

बिलासपुर, रायपुर।
अटल बिहारी वाजपेई विश्वविद्यालय, बिलासपुर के दीक्षांत समारोह में स्थानीय विधायक की उपेक्षा ने राजनीतिक गलियारों से लेकर शैक्षणिक हलकों तक तीखी प्रतिक्रिया पैदा कर दी है। कार्यक्रम में न तो जनप्रतिनिधि के लिए सम्मानजनक बैठने की व्यवस्था की गई और न ही कुलपति के स्वागत भाषण में उनका उल्लेख — जिससे पूरे प्रकरण पर विश्वविद्यालय प्रशासन के रवैये को लेकर सवालों की बौछार शुरू हो गई है।

विश्वविद्यालय, बिलासपुर में आयोजित दीक्षांत समारोह के दौरान एक अप्रत्याशित स्थिति सामने आई, जिसने स्थानीय राजनीतिक हलचल को तेज कर दिया है। बेलतरा विधानसभा क्षेत्र से होने के बावजूद स्थानीय विधायक को न तो कार्यक्रम में उचित स्थान मिला और न ही औपचारिक स्वागत किया गया।
पूर्व जिला कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष एवं बेलतरा विधानसभा के विधायक प्रत्याशी विजय केशरवानी ने इस घटना को “जनप्रतिनिधि का अपमान” बताते हुए कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उनके अनुसार, विश्वविद्यालय प्रशासन की यह प्राथमिक जिम्मेदारी होती है कि क्षेत्र के निर्वाचित जनप्रतिनिधि को सम्मानजनक स्थान दिया जाए, लेकिन इस कार्यक्रम में न बैठने की व्यवस्था सुनिश्चित की गई और न ही कुलपति द्वारा स्वागत भाषण में विधायक का नाम लिया गया।
केशरवानी ने कहा कि विश्वविद्यालय बेलतरा विधानसभा क्षेत्र में होने के बावजूद वहां के जनप्रतिनिधि की उपेक्षा होना गंभीर विषय है। उन्होंने इसे “समझ से परे” बताते हुए कहा कि ऐसे व्यवहार से यह संकेत मिलते हैं कि विश्वविद्यालय प्रशासन जवाबदेही के दायरे से बाहर होता जा रहा है।
उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि जब विश्वविद्यालय प्रशासन स्थानीय विधायक का सम्मान नहीं कर रहा, तो छात्रों के हितों की रक्षा कैसे सुनिश्चित करेगा — यही बात अब स्थानीय लोगों और राजनीतिक वर्ग में चर्चा का विषय बनी हुई है।
पूरा मामला अब जनप्रतिनिधियों, शिक्षाविदों और क्षेत्रीय राजनीतिक संगठनों के बीच बहस का केंद्र बन गया है।



