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बिलासपुर में जनसमस्याओं को लेकर SUCI (C) का विशाल प्रदर्शन, देवकीनंदन चौक से नेहरू चौक तक गूंजी मजदूर-गरीबों की आवाज

Mohammed Israil
Mohammed Israil  - Editor
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बिलासपुर। सोशलिस्ट यूनिटी सेंटर ऑफ इंडिया (कम्यूनिस्ट) SUCI (C) पार्टी जिला बिलासपुर के तत्वावधान में आज बिलासपुर शहर की ज्वलंत जनसमस्याओं के खिलाफ जिला स्तरीय विशाल प्रदर्शन, रैली एवं एक दिवसीय धरना आयोजित किया गया। यह रैली देवकीनंदन चौक से प्रारंभ होकर नेहरू चौक तक निकाली गई, जिसमें पार्टी के राज्य सांगठनिक सचिव विश्वजीत हरोडे, जिला सदस्य त्रिलोचन साहू, सूरज साहू सहित 55 से अधिक नागरिक शामिल रहे। रैली के दौरान शहर की मूलभूत समस्याओं, मजदूरों की बदहाल स्थिति, शिक्षा-स्वास्थ्य, आवास, बिजली और परिवहन से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाया गया।
प्रदर्शन को संबोधित करते हुए SUCI (C) पार्टी के राज्य सचिव विश्वजीत हरोडे ने कहा कि बिलासपुर एक शहर होने के बावजूद यहां आम जनता की हालत बेहद खराब है। रोजगार की कमी के चलते शहर के लोग काम की तलाश में बाहर प्रवासी बनने को मजबूर हैं। मजदूरों को शहर के भीतर ही 10 से 20 किलोमीटर प्रतिदिन दूरी तय करनी पड़ती है, जिसमें ऑटो किराए पर ही उनकी मजदूरी का आधा हिस्सा खर्च हो जाता है। उन्होंने कहा कि सरकार की जिम्मेदारी है कि शहर के प्रत्येक क्षेत्र में सिटी बस जैसी सुलभ परिवहन सुविधा उपलब्ध कराई जाए। इसके बावजूद मजदूरों से 12-12 घंटे काम लिया जा रहा है और उन्हें निश्चित मजदूरी भी नहीं मिल पा रही है, जिससे आम जनता का जीवन लगातार दुर्दशा की ओर बढ़ रहा है।
उन्होंने मनरेगा का मुद्दा उठाते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ में बेहद कम मजदूरी पर काम कराया जा रहा है और वह भी पूरे वर्ष रोजगार उपलब्ध नहीं होता। एक ओर सरकार को अधिक से अधिक सरकारी अस्पताल, स्कूल और कॉलेज खोलने चाहिए, वहीं दूसरी ओर राज्य सरकार 10,477 सरकारी स्कूलों को बंद कर रही है। उन्होंने कहा कि कभी शिक्षा को समाज बदलने का धारदार हथियार माना जाता था, लेकिन आज उसी शिक्षा को बर्बाद किया जा रहा है। राज्य में लगातार शराब भट्टियां खोली जा रही हैं, जिससे समाज में नशाखोरी बढ़ रही है और बलात्कार, हत्या जैसे अपराधों में इजाफा हो रहा है। साथ ही धर्मांधता, अंधविश्वास, सांप्रदायिकता, रूढ़िवाद और जातिवाद को बढ़ावा मिल रहा है, जिससे गरीब जनता की समस्याएं कम होने के बजाय और बढ़ती जा रही हैं।
पार्टी जिला सदस्य त्रिलोचन साहू ने कहा कि बिलासपुर में स्मार्ट सिटी और सौंदर्यकरण के नाम पर गरीब बस्तियों को उजाड़ा जा रहा है। इससे महिला, पुरुष और बच्चों के जीवन का आधार ही खत्म हो रहा है। उन्होंने कहा कि घर तोड़ने से पहले प्रभावित लोगों को आवास और मुआवजा दिया जाना चाहिए था, लेकिन इसके उलट लोगों से आवास के नाम पर 80 हजार से लेकर 1 लाख रुपये तक वसूले जा रहे हैं। आवासों में पानी और बिजली जैसी बुनियादी सुविधाएं भी उपलब्ध नहीं हैं। बिजली के निजीकरण की योजना के तहत स्मार्ट मीटर लगाए जा रहे हैं, जिससे बिजली बिल कई गुना बढ़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि समाज की वर्तमान स्थिति और समय की मांग को देखते हुए धर्मांधता, अंधविश्वास, सांप्रदायिकता और जातिवादी सोच से ऊपर उठकर एकजुट होने की जरूरत है, तभी जनसमस्याओं के खिलाफ संघर्ष संभव है।
त्रिलोचन साहू ने इंद्रपुरी मोहल्ले का मुद्दा उठाते हुए कहा कि वहां किसी भी मकान को तोड़ने से पहले लोगों को आवास की सुविधा दी जानी चाहिए। यदि आवास उपलब्ध नहीं कराया जाता है तो प्रत्येक परिवार को पास में जमीन और 5 लाख रुपये का मुआवजा दिया जाए, ताकि वे अपना घर बना सकें।
विशाल रैली के पश्चात प्रतिनिधिमंडल ने बिलासपुर जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा। कलेक्टर ने आश्वासन दिया कि इंद्रपुरी के नजदीक कुछ जमीनों का अवलोकन किया गया है, जहां लोगों को आवास प्रदान किया जाएगा। उन्होंने कहा कि आवास निर्माण में समय लगेगा, इसलिए इस विषय में रेलवे अधिकारियों (डीआरएम कार्यालय) से चर्चा कर समय देने का आग्रह किया जाएगा।
प्रमुख मांगें
बिजली का निजीकरण बंद किया जाए और स्मार्ट मीटर लगाने की प्रक्रिया रोकी जाए, हाफ बिजली बिल योजना पुनः लागू की जाए।
नगर निगम द्वारा सभी मोहल्लों में नालियों की नियमित सफाई और पर्याप्त मात्रा में साफ पानी की व्यवस्था की जाए।
स्मार्ट सिटी और सौंदर्यकरण के नाम पर गरीब बस्तियों को उजाड़ना बंद किया जाए।
शहर के प्रत्येक क्षेत्र में सिटी बस सेवा शुरू की जाए।
वीबीजी रामजी के नाम पर मनरेगा कानून को निरस्त करने की नीति वापस ली जाए।
इंद्रपुरी मोहल्ले के किसी भी मकान को तोड़ने से पहले सभी को जमीन और मुआवजा प्रदान किया जाए।

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