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होली पर पर्यावरण और गौ-संरक्षण की मिसाल: कंडों से होगा होलिका दहन, बिलासपुर में कपिला गौ सेवा संस्था की नई पहल

Mohammed Israil
Mohammed Israil  - Editor
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बिलासपुर। होली के पावन पर्व पर इस बार बिलासपुर में पर्यावरण संरक्षण और गौ-संरक्षण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से एक अनोखी पहल की शुरुआत हुई है। सामाजिक संस्था कपिला गौ सेवा संस्थान ने नगर निगम क्षेत्र के सभी वार्डों और ज़ोन में अपील की है कि होलिका दहन के दौरान लकड़ी के स्थान पर गोबर से निर्मित कंडों का उपयोग किया जाए। संस्था का मानना है कि यह कदम न केवल परंपरा के अनुरूप है, बल्कि पर्यावरण हित में भी अत्यंत महत्वपूर्ण साबित होगा।

संस्था की अध्यक्ष श्रीमती क्षमा सिंह ने बताया कि प्रत्येक वर्ष होलिका दहन में बड़ी मात्रा में लकड़ी जलाई जाती है, जिससे पेड़ों की कटाई बढ़ती है और पर्यावरण संतुलन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। यदि इसके स्थान पर गोबर से बने कंडों का उपयोग किया जाए तो इससे वृक्षों की रक्षा होगी, प्रदूषण में कमी आएगी और गौ-आधारित उत्पादों को बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने कहा कि “वृक्षों को बचाना ही हमारी पूंजी है” और आने वाली पीढ़ियों को स्वच्छ वातावरण देना समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। संस्था ने यह भी सुझाव दिया है कि मुक्तिधामों में अंत्येष्टि के दौरान लकड़ी के स्थान पर कंडों के उपयोग को प्रोत्साहित किया जाए। जानकारी के अनुसार, एक अंतिम संस्कार के लिए लगभग 365 कंडे पर्याप्त होते हैं, जिससे लकड़ी की खपत में उल्लेखनीय कमी लाई जा सकती है। संस्था का दावा है कि कंडों से निकलने वाला धुआं अपेक्षाकृत कम हानिकारक होता है और पर्यावरण संतुलन बनाए रखने में सहायक हो सकता है।

इस पहल को बिलासपुर नगर निगम की महापौर पूजा विधानी का भी समर्थन मिला है। महापौर ने इसे पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताते हुए नगर निगम के लगभग 70 वार्डों में कंडों के उपयोग के लिए नागरिकों को प्रेरित करने की बात कही है। उन्होंने शहरवासियों से अपील की कि वे इस मुहिम का हिस्सा बनें और पर्यावरण के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाएं।

श्रीमती क्षमा सिंह विभिन्न सामाजिक दायित्वों से भी जुड़ी हैं। वे WICCI छत्तीसगढ़ जेसल्स रिफॉर्म काउंसिल की स्टेट प्रेसिडेंट, रॉयल राजपूत संगठन की संभाग अध्यक्ष तथा विश्व हिंदू परिषद के व्यापार प्रकोष्ठ की प्रदेश मंत्री हैं। संस्था द्वारा जेल की गौशाला में कंडे एवं गौ-काष्ठ निर्माण की योजना भी बनाई गई है, जिसमें महिला बंदियों को रोजगार से जोड़कर उनके पुनर्वास और परिवारों की आर्थिक सहायता का प्रयास किया जाएगा।

संस्था पदाधिकारियों ने जानकारी दी कि नागपुर के कई श्मशान घाटों में पहले से ही गोबर के कंडों का उपयोग किया जा रहा है, जिससे लकड़ी की खपत में कमी आई है। बिलासपुर में भी इसी मॉडल को अपनाकर शहर को पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक उदाहरण बनाने का प्रयास किया जा रहा है। कार्यक्रम के दौरान डॉ. संगीता बनाफर, आर.एस. विन्दराज, प्रेमलता विन्दराज और अजिता पांडेय सहित अन्य उपस्थित रहे। सभी वक्ताओं ने इस पहल को सामाजिक जागरूकता का महत्वपूर्ण कदम बताते हुए अधिक से अधिक लोगों से इसमें सहभागिता की अपील की।

होली के उत्सव के बीच कपिला गौ सेवा संस्थान की यह पहल परंपरा और प्रकृति के संतुलन का संदेश दे रही है। यदि शहरवासी इस अभियान में सक्रिय भागीदारी निभाते हैं, तो यह न केवल पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक बड़ा कदम होगा, बल्कि गौ-संरक्षण और सामाजिक सहभागिता का भी सशक्त उदाहरण बनेगा।

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