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छत्तीसगढ़ में अवैध धान की बाढ़, 19 हजार क्विंटल जब्त… पर बिलासपुर ‘साइलेंट ज़ोन’, कार्रवाई नदारद

Mohammed Israil
Mohammed Israil  - Editor
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मोहम्मद इसराइल बबलू
राज्यभर में अवैध धान की आवाजाही पर कसे शिकंजे के बीच 19 हजार क्विंटल से ज्यादा धान पकड़ा जा चुका है, मगर इसी अभियान में बिलासपुर की चुप्पी अब सवालों के केंद्र में है। जब सीमावर्ती जिलों में टीमें रात-दिन कार्रवाई में लगी हैं, बिलासपुर में मार्केट जिला सहकारी बैंक, खाद्य विभाग और संबंधित एजेंसियों की सुस्ती ने पूरे अभियान की धार कुंद कर रखी है।

छत्तीसगढ़ में समर्थन मूल्य पर खरीदी से पहले अवैध रूप से लाया जा रहा धान रिकॉर्ड संख्या में पकड़ा जा रहा है। मार्कफेड द्वारा जारी 1 से 16 नवंबर तक के आंकड़ों ने सिस्टम पर सीधा दबाव बढ़ा दिया है। इस अवधि में राज्यभर से 19,320 क्विंटल धान जब्त किया गया, जिसमें महासमुंद, बलरामपुर, सूरजपुर और रायगढ़ जैसे सीमावर्ती जिलों में कार्रवाई की रफ्तार सबसे तेज रही। इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर की रियल-टाइम मॉनिटरिंग और अलर्ट-रिस्पॉन्स मैकेनिज़्म के चलते कई बड़े खेप रोके गए।
कोंडागांव में 600 बैग धान पकड़े जाने से लेकर रात्री गश्त में मिले 222 कट्टों तक, सीमावर्ती इलाके लगातार अलर्ट मोड में दिखे। टास्कफोर्स, चेकपोस्ट और जिला प्रशासन की संयुक्त निगरानी ने अवैध धान कारोबारियों की आवाजाही पर दबाव बनाया।
लेकिन इस व्यापक अभियान के बीच राज्य का दूसरा प्रमुख जिला बिलासपुर एक अलग कहानी बयान करता दिखा। जहां बाकी जिलों में लगातार कार्रवाई दर्ज हो रही है, वहीं बिलासपुर में जिला विपणन, जिला सहकारी बैंक, फूड विभाग और संबंधित एजेंसियों की गतिविधियां लगभग ठहरी हुई नजर आईं। न बड़े पकड़े, न रिपोर्टेड छापे, न ही किसी क्रॉस-बॉर्डर मूवमेंट पर ठोस कार्रवाई के संकेत।
राज्य स्तर पर धान की अवैध आमद को लेकर कड़ी नीति लागू है, लेकिन बिलासपुर की धीमी प्रतिक्रिया ने निगरानी तंत्र पर सवाल उठाए। अन्य जिलों की तुलना में यहां से मिले आंकड़े नगण्य रहे, जबकि जिले की भौगोलिक स्थिति को देखते हुए सतर्कता सबसे मुखर दिखाई जानी थी।
अवैध धान की आमद को रोकने के लिए जारी राज्यव्यापी अभियान के बीच बिलासपुर की निष्क्रियता अब चर्चा का बड़ा कारण बन चुकी है। मार्कफेड के उच्च स्तर पर भी इस सुस्ती को लेकर नाराजगी की खबरें सामने आ रही हैं, जबकि बाकी जिलों में टीमें लगातार दबाव बना रही हैं।
राज्य भर में जहां निगरानी तंत्र तेजी से सक्रिय है, बिलासपुर में धीमी चाल ने अवैध परिवहन पर लगाम कसने के इस बड़े अभियान पर कई बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।

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