Latest news

आंखें खोल लजिए स्वास्थ्य मंत्री जी….प्रसव पर ‘खर्चापानी’ ? डिलीवरी के बाद पैसों की मांग का VIDEO वायरल, बिलासपुर जिला अस्पताल फिर कठघरे में“

Mohammed Israil
Mohammed Israil  - Editor
4 Min Read

एक में लुहू, पांच उमन ज्यादा नहीं…” कथित बातचीत ने मचाया बवाल; पहले भी पैसे मांगने, फर्श पर डिलीवरी और प्राइवेट रेफरल के मामलों से घिर चुका है अस्पताल

00 दो स्टाफ नर्सो को निलंबित कर बड़ी जिम्मेदारी से बच रहे बड़े अधिकारी


बिलासपुर। छत्तीसगढ़ की न्यायधानी में सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं की साख पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। जिला अस्पताल बिलासपुर में डिलीवरी के बाद परिजनों से ‘खर्चापानी’ के नाम पर पैसे मांगे जाने का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।
वीडियो में एक महिला स्टाफ प्रसव के बाद परिजनों से रकम की मांग करती नजर आ रही है। वह कथित तौर पर कहती सुनाई दे रही है— “एक में लुहू, पांच उमन ज्यादा नहीं…”। इस कथन ने पूरे मामले को और गंभीर बना दिया है। परिजनों का आरोप है कि इसे ‘रिवाज’ बताकर पैसे लिए जाते हैं, जबकि सरकारी अस्पतालों में प्रसव और मातृ-शिशु सेवाएं पूरी तरह निःशुल्क घोषित हैं।
वीडियो सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया है। अधिकारियों ने जांच के आदेश दिए हैं और दोषी पाए जाने पर कार्रवाई का आश्वासन दिया है।


गरीबों पर भी ‘रिवाज’ का दबाव?
परिजनों का कहना है कि प्रसव के बाद ‘खुशी’ या ‘रिवाज’ के नाम पर भुगतान की अपेक्षा की जाती है। आरोप है कि आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को भी रकम देने के लिए प्रेरित किया जाता है।
सरकारी योजनाओं के तहत सुरक्षित प्रसव और नवजात देखभाल पूरी तरह निःशुल्क है। ऐसे में डिलीवरी के बाद पैसों की मांग के आरोपों ने व्यवस्था की पारदर्शिता और निगरानी तंत्र पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
पहले भी विवादों से घिरा रहा है जिला अस्पताल
यह पहला अवसर नहीं है जब जिला अस्पताल सुर्खियों में आया हो।
एक महिला चिकित्सक पर मरीज से पैसे मांगने का मामला सामने आया था, जिसमें कार्रवाई की गई थी।
एक मरीज को कथित रूप से प्राइवेट हॉस्पिटल ले जाने के मामले में भी व्यापक विरोध हुआ था।
फर्श पर डिलीवरी की तस्वीरें भी इसी अस्पताल से सामने आई थीं, जिसने प्रदेशभर में स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर बहस छेड़ दी थी।
हर बार जांच और कार्रवाई की बात हुई, लेकिन व्यवस्थाओं में स्थायी सुधार को लेकर सवाल बने रहे।
बदइंतजामी के आरोप, सिम्स रेफरल पर चर्चा
अस्पताल की व्यवस्थाओं को लेकर स्थानीय स्तर पर लंबे समय से शिकायतें उठती रही हैं।
कई मामलों में मरीजों को यहां से सीधे छत्तीसगढ़ आयुर्विज्ञान संस्थान (सिम्स) रेफर किए जाने की बात सामने आती है।
परिजनों का कहना है कि प्राथमिक उपचार के बाद जटिल मामलों में तुरंत रेफरल कर दिया जाता है।
प्रसूति वार्ड में भीड़, संसाधनों की कमी और समन्वय की समस्याओं की शिकायतें भी सामने आती रही हैं।
जिला अस्पताल शहर और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों के हजारों परिवारों के लिए पहली और सबसे सुलभ स्वास्थ्य सुविधा है। ऐसे में बार-बार सामने आ रहे मामलों ने भरोसे को झटका दिया है।
जांच के आदेश, जवाबदेही पर नजर
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने वायरल वीडियो की जांच के आदेश दिए हैं। संबंधित स्टाफ की भूमिका की पड़ताल की जा रही है। दोषी पाए जाने पर नियमानुसार कार्रवाई की बात कही गई है।
फिलहाल शहर में चर्चा इस बात की है कि क्या इस बार जांच निष्पक्ष और पारदर्शी होगी? क्या जिम्मेदारों पर ठोस कार्रवाई होगी?
डिलीवरी जैसे संवेदनशील और जीवन से जुड़े मामले में ‘खर्चापानी’ की मांग के आरोप ने स्वास्थ्य व्यवस्था को फिर बहस के केंद्र में ला दिया है। अब सबकी नजर जांच और उसके परिणाम पर टिकी है।

खबर को शेयर करने के लिए क्लिक करे।।