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अब सिम्स में प्राइवेट अस्पताल जैसी सुविधा: बायोकेमेस्ट्री विभाग में दो अत्याधुनिक मशीनें स्थापित, रिपोर्ट पूरी तरह कंप्यूटरीकृत और QR कोड से उपलब्ध

Mohammed Israil
Mohammed Israil  - Editor
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बिलासपुर। छत्तीसगढ़ आयुर्विज्ञान संस्थान (सिम्स) ने मरीजों को बेहतर, तेज और भरोसेमंद जांच सुविधा देने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। बढ़ती मरीज संख्या और रक्त परीक्षण की बढ़ती मांग को देखते हुए सिम्स के बायोकेमेस्ट्री विभाग को अत्याधुनिक मशीनों से सुसज्जित किया गया है। अब यहां जांच रिपोर्ट पूरी तरह कंप्यूटरीकृत होगी और प्राइवेट अस्पतालों की तर्ज पर समयबद्ध तरीके से उपलब्ध कराई जाएगी।


जिला कलेक्टर के प्रयास से कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR) मद के तहत करीब 60 लाख रुपये की लागत से दो आधुनिक मशीनें स्थापित की गई हैं—
फुल ऑटोमैटिक बायोकेमेस्ट्री एनालाईजर
हाई परफॉर्मेंस लिक्विड क्रोमैटोग्राफी (HPLC) एनालाईजर
पहले जहां रिपोर्ट मैन्युअल प्रक्रिया के बाद कंप्यूटर में दर्ज की जाती थी, वहीं अब पूरी जांच प्रणाली स्वचालित और डिजिटल हो गई है। इससे रिपोर्ट की सटीकता और गति दोनों में उल्लेखनीय सुधार होगा।
मरीजों की बढ़ती संख्या के अनुरूप बड़ा कदम
सिम्स में प्रतिदिन मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। औसतन:
2000 ओपीडी मरीज
800 आईपीडी मरीज
इलाज के लिए पहुंचते हैं। ऐसे में बायोकेमेस्ट्री विभाग पर जांच का दबाव भी बढ़ा है।
विभागाध्यक्ष डॉ. मनीष साहू ने बताया कि प्रतिदिन लगभग 400 मरीजों के रक्त सैंपल जांच के लिए आते हैं, जिनसे करीब 3500 विभिन्न प्रकार की जांचें की जाती हैं। उन्होंने कहा कि समय पर सटीक रिपोर्ट उपलब्ध कराना विभाग की प्राथमिक जिम्मेदारी है, ताकि मरीजों को शीघ्र और उचित उपचार मिल सके।
उल्लेखनीय है कि विगत वर्ष सिम्स का बायोकेमेस्ट्री विभाग पूरे संभाग में सबसे अधिक टेस्ट करने का रिकॉर्ड भी बना चुका है।
अब रिपोर्ट में QR कोड और बारकोड की सुविधा
नई व्यवस्था के तहत रक्त परीक्षण रिपोर्ट में QR कोड और बारकोड की सुविधा भी जोड़ी गई है। इससे मरीजों और उनके परिजनों को रिपोर्ट संभालकर रखने की जरूरत नहीं होगी। वे कभी भी, कहीं भी अपने मोबाइल फोन से रिपोर्ट स्कैन कर देख सकेंगे।
यह सुविधा न केवल पारदर्शिता बढ़ाएगी, बल्कि डिजिटल हेल्थ रिकॉर्ड की दिशा में भी अहम कदम है।
सिकल सेल जांच में बड़ी राहत
बायोकेमेस्ट्री विभाग में सिकल सेल से संबंधित जांच भी नियमित रूप से की जा रही है।
प्रतिदिन लगभग 100 सिकल सेल टेस्ट किए जाते हैं।
पहले संख्यात्मक जांच के लिए अत्याधुनिक मशीन उपलब्ध नहीं होने से मरीजों को निजी पैथोलॉजी लैब का सहारा लेना पड़ता था।
अब नई HPLC मशीन के जरिए प्रतिदिन 40 से अधिक सिकल सेल मरीजों की जांच सिम्स में ही की जा रही है।
इससे मरीजों का समय और पैसा दोनों बचेंगे, साथ ही सरकारी अस्पताल में ही सटीक जांच सुविधा उपलब्ध हो रही है।
प्रबंधन ने क्या कहा
सिम्स अधिष्ठाता डॉ. रमणेश मूर्ति ने कहा कि संस्थान का उद्देश्य मरीजों को बेहतर, सुलभ और आधुनिक स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराना है। अत्याधुनिक मशीनों की स्थापना से जांच की गुणवत्ता और गति दोनों में सुधार होगा, जिससे उपचार प्रक्रिया और अधिक प्रभावी बनेगी। यह कदम सिम्स को आधुनिक चिकित्सा सेवाओं की दिशा में और मजबूत बनाता है।
चिकित्सा अधीक्षक डॉ. लखन सिंह ने कहा कि अन्य संस्थानों की तर्ज पर सिम्स में भी मरीजों को अत्याधुनिक जांच मशीनों के माध्यम से सही समय पर रिपोर्ट उपलब्ध कराना पहली प्राथमिकता है। जांच प्रक्रिया को सरल, तेज और पूर्णतः कंप्यूटरीकृत बनाकर मरीजों को बेहतर सुविधा देना ही हमारा मुख्य उद्देश्य है।
संभाग का सबसे व्यस्त बायोकेमेस्ट्री विभाग
बढ़ती ओपीडी-आईपीडी संख्या, प्रतिदिन सैकड़ों सैंपल और हजारों टेस्ट—इन आंकड़ों के बीच सिम्स का बायोकेमेस्ट्री विभाग अब तकनीकी रूप से और अधिक सक्षम हो गया है।
CSR मद से स्थापित इन मशीनों के जरिए अब सिम्स न केवल सरकारी बल्कि निजी अस्पतालों की सुविधा को भी चुनौती देने की स्थिति में आ गया है।

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