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छत्तीसगढ़ में 24 घंटे में 5 बड़े सड़क हादसे: रायगढ़ से बालोद तक मातम, 11 की मौत, दर्जनों घायल

Mohammed Israil
Mohammed Israil  - Editor
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तेज रफ्तार, ओवरटेक और लापरवाही बनी वजह; पिकअप खाई में गिरी, दो बाइकों की भिड़ंत, स्कूल वैन नाले में, ट्रेलर की चपेट में मोपेड—प्रदेशभर में एक ही दिन में पांच अलग-अलग घटनाक्रम

बिलासपुर , रायपुर।

छत्तीसगढ़ में पिछले 24 घंटे के भीतर अलग-अलग जिलों में हुए पांच सड़क हादसों ने पूरे प्रदेश को झकझोर दिया। रायगढ़, सरगुजा, सूरजपुर, बालोद और बिलासपुर-कोरबा नेशनल हाईवे पर हुई घटनाओं में कुल 11 लोगों की मौत हुई है, जबकि कई लोग गंभीर रूप से घायल हैं। पुलिस ने सभी मामलों में मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी है।
1) रायगढ़: तेज रफ्तार पिकअप बेकाबू होकर खाई में गिरी, 4 की मौत, 18 घायल
25 फरवरी की रात रायगढ़ जिले में एक तेज रफ्तार पिकअप वाहन अनियंत्रित होकर खाई में जा गिरा। बताया गया कि वाहन में सवार लोग किसी कार्यक्रम से लौट रहे थे। मोड़ पर ड्राइवर ने नियंत्रण खो दिया और पिकअप सड़क किनारे गहरी खाई में पलट गई।
मौतें: 4
घायल: करीब 18
राहत-बचाव: स्थानीय ग्रामीणों ने सबसे पहले घायलों को बाहर निकाला, बाद में पुलिस और एंबुलेंस पहुंची।
स्थिति: घायलों को जिला अस्पताल और नजदीकी स्वास्थ्य केंद्रों में भर्ती कराया गया है।
2) सरगुजा NH-43: शांति पारा के पास दो बाइकों की आमने-सामने भिड़ंत, युवा भाजपा नेता सहित 2 की मौत
सरगुजा जिले में नेशनल हाईवे-43 पर शांति पारा के पास दो मोटरसाइकिलों की सीधी टक्कर हो गई। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि दोनों बाइक सवार सड़क पर दूर जा गिरे।
मौतें: 2 (जिसमें एक युवा भाजपा नेता शामिल)
घटना का कारण: प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार तेज रफ्तार और ओवरटेक की कोशिश।
कार्रवाई: पुलिस ने दोनों वाहनों को जब्त कर पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिए।
3) सूरजपुर: बाइक की टक्कर में 3 की जान गई, महिला टीचर भी शामिल
सूरजपुर जिले में दो बाइकों की टक्कर में 3 लोगों की मौत हो गई। मृतकों में दो युवक और एक महिला शिक्षिका शामिल हैं।
मौतें: 3
घटना का समय: सुबह का वक्त, जब यातायात सामान्य से अधिक था।
प्राथमिक जानकारी: तेज रफ्तार और गलत दिशा में वाहन चलाना हादसे की वजह बताई जा रही है।
जांच: पुलिस ने घटनास्थल का मुआयना कर प्रत्यक्षदर्शियों के बयान दर्ज किए हैं।
4) बालोद: स्कूल वैन नाले में गिरी, पहली की छात्रा की मौत, 13 बच्चे घायल
बालोद जिले में स्कूल वैन अचानक अनियंत्रित होकर सड़क किनारे नाले में जा गिरी। वैन में प्राथमिक कक्षा के बच्चे सवार थे।
मौत: कक्षा पहली की एक छात्रा
घायल: 13 बच्चे
राहत कार्य: स्थानीय लोगों ने शीशे तोड़कर बच्चों को बाहर निकाला।
इलाज: सभी घायलों को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया, कुछ को प्राथमिक उपचार के बाद छुट्टी।
5) बिलासपुर-कोरबा NH: ट्रेलर की चपेट में आई मोपेड, सवार महिला की मौत
बिलासपुर-कोरबा नेशनल हाईवे पर एक ट्रेलर ने आगे चल रही मोपेड को टक्कर मार दी। हादसे में मोपेड सवार महिला की मौके पर ही मौत हो गई।
मौत: 1
स्थिति: चालक ट्रेलर छोड़कर फरार बताया गया।
कार्रवाई: पुलिस ने ट्रेलर जब्त कर आरोपी चालक की तलाश शुरू की है।
एक नजर में आंकड़े
कुल घटनाएं: 5
कुल मौतें: 11
कुल घायल: 30 से अधिक
प्रमुख कारण: तेज रफ्तार, ओवरटेक, नियंत्रण खोना
प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में एक ही दिन में हुए इन हादसों ने सड़क सुरक्षा व्यवस्था पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। पुलिस सभी मामलों में जांच कर रही है और मृतकों के परिजनों को आवश्यक प्रक्रिया के बाद शव सौंप दिए गए हैं।

सड़क सुरक्षा पर गरमाया सदन: 1 साल में 6,898 मौतों पर मंत्री से तीखे सवाl
सोनी ने पूछा—दुर्घटनाएं कम करने क्या प्लान है? कश्यप बोले—रणनीति तैयार, 19 चौक प्राथमिकता में; 167 ब्लैक स्पॉट में 101 खत्म
भास्कर न्यूज | रायपुर
विधानसभा के बजट सत्र के दौरान सड़क सुरक्षा और सार्वजनिक परिवहन का मुद्दा जोरदार तरीके से उठा। सत्तापक्ष के विधायकों ने ही अपनी सरकार के परिवहन मंत्री को सवालों के घेरे में लिया। भाजपा विधायक सुनील सोनी और पूर्व मंत्री अजय चंद्राकर ने प्रदेश में बढ़ते सड़क हादसों और राजधानी रायपुर में यातायात व्यवस्था को लेकर विस्तार से प्रश्न किए। आंकड़ों के मुताबिक एक साल में प्रदेश में सड़क दुर्घटनाओं में 6,898 लोगों की मौत हुई है।
सोनी का सवाल: “रायपुर में दुर्घटनाएं कम करने ठोस मास्टर प्लान क्या?”
सुनील सोनी ने पूछा कि राजधानी रायपुर जैसे तेजी से बढ़ते शहर में सुगम और सुरक्षित यातायात के लिए क्या ठोस उपाय किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि देशभर में सड़क हादसे चिंता का विषय हैं, ऐसे में कम से कम छत्तीसगढ़ में मौतों को रोकने के लिए क्या स्पष्ट रणनीति है?
रायपुर में दुर्घटनाएं कम करने के लिए क्या मास्टर प्लान तैयार है?
भाटागांव अंडरब्रिज के सुधार की समय-सीमा क्या तय की गई है?
सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को मजबूत करने के लिए क्या कदम उठाए गए हैं?
मंत्री का जवाब: 19 प्रमुख चौक-चौराहे प्राथमिकता में, आईटीएमएस का विस्तार
परिवहन मंत्री केदार कश्यप ने सदन को बताया कि राजधानी रायपुर में सुगम यातायात के लिए रणनीति तैयार की गई है। इसके तहत शहर के 19 प्रमुख चौक-चौराहों को प्राथमिकता में लिया गया है, जिनमें भारतमाता चौक, फाफाडीह चौक और जयस्तंभ चौक शामिल हैं।
उन्होंने बताया—
14 स्थानों पर लेफ्ट टर्न फ्री किया गया है।
27 जंक्शनों पर ट्रैफिक कैमरे लगाए गए हैं।
ओवरस्पीड रोकने के लिए 3 स्थानों पर लिडार कैमरे स्थापित किए गए हैं।
इंटीग्रेटेड ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम (आईटीएमएस) का विस्तार किया जा रहा है।
ब्लैक स्पॉट पर कार्रवाई को लेकर तीखी बहस
पूर्व मंत्री अजय चंद्राकर ने सरकार की रणनीतियों को कागजी बताते हुए कहा कि विशेषज्ञों से अध्ययन कराए गए, लेकिन जमीनी हालात में अपेक्षित बदलाव नहीं दिख रहा। उन्होंने ब्लैक स्पॉट पर कार्रवाई की प्रगति पर सवाल उठाया।
मंत्री कश्यप ने जवाब में कहा कि प्रदेश में कुल 167 ब्लैक स्पॉट चिन्हित किए गए थे।
इनमें से 101 ब्लैक स्पॉट खत्म किए जा चुके हैं।
66 स्थानों पर कार्रवाई जारी है।
ड्राइविंग ट्रेनिंग और क्षमता निर्माण
मंत्री ने यह भी बताया कि राजधानी रायपुर स्थित ड्राइविंग ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट में अब तक 38,573 वाहन चालकों को प्रशिक्षण दिया जा चुका है। सड़क सुरक्षा के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रमों और जनजागरूकता अभियानों को भी बढ़ाया जा रहा है।
सार्वजनिक परिवहन पर भी उठे सवाल
सदन में सार्वजनिक परिवहन की स्थिति को लेकर भी चर्चा हुई। यात्रियों को पर्याप्त बस स्टैंड और मूलभूत सुविधाएं न मिलने का मुद्दा उठा। ग्रामीण और आउटर इलाकों से रायपुर आने-जाने वाले यात्रियों के किराए और सुविधा के अंतर का मुद्दा भी सामने आया।
एक नजर में आंकड़े
एक साल में सड़क हादसों में मौतें6,898प्रदेश में चिन्हित ब्लैक स्पॉट167खत्म किए गए ब्लैक स्पॉट101शेष ब्लैक स्पॉट66प्रशिक्षित वाहन चालक38,573प्राथमिकता वाले प्रमुख चौराहे19लेफ्ट टर्न फ्री स्थान14ट्रैफिक कैमरे लगे जंक्शन27लिडार कैमरे3

विधानसभा में सड़क सुरक्षा, यातायात प्रबंधन और सार्वजनिक परिवहन की व्यवस्था को लेकर हुई यह चर्चा आंकड़ों और रणनीतियों के इर्द-गिर्द केंद्रित रही। सरकार ने अपनी ओर से उठाए गए कदमों का ब्यौरा प्रस्तुत किया, जबकि विधायकों ने जमीनी असर और समयबद्ध क्रियान्वयन पर सवाल उठाए।

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