शिशु स्वास्थ्य और चाइल्ड प्रोटेक्शन पर राष्ट्रीय स्तर का प्रभावी कार्यक्रम
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ आयुर्विज्ञान संस्थान (सिम्स) बिलासपुर ने चिकित्सा सेवा और सामाजिक दायित्व का अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत करते हुए बुधवार को दो महत्त्वपूर्ण आयोजनों की मेजबानी की—राष्ट्रीय नवजात शिशु सप्ताह 2025 के तहत जागरूकता कार्यक्रम और बाल शोषण एवं बाल संरक्षण पर विशेष संगोष्ठी। दोनों कार्यक्रमों ने स्वास्थ्य जागरूकता और बच्चों की सुरक्षा को लेकर मजबूत संदेश दिया।
“Newborn Safety – Every Touch, Every Time, Every Baby” थीम पर आयोजित नवजात शिशु सप्ताह में शिशु रोग विभाग ने माताओं और परिजनों को नवजात देखभाल, संक्रमण से बचाव, स्तनपान, तापमान संतुलन, स्वच्छता और सुरक्षित प्रसव पश्चात देखभाल जैसे महत्वपूर्ण पहलुओं पर विस्तार से जानकारी दी। अस्पताल परिसर में परामर्श सत्रों के साथ प्रायोगिक प्रदर्शन भी आयोजित हुए, जहाँ विशेषज्ञों ने नवजात सुरक्षा के हर पहलू को सरल भाषा में समझाया।
इसी क्रम में बाल शोषण एवं बाल संरक्षण जागरूकता कार्यक्रम ने बच्चों के मानसिक, शारीरिक और भावनात्मक सुरक्षा के मुद्दों पर गहन चर्चा का मंच उपलब्ध कराया। बाल शोषण के प्रकारों, रोकथाम, पहचान और कानूनी अधिकारों पर प्रतिभागियों को प्रशिक्षित किया गया। चाइल्डलाइन 1098 पर तत्काल शिकायत दर्ज करने जैसी महत्वपूर्ण जानकारी भी साझा की गई।
कार्यक्रम में डॉ. पूनम अग्रवाल, डॉ. अस्मित, डॉ. केसली, छात्र-छात्राओं तथा अस्पताल स्टाफ की सक्रिय भागीदारी रही।
सिम्स नेतृत्व की प्रतिबद्धता
सिम्स अधिष्ठाता डॉ. रमणेश मूर्ति ने संस्थान की सामाजिक जिम्मेदारी को रेखांकित करते हुए कहा कि प्रत्येक बच्चे को सुरक्षित वातावरण देना संस्थान का सदैव प्राथमिक लक्ष्य रहा है।
चिकित्सा अधीक्षक डॉ. लखन सिंह ने बताया कि नवजात सुरक्षा और बाल संरक्षण दोनों विषय सिम्स के लिए सेवा भावना और संवेदनशीलता का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।
शिशु रोग विभागाध्यक्ष डॉ. राकेश नहरेल ने नवजातों के प्रति हर क्षण सावधानी रखने की आवश्यकता पर जोर दिया।
सिम्स बिलासपुर द्वारा आयोजित इन दोनों कार्यक्रमों ने शिशु स्वास्थ्य, जन-जागरूकता और बाल संरक्षण के क्षेत्र में एक मजबूत, मानवीय और संवेदनशील संदेश दिया।



