बिलासपुर, रायपुर,बलरामपुर | न्यूज़ डॉन छत्तीसगढ़
छत्तीसगढ़ में नशे के खिलाफ कार्रवाई के बीच अब एक और बड़ा और चिंताजनक मामला सामने आया है। दुर्ग जिले में अफीम की खेती पकड़े जाने के बाद अब बलरामपुर जिले में भी अवैध अफीम की खेती का खुलासा हुआ है। पुलिस ने त्रिपुरी क्षेत्र के सरनाटोली गांव में करीब 5 एकड़ जमी

न पर उगाई जा रही अफीम की फसल बरामद की है।
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि इस खेती के पीछे झारखंड के लोगों का नेटवर्क सक्रिय था, जो छत्तीसगढ़ के सीमावर्ती जिलों में जमीन लेकर या संपर्क बनाकर अवैध खेती कर रहे थे। पुलिस ने मौके से 5 लोगों को हिरासत में लिया है और उनसे पूछताछ जारी है।
अधिकारियों का कहना है कि पूरे नेटवर्क का खुलासा पूछताछ के बाद होगा, क्योंकि मामले में बाहरी राज्यों के लोगों की संलिप्तता के संकेत मिले हैं।
सरनाटोली गांव में 5 एकड़ में उग रही थी अफीम
जानकारी के अनुसार यह पूरा मामला कुसमी थाना क्षेत्र का है।
मंगलवार (10 मार्च) को पुलिस और प्रशासन की संयुक्त टीम को सूचना मिली थी कि गांव के एक खेत में अवैध अफीम की खेती की जा रही है।
मौके पर पहुंची टीम ने जांच की तो करीब 5 एकड़ क्षेत्र में अफीम के पौधे लगे मिले।
पुलिस ने खेत को कब्जे में लेकर पूरी फसल को जब्त करने की प्रक्रिया शुरू कर दी।
अफीम की खेती बेहद संवेदनशील अपराध है क्योंकि इससे हेरोइन और अन्य मादक पदार्थ तैयार किए जाते हैं, जो बड़े अंतरराज्यीय ड्रग नेटवर्क से जुड़े होते हैं।
झारखंड कनेक्शन: बाहरी लोगों ने की थी खेती
जांच में यह बात सामने आई है कि:
इस खेती को झारखंड के कुछ लोगों द्वारा संचालित किया जा रहा था।
उन्होंने स्थानीय स्तर पर संपर्क बनाकर खेत में अफीम बोई थी।
मामले में जशपुर जिले के एक भाजपा नेता से संपर्क किए जाने की भी बात सामने आई है, जिसकी भूमिका की जांच की जा रही है।
पुलिस सूत्रों के अनुसार इस नेटवर्क के तार और भी बड़े स्तर तक जुड़ सकते हैं, इसलिए हिरासत में लिए गए लोगों से लगातार पूछताछ की जा रही है।
5 लोग हिरासत में, कई और पर शक
पुलिस ने मौके से 5 संदिग्धों को हिरासत में लिया है।
अधिकारियों के मुताबिक:
उनसे अफीम के बीज कहां से आए,
खेती के लिए जमीन किसने उपलब्ध कराई,
और फसल की सप्लाई किसे की जानी थी,
इन सभी बिंदुओं पर पूछताछ की जा रही है।
संभावना जताई जा रही है कि यह अंतरराज्यीय नशा तस्करी नेटवर्क का हिस्सा हो सकता है।
दुर्ग में भी हाल ही में पकड़ी गई थी अफीम की खेती
छत्तीसगढ़ में यह दूसरा बड़ा मामला है।
इससे पहले दुर्ग जिले में भी पुलिस ने अफीम की अवैध खेती का खुलासा किया था। लगातार सामने आ रहे मामलों से यह सवाल उठने लगा है कि:
क्या छत्तीसगढ़ ड्रग खेती का नया ठिकाना बनता जा रहा है?
क्या बाहरी राज्यों के गिरोह जंगल और सीमावर्ती इलाकों का फायदा उठा रहे हैं?
विशेषज्ञों का कहना है कि छत्तीसगढ़ के कई दूरस्थ और वन क्षेत्रों में निगरानी कम होने से ऐसे गिरोह सक्रिय हो सकते हैं।



दूसरी कार्रवाई: भाजपा नेता के भाई की अवैध दुकान पर बुलडोजर
इसी बीच दुर्ग जिले में प्रशासन ने एक और बड़ी कार्रवाई की है।
यहां अफीम की खेती से जुड़े भाजपा नेता विनायक के भाई की अवैध दुकान पर बुलडोजर चलाया गया।
जानकारी के मुताबिक:
बुजेश ताम्रकार नाम के व्यक्ति ने गांव की करीब 32 डिसमिल जमीन पर अवैध कब्जा कर दुकान बना ली थी।
यह कब्जा करीब 20 साल पुराना बताया जा रहा है।
प्रशासन ने पुलिस बल की मौजूदगी में अवैध निर्माण को हटवा दिया।
यह कार्रवाई जेवरा-सिरसा चौकी क्षेत्र में की गई।
छत्तीसगढ़ में क्यों बढ़ रही नशे की खेती?
विशेषज्ञ और सुरक्षा एजेंसियां इस मामले को बेहद गंभीर मान रही हैं।
इसके पीछे कई संभावित कारण बताए जा रहे हैं:
सीमावर्ती जिलों में निगरानी की कमी
जंगल और दूरस्थ इलाकों में पुलिस की सीमित पहुंच
बाहरी राज्यों के गिरोहों का सक्रिय होना
स्थानीय स्तर पर आर्थिक लालच में सहयोग
यदि समय रहते इस पर सख्ती नहीं की गई तो छत्तीसगढ़ में ड्रग्स नेटवर्क का बड़ा जाल फैल सकता है।
पुलिस और प्रशासन अलर्ट
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि:
मामले की गहन जांच की जा रही है
ड्रग्स नेटवर्क के अन्य सदस्यों की पहचान की जा रही है
जरूरत पड़ने पर एनडीपीएस एक्ट के तहत कड़ी कार्रवाई की जाएगी
बड़ी बात
दुर्ग और बलरामपुर में लगातार सामने आ रहे मामलों ने छत्तीसगढ़ में नशे की खेती और ड्रग नेटवर्क को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
यदि जांच में बड़े नेटवर्क का खुलासा होता है तो आने वाले दिनों में राज्य में और बड़ी कार्रवाई हो सकती है।

