
बिलासपुर।
छत्तीसगढ़ की चिकित्सा शिक्षा को नई दिशा देने की तैयारी में पंडित दीनदयाल उपाध्याय स्मृति स्वास्थ्य विज्ञान एवं आयुष विश्वविद्यालय ने शैक्षणिक सत्र 2025 के लिए अध्ययन मंडल (Board of Studies) का गठन किया है। इस बार विश्वविद्यालय के अध्ययन मंडल के पाँचों समूहों में छत्तीसगढ़ आयुर्विज्ञान संस्थान (CIMS), बिलासपुर के वरिष्ठ और अनुभवी डॉक्टरों को प्रमुख जिम्मेदारी दी गई है, जिससे सिम्स की शैक्षणिक और क्लिनिकल विशेषज्ञता को निर्णायक स्थान मिला है।
विश्वविद्यालय द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार अध्ययन मंडल को प्री-क्लिनिकल, पैराक्लिनिकल और क्लिनिकल विषयों से जुड़े पाँच समूहों में विभाजित किया गया है। सभी समूहों में सिम्स के प्रोफेसर और हॉस्पिटल आधारित डॉक्टर सदस्य एवं नामित विशेषज्ञ के रूप में शामिल किए गए हैं। इन समूहों के माध्यम से पाठ्यक्रम, परीक्षा व्यवस्था, शोध गतिविधियों और अकादमिक मानकों से जुड़े विषयों पर विचार किया जाएगा।
सिम्स के अधिष्ठाता डॉ. रमणेश मूर्ति ने कहा कि अध्ययन मंडल के पाँचों समूहों में सिम्स के डॉक्टरों को शामिल किया जाना संस्थान की शैक्षणिक गुणवत्ता, शोध क्षमता और क्लिनिकल अनुभव का प्रमाण है। उनके अनुसार यह प्रदेश की चिकित्सा शिक्षा को और सशक्त बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
चिकित्सा अधीक्षक डॉ. लखन सिंह ने बताया कि हॉस्पिटल में कार्यरत अनुभवी चिकित्सकों की अध्ययन मंडल में भागीदारी से अकादमिक गतिविधियों और क्लिनिकल कार्य के बीच समन्वय मजबूत होगा। इससे चिकित्सा विद्यार्थियों के प्रशिक्षण के साथ-साथ मरीजों को मिलने वाली सेवाओं में भी सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।
विश्वविद्यालय स्तर पर गठित यह अध्ययन मंडल शैक्षणिक सत्र 2025 के दौरान चिकित्सा शिक्षा से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर कार्य करेगा, जिसमें सिम्स के डॉक्टरों की सक्रिय भागीदारी रहेगी।



