बिलासपुर/रायपुर। छत्तीसगढ़ में सड़क निर्माण की गुणवत्ता को लेकर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने सख्त रुख अपनाया है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि प्रदेश में बनने वाली सड़कों की गुणवत्ता से किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा। निर्माण कार्य में लापरवाही या गुणवत्ताहीन काम सामने आने पर संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी और दोषी ठेकेदारों को ब्लैकलिस्ट किया जाएगा।

मुख्यमंत्री ने ये निर्देश गुरुवार को मंत्रालय महानदी भवन में लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) के कार्यों और गतिविधियों की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक के दौरान दिए। बैठक में उप मुख्यमंत्री एवं लोक निर्माण मंत्री अरुण साव भी मौजूद रहे।
निर्माण के बाद नहीं, काम के दौरान ही जांच पर जोर
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि सड़क बनने के बाद निरीक्षण करने की परंपरा पर्याप्त नहीं है। निर्माण कार्य के दौरान ही नियमित रूप से फील्ड में जाकर गुणवत्ता की निगरानी की जाए। उन्होंने कहा कि सड़क निर्माण केवल एक तकनीकी प्रक्रिया नहीं बल्कि आमजन की सुविधा से सीधे जुड़ा हुआ बुनियादी ढांचा है और इससे सरकार की छवि भी बनती है।
उन्होंने कहा कि यदि सड़क बनने के कुछ वर्षों के भीतर ही खराब हो जाती है तो इससे सरकार की विश्वसनीयता प्रभावित होती है और लोगों में असंतोष पैदा होता है।
बागबहार–कोतबा सड़क की हालत पर जताई नाराजगी
समीक्षा बैठक में बागबहार–कोतबा सड़क की खराब स्थिति का मामला भी उठा। मुख्यमंत्री ने इस सड़क की स्थिति पर नाराजगी जताई और कहा कि यह सड़क कुछ वर्ष पहले ही बनी थी, लेकिन इसकी हालत तेजी से खराब हो गई है। उन्होंने कहा कि यदि कोई सड़क चार वर्ष भी नहीं चल पाती तो उसका औचित्य ही समाप्त हो जाता है।
उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि इस सड़क के निर्माण में हुई कमियों की गंभीरता से जांच की जाए और भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न हो, इसके लिए निर्माण के दौरान ही सख्त गुणवत्ता निगरानी सुनिश्चित की जाए।
सड़क परियोजनाओं का शिलान्यास बड़े स्तर पर कराने के निर्देश
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में बड़े पैमाने पर सड़क निर्माण कार्य हो रहे हैं, लेकिन इन कार्यों की जानकारी आम जनता तक पर्याप्त रूप से नहीं पहुंच पाती। इससे विकास कार्यों का सकारात्मक नैरेटिव भी सामने नहीं आ पाता।
उन्होंने अधिकारियों से कहा कि बड़ी सड़क परियोजनाओं के शिलान्यास और भूमिपूजन मुख्यमंत्री और मंत्रियों के हाथों से कराए जाएं और इन कार्यक्रमों को व्यापक रूप से लोगों के सामने प्रस्तुत किया जाए।
टेंडर से अवॉर्ड तक तय होगी समय-सीमा
मुख्यमंत्री ने सड़क निर्माण की प्रशासनिक प्रक्रिया को भी लेकर सख्ती दिखाई। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि टेंडर जारी होने से लेकर कार्य आवंटन (अवॉर्ड) तक की पूरी प्रक्रिया के लिए स्पष्ट समय-सीमा तय की जाए।
उन्होंने कहा कि कई बार ठेकेदार बहुत कम दर यानी बिलो रेट पर टेंडर हासिल कर लेते हैं, जिसके कारण बाद में कार्य समय पर और गुणवत्तापूर्ण ढंग से पूरा नहीं हो पाता। ऐसी स्थिति में ठेकेदार की जवाबदेही तय की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि कोई ठेकेदार बिलो रेट पर टेंडर लेता है तो यह उसकी जिम्मेदारी होगी कि वह काम को तय गुणवत्ता और समय-सीमा में पूरा करे।
अन्य राज्यों की व्यवस्थाओं का अध्ययन कर नियम बनाने की बात
मुख्यमंत्री ने कहा कि निर्माण कार्यों की गुणवत्ता और समयबद्धता सुनिश्चित करने के लिए स्पष्ट नियमावली तैयार किए जाने की आवश्यकता है। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि अन्य राज्यों में लागू बेहतर व्यवस्थाओं का अध्ययन किया जाए और छत्तीसगढ़ में भी उपयुक्त प्रावधान लागू करने पर विचार किया जाए।
इसके साथ ही टेंडर और डीपीआर जैसे तकनीकी कार्यों के लिए अलग इकाई बनाने के प्रस्ताव पर भी गंभीरता से विचार करने को कहा गया।
बरसात में कट जाते हैं 300 गांव, सड़क-पुल निर्माण पर जोर
बैठक में उन गांवों की स्थिति पर भी चर्चा हुई जहां बारिश के मौसम में संपर्क पूरी तरह टूट जाता है। मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदेश में ऐसे लगभग 300 गांव चिन्हित किए गए हैं, जहां बरसात के दौरान लोगों का बाहरी दुनिया से संपर्क लगभग समाप्त हो जाता है।
उन्होंने कहा कि कई बार मरीजों को खाट में उठाकर ले जाने जैसी स्थितियां सामने आती हैं, जो गंभीर चिंता का विषय है। खाद्य विभाग से प्राप्त सूची के आधार पर इन गांवों को सड़कों और पुल-पुलियों के माध्यम से जोड़ने के कार्य को प्राथमिकता देने की बात कही गई।
लैलूंगा से तमनार मार्ग के निर्माण पर विशेष जोर
मुख्यमंत्री ने लैलूंगा–कुंजारा–तोलगेपहाड़–मिलूपारा–तमनार मार्ग के निर्माण की आवश्यकता पर भी विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र में बड़ी आबादी निवास करती है और सड़क निर्माण अत्यंत आवश्यक है।
उन्होंने बताया कि इस मार्ग के कुछ हिस्सों में वन स्वीकृति की आवश्यकता होगी, जबकि अन्य हिस्सों में निर्माण कार्य जल्द शुरू किया जा सकता है।
राष्ट्रीय राजमार्ग-43 समेत कई परियोजनाओं की समीक्षा
बैठक में मनेंद्रगढ़–सूरजपुर–अंबिकापुर–पत्थलगांव–कुनकुरी–जशपुर–झारखंड सीमा तक प्रस्तावित राष्ट्रीय राजमार्ग क्रमांक-43 की प्रगति की भी समीक्षा की गई। लगभग 353 किलोमीटर लंबाई वाली इस सड़क परियोजना की स्थिति पर विस्तार से चर्चा हुई।
बैठक में पत्थलगांव-कुनकुरी खंड में भू-अर्जन के मुआवजे के भुगतान की जानकारी भी साझा की गई। इसके अलावा
अंबिकापुर–सेमरसोत–रामानुजगंज–गढ़वा मार्ग
गीदम–दंतेवाड़ा मार्ग
चांपा–सक्ती–रायगढ़–ओडिशा सीमा मार्ग
रायपुर–दुर्ग मार्ग
चिल्फी क्षेत्र की सड़कें
सहित कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं की प्रगति पर चर्चा हुई।
बस्तर में 17 सड़कों और पुल-पुलियों के निर्माण पर चर्चा
बैठक में बस्तर क्षेत्र में पुल-पुलिया निर्माण सहित 17 सड़कों के निर्माण और उन्नयन के कार्यों पर भी विस्तार से चर्चा की गई। साथ ही राज्य द्रुतगामी सड़क संपर्क मार्ग की आगामी कार्ययोजना की विस्तृत रूपरेखा भी अधिकारियों द्वारा प्रस्तुत की गई।
सरकारी भवनों के डिजाइन बदलने की बात
समीक्षा बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने भवन निर्माण कार्यों की भी समीक्षा की। उन्होंने कहा कि प्रदेश में बनने वाले कई शासकीय भवन पुराने ढांचे और एक जैसे डिजाइन में दिखाई देते हैं।
उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि शासकीय भवनों का निर्माण आधुनिक डिजाइन और तकनीक के आधार पर किया जाए। भवनों का डिजाइन उनकी उपयोगिता के अनुरूप हो और भूमि के बेहतर उपयोग के लिए हॉरिजॉन्टल के बजाय वर्टिकल संरचना को बढ़ावा दिया जाए।
मुख्यमंत्री ने राजभवन में बन रहे गेस्ट हाउस को भी आधुनिक और गरिमामय स्वरूप में तैयार करने की बात कही।
सड़कों की गुणवत्ता से बनती है सरकार की छवि
मुख्यमंत्री ने कहा कि सड़कें सीधे आम लोगों के जीवन से जुड़ी होती हैं और लोग सबसे पहले सड़क की गुणवत्ता को ही देखते हैं। कई विकास कार्य लोगों को दिखाई नहीं देते, लेकिन सड़कें सीधे नजर आती हैं और सरकार की छवि भी काफी हद तक उसी से बनती है।
उन्होंने कहा कि लोक निर्माण विभाग प्रदेश के महत्वपूर्ण विभागों में से एक है और इसमें होने वाले कार्यों को गुणवत्ता और समयबद्धता के साथ पूरा किया जाना जरूरी है।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से यह भी कहा कि ऐसा तंत्र विकसित किया जाए जिससे सड़कों में बनने वाले गड्ढों की जानकारी समय पर मिल सके और उन्हें तुरंत ठीक किया जा सके।
बैठक में मुख्य सचिव विकास शील, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह, लोक निर्माण विभाग के सचिव डॉ. कमलप्रीत सिंह, मुख्यमंत्री के सचिव मुकेश बंसल, राहुल भगत तथा लोक निर्माण विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

