
बिलासपुर।
“मनरेगा बचाओ संग्राम” को प्रभावी और व्यापक रूप देने के लिए प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने संगठनात्मक स्तर पर बड़ा कदम उठाया है। प्रदेश कांग्रेस द्वारा आयोजित उच्चस्तरीय बैठक में लिए गए अहम निर्णयों के तहत प्रदेश स्तरीय समन्वय समिति के सदस्यों को अलग-अलग जिलों की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इसी क्रम में जिला कांग्रेस कमेटी ग्रामीण के पूर्व अध्यक्ष एवं प्रदेश समन्वय समिति के सदस्य विजय केशरवानी को बड़ी जिम्मेदारी देते हुए आठ संगठनात्मक जिलों का प्रभारी नियुक्त किया गया है।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज, नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत, पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, पूर्व उपमुख्यमंत्री टी.एस. सिंहदेव, मंत्री ताम्रध्वज साहू एवं पूर्व मंत्री तथा समन्वय समिति के संयोजक उमेश पटेल सहित 9 सदस्यीय समिति द्वारा लिए गए निर्णय के अनुसार यह नियुक्ति की गई। विजय केशरवानी को जिन जिलों का प्रभारी बनाया गया है, उनमें बिलासपुर (शहर), बिलासपुर (ग्रामीण), मुंगेली, जांजगीर-चांपा, गौरेला-पेंड्रा-मरवाही, सक्ती, कोरबा (शहर) एवं कोरबा (ग्रामीण) शामिल हैं।
विजय केशरवानी ने जानकारी दी कि “मनरेगा बचाओ संग्राम” के तहत प्रदेशभर में चरणबद्ध आंदोलनात्मक कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इसके अंतर्गत 30 जनवरी को राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की पुण्यतिथि के अवसर पर पूरे प्रदेश के सभी ब्लॉकों में मनरेगा को लेकर धरना दिया जाएगा। साथ ही धान खरीदी की समय-सीमा और लिमिट बढ़ाने की मांग को लेकर सांकेतिक चक्का जाम किया जाएगा।
इसके बाद 31 जनवरी से 6 फरवरी के बीच सभी जिलों में कलेक्टर कार्यालय के सामने जिला स्तरीय धरना-प्रदर्शन आयोजित किया जाएगा। इस दौरान मनरेगा को उसके मूल स्वरूप में बहाल करने तथा वीबी-ग्राम-जी (VB-GRAM-G) विधेयक को वापस लेने की मांग प्रमुखता से उठाई जाएगी। वहीं 7 फरवरी के बाद राज्य स्तरीय विधानसभा घेराव का कार्यक्रम प्रस्तावित है, जिसमें केंद्र सरकार की जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ने की नीति और राज्यों पर डाले जा रहे वित्तीय बोझ को उजागर किया जाएगा।
विजय केशरवानी ने कहा कि मनरेगा कांग्रेस पार्टी की एक महत्वाकांक्षी योजना रही है, जिसका उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों को उनके घर के पास सुनिश्चित रोजगार उपलब्ध कराना था। योजना के तहत 100 दिन के रोजगार की गारंटी थी और इसकी लगभग पूरी राशि केंद्र सरकार द्वारा दी जाती थी। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने ऐसे नियम बना दिए हैं, जिससे यह योजना धीरे-धीरे कमजोर होती जा रही है।
उन्होंने बताया कि वर्तमान में केंद्र और राज्य सरकारों के बीच 60:40 के अनुपात में राशि देने का प्रावधान कर दिया गया है, जिसके तहत जब तक राज्य सरकार 40 प्रतिशत राशि नहीं देती, तब तक केंद्र सरकार अपनी हिस्सेदारी जारी नहीं करती। इसके अलावा काम के लिए क्षेत्रों का सीमित चिन्हांकन, बड़े कार्यों को एजेंसियों को सौंपने का प्रावधान और एकमुश्त राशि देने जैसी व्यवस्थाएं लागू की गई हैं, जिससे 125 दिनों तक रोजगार देना संभव नहीं रह गया है। जबकि पहले राशि की ऐसी कोई बाध्यता नहीं थी और 100 दिन तक अनिवार्य रूप से रोजगार देना होता था।
विजय केशरवानी ने कहा कि भाजपा और आरएसएस को राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के नाम से परेशानी है, इसी कारण मनरेगा का नाम बदलकर व्हीबीजी राम जी रखा गया है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी सरकार की गरीब विरोधी मंशा को कभी सफल नहीं होने देगी। कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी द्वारा इसे राष्ट्रीय स्तर पर आंदोलन का रूप देने का निर्णय लिया गया है, उसी क्रम में प्रदेश और जिला स्तर पर यह धरना-प्रदर्शन और आंदोलन किए जा रहे हैं।



