


बिलासपुर। अपने आवास और सम्मान की रक्षा के लिए गरीब परिवारों का धरना बिलासपुर में लगातार जारी है। ठंड का मौसम बीत चुका है और अब चिलचिलाती गर्मी ने दस्तक दे दी है, लेकिन इसके बावजूद महिलाएं, बुजुर्ग और छोटे बच्चे बीते करीब दो महीनों से खुले आसमान के नीचे डटे हुए हैं। अब तक प्रशासन या शासन स्तर पर कोई ठोस पहल सामने नहीं आने से धरनारत परिवारों में गहरा आक्रोश और निराशा देखी जा रही है।
धरने पर बैठे परिवारों का कहना है कि मौसम की मार वे सह लेंगे, लेकिन अपने वर्षों पुराने घर और रोजी-रोटी से किसी भी कीमत पर समझौता नहीं करेंगे। उनका आरोप है कि बड़े उद्योगपतियों और प्रभावशाली लोगों को जमीन उपलब्ध कराने में किसी तरह की अड़चन नहीं आती, जबकि गरीबों की समस्याओं को नजरअंदाज कर दिया जाता है।
धरना स्थल पर वरिष्ठ कांग्रेसी नेता एवं पूर्व उपसरपंच ब्रह्मदेव सिंह और राकेश सिंह पहुंचे, जहां उन्होंने पीड़ित परिवारों से मुलाकात कर उनकी व्यथा सुनी। दोनों नेताओं ने आंदोलन को नैतिक समर्थन देते हुए कहा कि गरीबों के साथ हो रहे अन्याय को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और उनकी लड़ाई को पूरी मजबूती के साथ आगे बढ़ाया जाएगा। ब्रह्मदेव सिंह ने कहा कि विकास के नाम पर गरीबों को उजाड़ना न्यायसंगत नहीं है और सरकार को कमजोर वर्ग की आवाज सुनते हुए उनके अधिकारों की रक्षा करनी चाहिए। उन्होंने प्रशासन से इस पूरे मामले में शीघ्र हस्तक्षेप कर न्यायपूर्ण समाधान निकालने की बात कही।
धरने पर बैठी महिलाओं ने साफ शब्दों में कहा कि वे किसी वैकल्पिक व्यवस्था या नई सुविधा की मांग नहीं कर रही हैं। उनकी एकमात्र मांग उसी स्थान पर रहने का अधिकार है, जहां उनकी दो–तीन पीढ़ियां पली-बढ़ी हैं। उनका कहना है कि बच्चों की पढ़ाई, रोजगार के साधन और पूरा सामाजिक जीवन इसी क्षेत्र से जुड़ा हुआ है, जिसे छोड़ना उनके लिए असंभव है।
वार्ड पार्षद दिलीप पाटिल ने बताया कि यह धरना 60 दिनों से अधिक समय से चल रहा है और जरूरत पड़ी तो यह 100 या 200 दिन तक भी जारी रह सकता है। उन्होंने कहा कि चुनाव के समय गरीबों से वोट मांगे जाते हैं, लेकिन अब उनकी पीड़ा सुनने वाला कोई नजर नहीं आ रहा है।
समाजसेवकों के अनुसार यह आंदोलन अब केवल जमीन या मकान तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह गरीबों के सम्मान, सुरक्षा और भविष्य से जुड़ा सवाल बन चुका है। धरनारत महिलाओं ने दो टूक कहा कि चाहे कड़ाके की ठंड हो या झुलसाने वाली धूप, वे अपने आवास के अधिकार की मांग को लेकर हर परिस्थिति में इसी स्थान पर डटी रहेंगी।


