बिलासपुर के स्वामी आत्मानंद शासकीय अंग्रेजी माध्यम स्कूल धुरीपारा की छात्रा निकिता झलारिया ने अपनी नवाचारी सोच से राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाई है। निकिता को अहमदाबाद की संस्था ‘ज्ञान’ द्वारा आयोजित नवाचार प्रतियोगिता में एपीजे अब्दुल कलाम इग्नाइटेड माइंड अवॉर्ड से सम्मानित किया गया। उन्होंने स्कूटी के लिए ‘नाइट सेफ्टी स्कैनर’ का मॉडल प्रस्तुत किया था।
बिलासपुर।

प्रतिभा केवल बड़े शहरों तक सीमित नहीं होती, गांव-गांव में भी नवाचार की सोच रखने वाले बच्चे मौजूद हैं। जरूरत है तो सिर्फ उन्हें पहचानने और आगे बढ़ने का अवसर देने की। इसी बात को साबित करते हुए स्वामी आत्मानंद शासकीय अंग्रेजी माध्यम स्कूल धुरीपारा की छात्रा निकिता झलारिया ने राष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है।
अहमदाबाद की प्रतिष्ठित संस्था ‘ज्ञान’ द्वारा आयोजित डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम इग्नाइटेड माइंड अवॉर्ड के लिए देशभर में नवाचार प्रतियोगिता आयोजित की जाती है। इस प्रतियोगिता के जनक भारतीय प्रबंधन संस्थान (आईआईएम) के पूर्व प्रोफेसर और पद्मश्री से सम्मानित प्रो. अनिल गुप्ता हैं। उनका उद्देश्य देशभर के बच्चों और युवाओं में छिपी नवाचार क्षमता को सामने लाना है।
छत्तीसगढ़ में आविष्कार संचारक ने कराया आयोजन
छत्तीसगढ़ में इस प्रतियोगिता का संचालन ‘ज्ञान अहमदाबाद’ के आविष्कार संचारक अनुपम दे द्वारा किया गया। प्रदेश भर से आए नवाचारों में बिलासपुर की छात्रा निकिता झलारिया का मॉडल सर्वश्रेष्ठ चुना गया।
स्कूटी के लिए बनाया ‘नाइट सेफ्टी स्कैनर’
निकिता ने ‘नाइट सेफ्टी स्कैनर इन स्कूटी’ का नवाचार प्रस्तुत किया। यह ऐसा मॉडल है जो रात के समय वाहन चलाते समय संभावित खतरे या अवरोध को पहचानने में मदद कर सकता है। छात्रा की इस सोच और प्रस्तुति को निर्णायकों ने सराहा और उसे विजेता घोषित किया गया।
ट्रॉफी, प्रमाणपत्र और 5 हजार रुपए की राशि
अवॉर्ड मिलने पर निकिता को संस्था की ओर से ट्रॉफी, प्रमाणपत्र और 5 हजार रुपए की नकद राशि प्रदान की गई। इस सम्मान समारोह में मुख्य वक्ता के रूप में प्रो. अनिल गुप्ता मौजूद थे, जबकि कार्यक्रम के मुख्य अतिथि प्रख्यात वैज्ञानिक प्रो. माशेलकर रहे।
सरकारी स्कूल की छात्रा की उपलब्धि पर खुशी
सरकारी स्कूल की छात्रा के राष्ट्रीय स्तर पर चयन होने पर स्कूल और शिक्षा जगत में खुशी का माहौल है। व्याख्याता जय कौशिक ने इस उपलब्धि पर छात्रा निकिता झलारिया और आयोजन से जुड़े अनुपम दे को बधाई दी।
उन्होंने कहा कि आज के समय में बच्चों की प्रतिभा को मंच मिल रहा है। ऐसे अवसर मिलने से छात्रों में नवाचार की सोच विकसित होती है और आने वाले समय में कई बच्चे इससे प्रेरित होकर विज्ञान और तकनीक के क्षेत्र में आगे बढ़ेंगे।
उन्होंने यह भी कहा कि गांव-गांव में प्रतिभा छिपी हुई है, जरूरत है उसे खोजकर निखारने की। निकिता की सफलता इसी बात का उदाहरण है कि सही मार्गदर्शन और अवसर मिलने पर ग्रामीण और सरकारी स्कूलों के छात्र भी राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना सकते हैं।

