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बिलासपुर शहर के वार्ड 16 में वोटर लिस्ट पर बवाल, जनप्रतिनिधियों के नाम हटाने की साजिश?

Mohammed Israil
Mohammed Israil  - Editor
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मतदाता सूची से नाम गायब, बिलासपुर में सियासी संग्राम तेज
फॉर्म-7 बना विवाद की वजह, वार्ड 16 में गरमाई राजनीति
प्रशासन बोला- प्रक्रिया के तहत ही होती है कार्रवाई
बिलासपुर। शहर के वार्ड क्रमांक 16 विष्णु नगर कुड़ूदंड में मतदाता सूची को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। आरोप है कि पूर्व पार्षद, पार्षद प्रत्याशियों और उनके परिजनों के नाम सुनियोजित तरीके से मतदाता सूची से हटाने की कोशिश की गई है। मामला सामने आते ही वार्ड में सियासी तापमान बढ़ गया है और जनप्रतिनिधियों ने इसे लोकतांत्रिक अधिकारों पर हमला बताया है।
दरअसल, चुनाव आयोग द्वारा चलाए जा रहे विशेष पुनरीक्षण कार्यक्रम के तहत मतदाता सूची में नाम जोड़ने के लिए फॉर्म-6 और नाम हटाने के लिए फॉर्म-7 भरा जाता है। आरोप है कि किसी अज्ञात व्यक्ति द्वारा फॉर्म-7 भरकर वार्ड के कई प्रभावशाली और सक्रिय मतदाताओं के नाम हटाने का प्रयास किया गया।


इन नामों को हटाने की कोशिश का आरोप


सूत्रों के मुताबिक जिन नामों को हटाने की बात सामने आई है, उनमें हिमांशु कश्यप, रेहान रजा, भागीरथी यादव, राकेश चतुर्वेदी, रवि चतुर्वेदी, परमेश्वर यादव सहित अन्य लोगों के नाम शामिल बताए जा रहे हैं। खास बात यह है कि इनमें पूर्व पार्षद, पार्षद प्रत्याशी और उनके परिवार के सदस्य शामिल हैं।
“हार की खीझ में रची गई साजिश” : रेहान रजा
पूर्व पार्षद प्रत्याशी रेहान रजा ने आरोप लगाया कि यह पूरा मामला सुनियोजित साजिश है। उनका कहना है कि वार्ड 16, जिसे कभी भाजपा का गढ़ माना जाता था, वहां कांग्रेस की जीत के बाद कुछ लोग हार पचा नहीं पा रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि द्वेषपूर्ण मानसिकता से जुड़े लोगों द्वारा विशेष समुदाय और विपक्ष से जुड़े मतदाताओं के नाम कटवाने की कोशिश की जा रही है।
रेहान रजा ने कहा कि यह केवल नाम हटाने का मामला नहीं है, बल्कि मताधिकार छीनने का प्रयास है। यदि समय रहते यह मामला सामने नहीं आता तो कई लोग मतदान के अधिकार से वंचित हो सकते थे।
हिमांशु कश्यप ने जताई नाराजगी
हिमांशु कश्यप ने भी इस पूरे घटनाक्रम पर कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि बिना किसी सूचना के नाम हटाने की प्रक्रिया शुरू होना गंभीर मामला है। यह लोकतंत्र के मूल अधिकारों के साथ खिलवाड़ है। उन्होंने प्रशासन से पारदर्शी जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है।
प्रशासन की सफाई: “दस्तावेज हों तो नाम नहीं कटेगा”
इस मामले में जब एसडीएम मनीष साहू से बात की गई तो उन्होंने बताया कि शिकायत प्राप्त हुई है और मामले की जांच की जा रही है। उन्होंने कहा कि यदि किसी का नाम दस्तावेजों की कमी या तकनीकी कारणों से कटा है तो संबंधित व्यक्ति फॉर्म-6 भरकर आवश्यक प्रमाणों के साथ पुनः नाम जुड़वा सकता है।
वहीं कलेक्टर संजय अग्रवाल ने स्पष्ट किया कि तय प्रक्रिया के तहत ही किसी नाम को हटाया जाता है। उन्होंने कहा कि बिना सत्यापन के किसी पात्र मतदाता का नाम नहीं काटा जाता। यदि कोई पात्र है तो उसका नाम सुरक्षित रहेगा।
साजिश या तकनीकी त्रुटि?
अब सवाल यही है कि यह मामला तकनीकी चूक का है या सुनियोजित साजिश का? वार्ड 16 में इस विवाद ने राजनीतिक माहौल को गरमा दिया है। स्थानीय लोग प्रशासन से निष्पक्ष जांच और मताधिकार की सुरक्षा की मांग कर रहे हैं।
फिलहाल शिकायत के बाद प्रशासनिक जांच की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है, लेकिन वार्ड 16 में वोटर लिस्ट को लेकर उठे इस बवाल ने आने वाले समय में सियासी सरगर्मी और बढ़ने के संकेत दे दिए हैं।

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