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रेलवे बोर्ड का बड़ा एक्शन: गतौरा–लालखदान मेमू–मालगाड़ी हादसे ने हिलाया सिस्टम, बिलासपुर डीआरएम खोइवाल सहित शीर्ष अफसर हटाए गए

Mohammed Israil
Mohammed Israil  - Editor
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– एक ही दिन में दो बड़े तबादलों से जोन में हड़कंप | CRS की प्रारंभिक रिपोर्ट ने खोली लापरवाही की परतें | सिस्टम की जड़ों में समाई बदहाली भी उजागर
नई दिल्ली/बिलासपुर, 11 दिसंबर 2025।
गतौरा-लालखदान रेलखंड पर 4 नवंबर को हुए दर्दनाक मेमू–मालगाड़ी टक्कर हादसे ने सिर्फ 13 जिंदगियां ही नहीं छीनीं, बल्कि रेलवे सिस्टम की वर्षों पुरानी लापरवाहियों, गड़बड़ियों और प्रशासनिक सुस्ती को पूरी तरह सामने ला दिया। हादसे की गंभीरता इतनी गहरी थी कि रेलवे बोर्ड ने सीआरएस की प्रारंभिक रिपोर्ट मिलते ही शीर्ष स्तर पर कड़ा एक्शन लेते हुए बिलासपुर डीआरएम राजमल खोइवाल को पद से हटाकर उनका तत्काल तबादला कर दिया।
उनकी जगह पश्चिम रेलवे (मुंबई) के उमेश कुमार को बिलासपुर का नया डीआरएम नियुक्त किया गया है।
यही नहीं — पीसीईई (प्रधान मुख्य विद्युत अभियंता) राजीव कुमार बर्नवाल को भी हटाकर ईस्ट सेंट्रल रेलवे के आर.के. चौधरी को बिलासपुर जोन की जिम्मेदारी दी गई है।
रेलवे बोर्ड के दो बड़े आदेशों ने दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे (SECR) जोन में हड़कंप मचा दिया है।
हादसा जिसने देश को झकझोर दिया – इंजन मालगाड़ी के ऊपर चढ़ गया था
4 नवंबर की दोपहर गेवरारोड–बिलासपुर मेमू ने खड़ी मालगाड़ी को इतनी जोरदार टक्कर मारी कि
मेमू का इंजन सीधे मालगाड़ी के ऊपर चढ़ गया
13 लोगों की मौत
लोको पायलट विद्यासागर सहित
20 यात्री घायल
ये सिर्फ एक दुर्घटना नहीं थी, बल्कि रेलवे ऑपरेशन सिस्टम के भीतर छिपी खामियों का कड़वा आइना था।
CRS की प्रारंभिक रिपोर्ट—गंभीर त्रुटियाँ, खतरनाक चूकें, और प्रशासनिक लापरवाही की पूरी फाइल खुली
मुख्य सुरक्षा आयुक्त (CRS) बी.के. मिश्रा ने चार सदस्यीय टीम के साथ:
91 से अधिक कर्मचारियों–अधिकारियों के बयान दर्ज किए
दस्तावेज जब्त किए: रिकॉर्डिंग स्पीडोमीटर
स्टेशन मास्टर दावरी के रिकॉर्ड
सिग्नल–इंटरलॉकिंग से जुड़े कागजात
घटनास्थल का现场 निरीक्षण किया
रिपोर्ट में दो बिंदु सबसे चौंकाने वाले रहे—
1. मनोवैज्ञानिक परीक्षण में फेल लोको पायलट को मेमू की कमान दे दी गई
रिपोर्ट के अनुसार, जिस लोको पायलट को मेमू चलाने की अनुमति दी गई, वह मनोवैज्ञानिक परीक्षण में असफल पाया गया था।
इसके बावजूद उसे ट्रेन संचालन सौंपा गया — यह चूक किसी एक अधिकारी की नहीं बल्कि कई स्तरों की थी।
2. रेलवे सिस्टम “लचर और उपेक्षित” बताया गया
CRS रिपोर्ट के सीधे शब्द—
“सिस्टम खुद हादसे की वजह बना है।”
बोर्ड की कार्रवाई – पहले ऑपरेशनल इंजीनियर मसूद आलम हटे, अब डीआरएम–पीसीईई दोनों बदले
हादसे के तुरंत बाद रेलवे बोर्ड ने:
वरिष्ठ विद्युत अभियंता (ऑपरेशनल) मसूद आलम को पहले फोर्स लीव पर भेजा, फिर हटा दिया।
अब दो और टॉप पदों पर सीधे कार्रवाई — डीआरएम राजमल खोइवाल — हटाए गए
पीसीईई राजीव बर्नवाल — हटाए गए
उमेश कुमार (प.रे.) को नया डीआरएम
आर.के. चौधरी (ई.सें.रे.) को नया पीसीईई
बोर्ड ने SECR और WR दोनों से परिवर्तन की प्रभावी तिथि की तुरंत सूचना देने को कहा है
रेलवे सिस्टम की कड़वी तस्वीर — “वर्किंग सेटअप बिखरा, उपकरण खराब, सुविधाएँ खस्ताहाल”
हादसे ने जिस गहराई से सिस्टम की खराबियों को उजागर किया, वे चौंकाती हैं:
1. वाकी-टाकी पूरे साल से खराब
ट्रेन ऑपरेशन का सबसे बुनियादी उपकरण — महीनों से निष्क्रिय।
2. कर्मचारियों–अधिकारियों की संख्या सेटअप से बहुत कम
ड्यूटी शिफ्टें ओवरलोड, थकावट बढ़ी, सुरक्षा प्रक्रियाएँ कमजोर।
3. रनिंग रूम बदहाल
आराम की व्यवस्था नहीं
भोजन असमान
साफ-सफाई बेहद खराब
4. नए कर्मचारी–अधिकारी आ रहे, पर भर्ती “ना के बराबर”
यह खालीपन सुरक्षा को सबसे ज्यादा प्रभावित करता है।
स्टेशन मास्टर, ऑपरेशनल स्टाफ, टेक्निकल टीम — सभी की जिम्मेदारियाँ जांच के दायरे में
रिकॉर्डिंग स्पीडोमीटर की खराबी
सिग्नल और इंटरलॉकिंग सिस्टम की स्थिति
ट्रेन को खड़ी मालगाड़ी के आगे क्यों भेजा गया
कंट्रोल रूम से जारी निर्देश
स्टेशन मास्टर दावरी के बयान
रनिंग स्टाफ के आराम और हेल्थ रिकॉर्ड
CRS रिपोर्ट इन हर स्तर की खामियों को दर्ज करती है।
जोन के भीतर दबाव — कई और अफसरों पर कार्रवाई की आशंका
बोर्ड की तेजी को देखते हुए माना जा रहा है कि:
सुरक्षा
संचालन
सिग्नल
लोको
इंजीनियरिंग
इन सभी शाखाओं में कई और बड़े अधिकारी शिफ्ट किए जा सकते हैं
जोन के भीतर डर और हड़कंप साफ दिखाई दे रहा है।
हादसे ने राष्ट्रीय स्तर पर एक प्रश्न खड़ा किया — रेलवे बोर्ड का संदेश साफ
एक ही दिन में इतने बड़े स्तर पर एक्शन,
वरिष्ठ अधिकारियों को हटाना,
और लचर सिस्टम की पहचान पर कड़ी प्रतिक्रिया —
रेलवे बोर्ड ने यह स्पष्ट कर दिया है कि यह मामला सिर्फ एक दुर्घटना नहीं बल्कि रेल संचालन की बुनियादी विफलताओं की गंभीर चेतावनी है।
देश की सबसे महत्वपूर्ण परिवहन व्यवस्था में जब एक मनोवैज्ञानिक परीक्षण में असफल चालक,
खराब वाकी-टाकी,
अधूरी तकनीकी व्यवस्था,
और थकान से चूर रनिंग स्टाफ ट्रेनें चला रहे हों —
तो हादसे होना सिर्फ वक्त की बात रह जाती है।
मेमू–मालगाड़ी दुर्घटना ने उसी सच को उजागर कर दिया — और इस बार रेलवे बोर्ड ने तत्काल और दिखने वाला एक्शन लिया है।

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