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बिलासपुर में महामारी से निपटने की बड़ी तैयारी, IDSP के तहत जिला स्तरीय प्रशिक्षण कार्यशाला आयोजित

Mohammed Israil
Mohammed Israil  - Editor
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बिलासपुर। जिले में भविष्य की महामारियों और संक्रामक रोगों से निपटने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने तैयारी तेज कर दी है। एकीकृत रोग निगरानी कार्यक्रम (IDSP) के तहत बिलासपुर में जिला स्तरीय प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन किया गया, जिसमें जिले के सभी ब्लॉकों से आए चिकित्सा अधिकारी और तकनीकी स्टाफ शामिल हुए। कार्यशाला का फोकस रोगों की समय पर पहचान, सटीक निगरानी और त्वरित प्रतिक्रिया प्रणाली को मजबूत करना रहा।
कार्यक्रम की शुरुआत जिले में वर्तमान महामारी सर्विलेंस की स्थिति की समीक्षा से हुई। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. शोभा गड़ेवाल और डिस्ट्रिक्ट सर्विलेंस ऑफिसर डॉ. रक्षित जोगी ने जिले की स्वास्थ्य तैयारियों का जायजा लिया। उन्होंने बताया कि बदलते मौसम और बढ़ती आवाजाही के कारण संक्रामक रोगों की आशंका बनी रहती है, ऐसे में हर स्तर पर सतर्कता बेहद जरूरी है। समीक्षा के दौरान सर्विलेंस रिपोर्टिंग, फील्ड से मिलने वाली सूचनाओं और उनकी समयबद्ध समीक्षा पर भी चर्चा हुई।
प्रशिक्षण में जिले के सभी ब्लॉकों के मेडिकल ऑफिसर (MO), आर.एम.ए. (RMA), लैब टेक्नीशियन, ब्लॉक डेटा मैनेजर और डेटा एंट्री ऑपरेटर प्रमुख रूप से मौजूद रहे। सभी प्रतिभागियों को महामारी की शुरुआती पहचान और रिपोर्टिंग प्रक्रिया को लेकर तकनीकी जानकारी दी गई।
डिस्ट्रिक्ट एपिडेमियोलॉजिस्ट डॉ. पंकज सिंह ने महामारी नियंत्रण से जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं पर विस्तृत प्रशिक्षण दिया। उन्होंने बताया कि किसी भी बीमारी के शुरुआती लक्षणों की पहचान जितनी जल्दी होती है, उसे फैलने से रोकना उतना ही आसान हो जाता है। उन्होंने वैज्ञानिक पद्धति से इन्वेस्टिगेशन, केस ट्रैकिंग, सैंपल कलेक्शन और कंट्रोल मेजर्स पर विस्तार से जानकारी साझा की। प्रशिक्षण के दौरान विभिन्न संभावित रोग परिदृश्यों को उदाहरण के तौर पर समझाया गया।
डिजिटल डेटा प्रबंधन पर विशेष सत्र में जिला डेटा मैनेजर श्याम मोहन दुबे ने ऑनलाइन रिपोर्टिंग सिस्टम की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि रोगों की ऑनलाइन एंट्री और समय पर रिपोर्टिंग से ही जिले की वास्तविक स्वास्थ्य स्थिति सामने आती है। उन्होंने डेटा की सटीकता, त्वरित अपलोड और तकनीकी सुधारों पर भी चर्चा की, ताकि किसी भी संभावित प्रकोप की जानकारी तुरंत उच्च स्तर तक पहुंच सके।
कार्यशाला में डिस्ट्रिक्ट डेटा असिस्टेंट सौरभ शर्मा भी उपस्थित रहे। विशेषज्ञों ने कहा कि फील्ड में कार्यरत लैब टेक्नीशियन, डेटा एंट्री ऑपरेटर और ब्लॉक स्तर के मैनेजर स्वास्थ्य तंत्र की पहली कड़ी हैं। उनकी सतर्कता और सक्रियता ही जिले को किसी भी स्वास्थ्य संकट से सुरक्षित रखने में अहम भूमिका निभाती है।
कार्यशाला के दौरान यह भी सामने आया कि IDSP के तहत तैयार की जा रही यह टीम किसी भी रोग प्रकोप की स्थिति में त्वरित प्रतिक्रिया देने के लिए पूरी तरह प्रशिक्षित की जा रही है, ताकि समय रहते स्थिति को नियंत्रित किया जा सके और आमजन की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।

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