होगी निर्णायक समीक्षा बैठक

Mohammed Israil
Mohammed Israil  - Editor
3 Min Read

बिलासपुर, 20 मार्च 2026।
छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय द्वारा लगातार अवमानना (कंटेम्प्ट) प्रकरणों में सख्ती दिखाए जाने के बाद अब बिलासपुर जिला प्रशासन पूरी तरह दबाव में है। कोर्ट के आदेशों के पालन में हो रही देरी और लापरवाही को गंभीरता से लेते हुए 21 मार्च 2026 को मंथन सभा कक्ष में हाई-लेवल समीक्षा बैठक बुलाई गई है। इस बैठक में उन सभी मामलों की विस्तृत समीक्षा होगी, जिनमें हाईकोर्ट के निर्देशों का समय पर पालन नहीं किया गया या जवाब प्रस्तुत करने में देरी हुई है।
हाईकोर्ट की सख्ती का सीधा असर
अवमानना प्रकरणों में बढ़ती नाराजगी
छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने बार-बार आदेशों के पालन में देरी पर कड़ा रुख अपनाया है, जिससे प्रशासनिक तंत्र पर दबाव बढ़ा है।
समय-सीमा उल्लंघन बना बड़ा कारण
कई मामलों में निर्धारित समय के भीतर जवाबदावा प्रस्तुत नहीं किया गया, जिसके चलते अवमानना प्रकरण लंबित होते गए।
कोर्ट के आदेशों की अनदेखी उजागर
ऐसे प्रकरण भी सामने आए हैं, जिनमें स्पष्ट निर्देशों के बावजूद कार्रवाई नहीं हुई।
बैठक में किन मामलों पर रहेगा फोकस?
कलेक्टर को पक्षकार बनाए गए प्रकरण
जिन अवमानना मामलों में कलेक्टर बिलासपुर को पक्षकार बनाया गया है, उनकी प्राथमिकता से समीक्षा होगी।
विभागवार जवाबदारी तय
प्रत्येक विभाग से उसके लंबित मामलों की अद्यतन स्थिति और कार्रवाई रिपोर्ट ली जाएगी।
दस्तावेज और जवाबदावा की जांच
प्रस्तुत किए गए जवाब, अनुपालन रिपोर्ट और दस्तावेजों का बारीकी से परीक्षण होगा।
अधिकारियों के लिए कड़ा निर्देश
अनिवार्य उपस्थिति का आदेश
सभी विभाग प्रमुखों को मंथन सभा कक्ष में सुबह 10 बजे अनिवार्य रूप से उपस्थित रहने के निर्देश दिए गए हैं।
अद्यतन जानकारी के साथ पहुंचे अधिकारी
प्रत्येक अधिकारी को अपने-अपने प्रकरणों की पूरी अपडेट और आवश्यक दस्तावेज साथ लाने के निर्देश।
लापरवाही पर कार्रवाई के संकेत
अधूरी जानकारी, अनुपस्थिति या देरी पर जिम्मेदारी तय कर सख्त कदम उठाए जा सकते हैं।
प्रशासन के सामने चुनौती
लंबित मामलों का बढ़ता दबाव
अवमानना प्रकरणों की संख्या में वृद्धि से प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
समयबद्ध निराकरण की जरूरत
कलेक्टर ने स्पष्ट किया है कि सभी मामलों का शीघ्र और समय-सीमा के भीतर निराकरण सुनिश्चित किया जाए।
क्यों अहम है यह समीक्षा?
हाईकोर्ट के आदेशों के पालन की वास्तविक स्थिति सामने आएगी
विभागीय लापरवाही और देरी की जिम्मेदारी तय होगी
भविष्य में अवमानना प्रकरणों को रोकने की रणनीति बनेगी

खबर को शेयर करने के लिए क्लिक करे।।