

बिलासपुर।
छत्तीसगढ़ आयुर्विज्ञान संस्थान (सिम्स), बिलासपुर में वैक्सीन-रोधक्षम रोगों (VPDs) और टीकाकरण के बाद प्रतिकूल घटनाओं (AEFI) की निगरानी प्रणाली को और मजबूत करने के उद्देश्य से सामुदायिक चिकित्सा विभाग द्वारा विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के सहयोग से एकदिवसीय विशेष प्रशिक्षण कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यक्रम की शुरुआत सरस्वती वंदना और दीप प्रज्वलन के साथ हुई।
कार्यक्रम में सिम्स के अधिष्ठाता डॉ. रमणेश मूर्ति, चिकित्सा अधीक्षक डॉ. लखन सिंह, एनेस्थीसिया विभागाध्यक्ष डॉ. मधुमिता मूर्ति, सामुदायिक चिकित्सा विभागाध्यक्ष डॉ. हेमलता ठाकुर, डॉ. संगीता रमन जोगी, डॉ. भूपेंद्र कश्यप, डॉ. अमित ठाकुर, डॉ. वर्षा तिवारी सहित सैकड़ा से अधिक वरिष्ठ संकाय एवं स्वास्थ्यकर्मी मौजूद रहे।
WHO व विशेषज्ञों की टेक्निकल प्रेजेंटेशन
कार्यशाला में डॉ. विवेक शर्मा, डॉ. श्रुति अग्रवाल, डॉ. अभिषेक कलवानी और WHO से आए डॉ. विनय कौशिक ने विस्तृत तकनीकी प्रस्तुतियाँ दीं।
मीज़ल्स-रूबेला नियंत्रण, निगरानी प्रोटोकॉल, वैक्सीन-रोधक्षम रोगों की त्वरित पहचान और फिल्ड सर्विलांस को सुदृढ़ करने पर विशेषज्ञों ने नए मानक और आधुनिक प्रथाएँ साझा कीं।
स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं को प्रभावी रिपोर्टिंग, केस-इन्वेस्टिगेशन, सैम्पल कलेक्शन प्रोटोकॉल, त्वरित फील्ड रिस्पॉन्स और टीकाकरण कार्यक्रम के साथ निगरानी प्रणाली के समन्वय पर विशेष प्रशिक्षण दिया गया।
ग्रुप एक्टिविटी, केस-स्टडी और हैंड्स-ऑन ट्रेनिंग
कार्यशाला में समूह चर्चा, केस-स्टडी आधारित अभ्यास, एवं हैंड्स-ऑन तकनीकी प्रशिक्षण आयोजित किया गया, जिसमें स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं, चिकित्सा अधिकारियों, सर्वेक्षण एवं आँकड़ा संकलन टीमों और सार्वजनिक स्वास्थ्य पेशेवरों ने सक्रिय भागीदारी की।
अधिष्ठाता डॉ. रमणेश मूर्ति ने कहा—
“सिम्स की माइक्रोबायोलॉजी विभाग के अंतर्गत संचालित वायरोलॉजी लैब में मीज़ल्स-रूबेला, कोविड, इन्फ्लूएंजा सहित अनेक वायरल रोगों की जांच उपलब्ध है। समय पर रिपोर्टिंग और मजबूत निगरानी व्यवस्था टीकाकरण कार्यक्रम की रीढ़ है। ऐसे प्रशिक्षण स्वास्थ्य सुरक्षा को और सशक्त करते हैं।”
चिकित्सा अधीक्षक डॉ. लखन सिंह बोले—
“सार्वजनिक स्वास्थ्य की निगरानी को तकनीकी रूप से मजबूत करना वैक्सीन-रोधक्षम बीमारियों के नियंत्रण का सबसे प्रभावी तरीका है। सिम्स इस दिशा में लगातार काम कर रहा है।”
विभागाध्यक्ष (सामुदायिक चिकित्सा) डॉ. हेमलता ठाकुर ने कहा—
“टीकाकरण प्रणाली की निगरानी को सुदृढ़ करना समय की मांग है।基层 स्तर पर सटीक रिपोर्टिंग, समयबद्ध फॉलोअप और फील्ड रिस्पॉन्स क्षमता विकसित किए बिना व्यापक स्वास्थ्य सुरक्षा संभव नहीं है। यह प्रशिक्षण हमारी जमीनी निगरानी प्रणाली को और सक्षम बनाएगा।”
कार्यक्रम के अंत में डॉ. समीर पैकरा ने सभी विशेषज्ञों, WHO प्रतिनिधियों, संकाय सदस्यों, PG छात्रों और उपस्थित प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया।



