बिलासपुर, 18 नवंबर 2025
छत्तीसगढ़ के सबसे बड़े सरकारी मेडिकल संस्थानों में शामिल सिम्स (छत्तीसगढ़ इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज) ने स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता को राष्ट्रीय स्तर के मानकों पर लाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। सिम्स के Department of Diagnostic Sciences ने 17 से 19 नवंबर तक NABL (National Accreditation Board for Testing and Calibration Laboratories) के तीन-दिवसीय उच्चस्तरीय प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन किया, जिसमें देश के प्रतिष्ठित NABL विशेषज्ञों ने हिस्सा लिया।
देश के शीर्ष विशेषज्ञों की मौजूदगी — सिम्स में क्वालिटी स्टैंडर्ड्स को लेकर मंथन
कार्यक्रम का शुभारंभ सिम्स के अधिष्ठाता डॉ. मूर्ति ने किया। कार्यशाला में माइक्रोबायोलॉजी, पैथोलॉजी, बायोकैमिस्ट्री, रेडियोलॉजी और अन्य डायग्नोस्टिक विभागों के प्रमुख चिकित्सक, शिक्षण स्टाफ, वैज्ञानिक, PG छात्र और मेडिकल लैब टेक्नीशियन उपस्थित रहे।
कार्यक्रम की मुख्य वक्ता थीं —
डॉ. अंजली पंचानदिकर, Certified International, National Lead & Technical Assessor (ISO 15189)
डॉ. सागर दानी, Senior Consultant (NABH), Director – Hospixcellence Pvt Ltd, पुणे
NABL क्यों महत्वपूर्ण? — लैब रिपोर्ट की गुणवत्ता सीधे मरीजों की जिंदगी से जुड़ी
NABL भारत सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के अंतर्गत कार्यरत वह निकाय है जो देशभर की परीक्षण एवं जांच प्रयोगशालाओं को गुणवत्ता मानकों (जैसे ISO/IEC 17025, ISO 15189) के आधार पर मान्यता प्रदान करता है।
इस मान्यता का मतलब है—
अधिक सटीक लैब रिपोर्ट
जांच प्रक्रिया में मानकीकरण
त्रुटि की संभावना में भारी कमी
मेडिकल सिस्टम में पारदर्शिता और जवाबदेही
सिम्स का कहना है कि NABL मान्यता से उसकी सभी परीक्षण प्रयोगशालाएँ राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के गुणवत्ता मानकों का पालन सुनिश्चित कर सकेंगी।
70 से अधिक डॉक्टर–साइंटिस्ट–PG छात्र ट्रेनिंग में शामिल
इस प्रशिक्षण के बारे में सिम्स अधिष्ठाता डॉ. मूर्ति ने बताया कि संस्थान के लगभग 70 मेडिकल शिक्षक, वैज्ञानिक, PG छात्र और लैब तकनीशियन NABL प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं।
उनके अनुसार—
“यह प्रशिक्षण आम जनता के लिए अत्यंत लाभकारी होगा। इससे हमारे मरीजों को सटीक जांच रिपोर्ट और गुणवत्तापूर्ण उपचार मिलेगा।” — डॉ. मूर्ति
सिम्स बिलासपुर का ‘क्वालिटी मिशन’ — प्रदेश की मेडिकल जांच सेवाओं को नए स्तर पर ले जाने की तैयारी
सिम्स प्रशासन का कहना है कि NABL प्रशिक्षण के बाद सभी प्रयोगशालाएँ चरणबद्ध तरीके से मानकों के अनुरूप ढाली जाएँगी, जिससे—
मरीजों के इलाज में त्रुटियाँ कम होंगी
गंभीर मामलों में सही समय पर सही निर्णय लिए जा सकेंगे
संस्थान की विश्वसनीयता और सेवाओं का स्तर राष्ट्रीय स्तर के बराबर पहुंचेगा
हेल्थ सेक्टर में सिम्स की यह पहल पूरे प्रदेश की डायग्नोस्टिक व्यवस्था को नई दिशा देने में अहम साबित हो सकती है।



