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रतनपुर तहसील में ‘राजस्व साजिश’ का बड़ा आरोपमृत व्यक्ति को निःसंतान बताकर रिकॉर्ड से उड़ाया नाम, तहसीलदार–पटवारी–लिपिक खिलाफ कलेक्टर से हुई शिकायत

Mohammed Israil
Mohammed Israil  - Editor
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बिलासपुर/रतनपुर।
रतनपुर तहसील कार्यालय से जुड़ा एक सनसनीखेज मामला सामने आया है, जिसमें राजस्व अभिलेखों से नाम विलोपित कर करोड़ों की भूमि हड़पने का आरोप लगाया गया है। तहसीलदार रतनपुर शिल्पा भगत, हल्का पटवारी दिलीप कुमार परस्तें (हल्का पटवारी क्रमांक-12) और तहसीलदार न्यायालय की लिपिक उषा कंवर पर धोखाधड़ी, कूटरचना और आपसी सांठ-गांठ कर स्वर्गीय मोतीचंद जायसवाल का नाम राजस्व रिकॉर्ड से हटवाने की गंभीर शिकायत की गई है। इस संबंध में राममुरारी जायसवाल ने जिलाध्यक्ष/जिला प्रशासन को विस्तृत लिखित शिकायत सौंपते हुए उच्च स्तरीय जांच और तत्काल कार्रवाई की मांग की है।


कई खसरों की भूमि, संयुक्त स्वामित्व का स्पष्ट रिकॉर्ड
शिकायत के अनुसार ग्राम-रतनपुर, हल्का नंबर-12, तहसील-रतनपुर, जिला-बिलासपुर में स्थित भूमि खसरा नंबर 3604/3 (रकबा 0.0110 हे.), 3604/25 (रकबा 0.0230 हे.), 3604/23 (रकबा 0.0580 हे.) और 3604/24 (रकबा 0.1170 हे.) पूर्व में राजस्व अभिलेखों में संयुक्त रूप से दर्ज थी। इन भू-खंडों में आधा हिस्सा स्वर्गीय मोतीचंद जायसवाल पिता कपिलनाथ जायसवाल, निवासी बड़ी बाजार रतनपुर का तथा शेष आधा हिस्सा विकल जायसवाल, विवेक जायसवाल एवं विनीत जायसवाल (तीनों पिता शिवदुलारे जायसवाल, निवासी रतनपुर) का दर्ज था।
मृत्यु के बाद नामांतरण खेल, वारिस होते हुए भी ‘निःसंतान’ दिखाया
स्वर्गीय मोतीचंद जायसवाल का निधन 28 अगस्त 2025 को हो गया। आरोप है कि इसके बाद विकल, विवेक एवं विनीत जायसवाल ने पटवारी दिलीप कुमार परस्तें, तहसीलदार शिल्पा भगत और लिपिक उषा कंवर से मिलीभगत कर मोतीचंद जायसवाल के हिस्से की भूमि को अपनी बताकर नामांतरण करा लिया। गंभीर आरोप यह भी है कि 17 दिसंबर 2025 को हल्का पटवारी द्वारा फर्जी पंचनामा/प्रतिवेदन तैयार कर यह दर्शाया गया कि स्वर्गीय मोतीचंद जायसवाल के कोई विधिक वारिस नहीं हैं और वे निःसंतान फौत हुए हैं, जबकि वास्तविकता इससे विपरीत बताई जा रही है।
न्यायालय का फैसला और हाईकोर्ट में लंबित अपील के बावजूद कार्रवाई
शिकायत में उल्लेख है कि उक्त भूमि से संबंधित विवाद पर जिला न्यायाधीश बिलासपुर (पीठासीन न्यायाधीश श्री एन.डी. तिगाला) के न्यायालय में व्यवहार वाद क्रमांक CS-11-B/2000 में 31 जनवरी 2018 को निर्णय पारित हो चुका है। इस निर्णय में पूर्व खसरा नंबरों के आधार पर आधे-आधे हिस्से के अधिकार स्पष्ट किए गए थे। इस फैसले के विरुद्ध विकल, विवेक एवं विनीत जायसवाल द्वारा माननीय छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय, बिलासपुर में FA No-128/2021 के तहत अपील प्रस्तुत की गई, जो अभी लंबित है। आरोप है कि इन सभी तथ्यों की जानकारी होते हुए भी राजस्व अमले ने नामांतरण की प्रक्रिया आगे बढ़ाई।
पंजीकृत वसीयतनामा होने के बाद भी नामांतरण आवेदन निरस्त
शिकायतकर्ता के अनुसार स्वर्गीय मोतीचंद जायसवाल ने अपने जीवनकाल में ही 27 दिसंबर 2023 को अपनी संपूर्ण चल-अचल संपत्तियों का पंजीकृत वसीयतनामा किया था। यह वसीयत सरोज जायसवाल (पति स्व. रामसेवक जायसवाल), रामसजीवन जायसवाल (पिता स्व. दशरथ लाल जायसवाल) – दोनों निवासी साधीपारा रतनपुर – तथा राममुरारी जायसवाल (पिता स्व. दशरथ लाल जायसवाल), निवासी ग्राम-पाली, तहसील-पाली, जिला-कोरबा के पक्ष में की गई थी।
इस वसीयत के आधार पर 16 दिसंबर 2025 को तहसीलदार रतनपुर के न्यायालय में तीन अलग-अलग नामांतरण आवेदन प्रस्तुत किए गए, जिनके क्रमांक 202512072300028/31-06/2025-26, 202512072300029/31-06/2025-26 और 202512072300030/31-06/2025-26 दर्ज हुए। आरोप है कि इनमें से एक प्रकरण में जानबूझकर ईश्तहार जारी नहीं किया गया और 8 जनवरी 2026 को उसे निरस्त कर दिया गया।
एक ही भूमि पर ऑफलाइन-ऑनलाइन दो प्रकरण, सवालों के घेरे में प्रक्रिया
शिकायत में यह भी बताया गया है कि इसी भूमि के संबंध में एक ओर ऑफलाइन प्रकरण चलाया गया, वहीं दूसरी ओर ऑनलाइन प्रकरण RD-202526401016000010 भी दर्ज किया गया। इसके अलावा जिन दो प्रकरणों में ईश्तहार जारी किया गया, उनमें सुनवाई की तारीख 7 जनवरी 2026 नियत की गई, लेकिन आदेश 6 जनवरी 2026 को ही पारित कर दिए गए। यह पूरी प्रक्रिया शिकायतकर्ता के अनुसार पूर्वनियोजित और पक्षपातपूर्ण रही।
अन्य लंबित मामलों को प्रभावित करने की आशंका, स्थानांतरण की मांग
राममुरारी जायसवाल ने शिकायत में यह भी उल्लेख किया है कि तहसीलदार रतनपुर शिल्पा भगत के न्यायालय में उनके और अन्य वसीयतधारियों के कई नामांतरण प्रकरण लंबित हैं। ऐसे में आशंका जताई गई है कि इन मामलों को भी प्रभावित किया जा सकता है। इसी आधार पर तहसीलदार शिल्पा भगत, हल्का पटवारी दिलीप कुमार परस्तें और लिपिक उषा कंवर को रतनपुर से तत्काल स्थानांतरित कर निष्पक्ष उच्च स्तरीय जांच कराए जाने की मांग की गई है।

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