18 रुपए साइकिल भत्ता बनाम 6 हजार पेट्रोल भत्ता—देशभर में पुलिस परिवार का बड़ा सवाल, होलिका दहन से पहले मान्यता नहीं तो 2 मार्च को ‘काले कानून’ जलाने का ऐलान
अंग्रेजी काले कानूनों के खिलाफ देशव्यापी अल्टीमेटम
पुलिस विभाग एवं पुलिस परिवार कल्याण संघ ने राष्ट्रपति से पीएम तक सौंपा 8 राष्ट्रीय मांगों का ज्ञापन, 10 साल के संघर्ष को बताया ऐतिहासिक
बिलासपुर। पुलिस विभाग एवं पुलिस परिवार कल्याण संघ ने अंग्रेजी हुकूमत के समय के कथित हत्यारे और काले कानूनों को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर मोर्चा खोल दिया है। संगठन ने होलिका दहन से पहले विधिवत मान्यता देने और शेष काले कानूनों को समाप्त करने की मांग उठाते हुए 2 मार्च 2026 को देशभर में होलिका दहन के दौरान इन कानूनों की प्रतियां जलाने की घोषणा की है।


संगठन की ओर से जारी ज्ञापन श्रीमान राष्ट्रपति महोदया, प्रधानमंत्री, केंद्रीय गृहमंत्री, देशभर के राज्यपालों और मुख्यमंत्रियों को संबोधित किया गया है। इसकी प्रतिलिपि कलेक्टरों के माध्यम से डीजीपी, पुलिस कमिश्नर, राजस्व कमिश्नर, आईजी, एसपी, एसडीएम, तहसीलदार और थाना प्रभारियों तक भेजी गई है। ज्ञापन दिनांक 24 फरवरी 2026 का है।
18 रुपए साइकिल भत्ता बना आंदोलन का केंद्र
ज्ञापन में पुलिसकर्मियों को मिलने वाले 18 रुपए साइकिल भत्ता को वर्तमान हालात में अप्रासंगिक बताते हुए इसे समाप्त करने और उसकी जगह 6 हजार रुपए मासिक पेट्रोल भत्ता देने की मांग प्रमुखता से उठाई गई है। संगठन का कहना है कि इससे देश की आंतरिक सुरक्षा को मजबूती मिलेगी और पुलिसकर्मियों को सम्मानजनक कार्य सुविधा उपलब्ध होगी।
8 राष्ट्रीय मांगें, जिन पर टिका देशव्यापी आंदोलन
संगठन ने अपनी 8 प्रमुख राष्ट्रीय मांगों को विस्तार से सामने रखा है—
ब्रिटिश हुकूमत के समय के सभी काले और हत्यारे कानूनों को समाप्त कर नए कानून बनाए जाएं।
पुलिस विभाग की ड्यूटी 8 घंटे की जाए, न्यूनतम 50 हजार रुपए वेतन और साप्ताहिक अवकाश दिया जाए।
18 रुपए साइकिल भत्ता खत्म कर 6 हजार रुपए मासिक पेट्रोल भत्ता लागू किया जाए।
पुलिसकर्मियों को बेहतर आवास सुविधा दी जाए या 5 हजार रुपए मासिक आवासीय भत्ता दिया जाए।
राष्ट्रीय न्यायिक आयोग और राष्ट्रीय पुलिस आयोग का तत्काल गठन किया जाए।
न्यायालय, शासन और प्रशासन में जवाबदेही तय कर सभी कार्यों की समय-सीमा लागू की जाए।
लोकायुक्त पुलिस द्वारा रंगे हाथ पकड़े गए अपराधियों का 90 दिनों में चालान पेश हो और 10 साल की सजा का कानून बने। लोकायुक्त और ईओडब्ल्यू को स्वतंत्र चालान पेश करने का अधिकार दिया जाए।
पूरे भारत में शिक्षित युवक-युवतियों की 2 करोड़ से अधिक भर्तियां पुलिस, रेल, जेल और वन विभाग में की जाएं, जिसमें 50% युवक और 50% युवतियां हों।
163 साल पुराने कानूनों में बदलाव का दावा
संगठन का कहना है कि वह वर्ष 2017 से लगातार ब्रिटिश शासनकाल के कानूनों के खिलाफ जमीनी लड़ाई लड़ रहा है। संगठन के अनुसार, 163 साल पुराने इंडियन पैनल एक्ट 1860-61 और पुलिस एक्ट में बदलाव की प्रक्रिया 1 जुलाई 2024 से शुरू हुई, जिसे संगठन अपने 10 वर्षों के सतत संघर्ष का परिणाम मानता है।
ज्ञापन में न्यायपालिका में मामलों के निपटारे के लिए 3 वर्षों की समय-सीमा तय किए जाने का भी उल्लेख किया गया है।
10 हजार से अधिक ज्ञापन, 7 साल से होलिका दहन में विरोध
संगठन का दावा है कि पिछले 10 वर्षों में देशभर में 10 हजार से अधिक ज्ञापन सौंपे गए हैं। सैकड़ों धरना-प्रदर्शन और आंदोलन किए गए। पिछले 7 वर्षों से लगातार होलिका दहन के अवसर पर अंग्रेजी काले कानूनों की प्रतियां जलाकर विरोध दर्ज कराया जा रहा है, जिससे केंद्र सरकार का ध्यान इन कानूनों की ओर गया।
मान्यता नहीं मिली तो 2 मार्च को प्रदर्शन
ज्ञापन में कहा गया है कि यदि 2 मार्च 2026 से पहले अंग्रेजी हुकूमत के शेष काले और कथित घटिया कानूनों तथा पुलिस रेगुलेशन एक्ट को समाप्त नहीं किया गया और संगठन को विधिवत मान्यता नहीं दी गई, तो 2 मार्च 2026 को देशभर में होलिका दहन के दौरान इन कानूनों को जलाया जाएगा।
आवेदन पर संगठन के पदाधिकारियों के नाम और हस्ताक्षर हैं। प्रतिलिपि देश के सभी संबंधित प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों को भेजी गई है।

