देशभर में रंग, गुलाल और जश्न के बीच होली का खतरनाक पहलू भी सामने आया। छत्तीसगढ़ की न्यायधानी बिलासपुर के सिम्स अस्पताल में होली के दौरान चोट, सड़क दुर्घटना, मारपीट और जहर सेवन जैसे मामलों की बाढ़ आ गई। मात्र दो दिनों में 477 मरीज उपचार के लिए पहुंचे। हालात को देखते हुए अस्पताल प्रशासन पहले से ही अलर्ट मोड पर था और वरिष्ठ अधिकारियों ने खुद अस्पताल का निरीक्षण कर व्यवस्थाओं पर नजर बनाए रखी।
त्योहार से पहले ही सिम्स प्रशासन हुआ सतर्क
होली पर्व के दौरान संभावित हादसों और आपात परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए सिम्स प्रशासन ने पहले ही तैयारी शुरू कर दी थी। अधिष्ठाता डॉ. रमणेश मूर्ति के निर्देशन में 2 मार्च 2026 को चिकित्सा अधीक्षक कार्यालय में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई।
बैठक में अस्पताल की सभी स्वास्थ्य सेवाओं को सुचारू बनाए रखने, आपातकालीन सेवाओं को पूरी तरह सक्रिय रखने तथा चिकित्सकों, नर्सिंग स्टाफ और कर्मचारियों को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए।
अधिष्ठाता और चिकित्सा अधीक्षक ने किया निरीक्षण
होली के दौरान अधिष्ठाता डॉ. रमणेश मूर्ति और चिकित्सा अधीक्षक डॉ. लखन सिंह ने अस्पताल के विभिन्न वार्डों, कैजुअल्टी और अन्य विभागों का निरीक्षण किया।
निरीक्षण के दौरान उन्होंने अस्पताल की व्यवस्थाओं का जायजा लेते हुए स्पष्ट निर्देश दिए कि त्योहार के दौरान आने वाले मरीजों को त्वरित और बेहतर उपचार उपलब्ध कराया जाए तथा किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए सभी विभाग पूरी तैयारी में रहें।
दो दिन में 477 मरीजों का उपचार
सिम्स प्रशासन की तैयारियों के चलते होली के दौरान अस्पताल की सभी सेवाएं सुचारू रूप से संचालित होती रहीं।
प्राप्त जानकारी के अनुसार 3 मार्च और 4 मार्च 2026 को सिम्स के कैजुअल्टी और ओपीडी में कुल 477 मरीजों को उपचार दिया गया।
हादसों और हिंसा के कई मामले आए सामने
होली के दौरान सामने आए मामलों ने त्योहार के दौरान होने वाले जोखिमों को भी उजागर किया। अस्पताल में दर्ज आंकड़ों के अनुसार—
20 सड़क दुर्घटना के मामले
16 मारपीट के मामले
10 आकस्मिक चोट के मामले
1 चाकू से चोट का मामला
16 जहर सेवन के मामले
1 फांसी का मामला
1 सर्पदंश का मामला
1 डूबने की घटना
इसके अलावा 2 एमएलसी और 2 नॉन-एमएलसी मरीज मृत अवस्था में अस्पताल लाए गए।
ओपीडी में भी मरीजों की लंबी कतार
होली के दौरान केवल आपातकालीन ही नहीं बल्कि सामान्य मरीजों की संख्या भी काफी अधिक रही। अस्पताल की ओपीडी में 384 मरीजों का उपचार किया गया।
चिकित्सकों और कर्मचारियों ने निभाई जिम्मेदारी
त्योहार के बावजूद सिम्स के चिकित्सकों, नर्सिंग स्टाफ और कर्मचारियों ने पूरी जिम्मेदारी के साथ अपनी सेवाएं दीं, जिससे मरीजों को समय पर उपचार मिल सका।
“मरीजों की सेवा ही सर्वोच्च प्राथमिकता”
सिम्स के अधिष्ठाता डॉ. रमणेश मूर्ति ने कहा कि त्योहारों के दौरान भी मरीजों की सेवा सर्वोच्च प्राथमिकता रहती है। उन्होंने चिकित्सकों और कर्मचारियों के समर्पण की सराहना करते हुए कहा कि उनके सहयोग से ही होली के दौरान भी अस्पताल की व्यवस्थाएं सुचारू रूप से संचालित हो सकीं।
वहीं चिकित्सा अधीक्षक डॉ. लखन सिंह ने बताया कि अस्पताल में आपातकालीन सेवाओं को पूरी तरह सक्रिय रखा गया था और सभी विभागों को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए थे, ताकि किसी भी मरीज को उपचार में कोई परेशानी न हो। उन्होंने बेहतर समन्वय के लिए पुलिस विभाग और जिला प्रशासन के प्रति भी आभार व्यक्त किया।

