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“यूनिटी मार्च की पहली लाइन में विधायक सुशांत और भाजपा नेत्री हर्षिता के बीच‘कलह’: सरदार पटेल जयंती पर बिलासपुर में BJP की अंदरूनी जंग सड़क पर उजागर”

Mohammed Israil
Mohammed Israil  - Editor
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मोहम्मद इसराइल बबलू


Bilaspur। बिलासपुर में लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल की 150वीं जयंती पर आयोजित “यूनिटी मार्च” का मंच बीजेपी के भीतर उफनती खींचतान का अखाड़ा बन गया। केंद्रीय मंत्री तोखन साहू की अगुवाई में निकली रैली में जिस एकता का संदेश देने का दावा किया गया था, उसी के बीच प्रदेश मंत्री हर्षिता पांडे और बेलतरा विधायक सुशांत शुक्ला के बीच फर्स्ट लाइन में रहने को लेकर खुला टकराव सामने आ गया। मंत्री के साथ कतार में खड़े होने की होड़ ने पार्टी के भीतर बढ़ती प्रतिस्पर्धा, असहमति और नेतृत्व की दावेदारी को सड़क पर लाकर रख दिया। वरिष्ठ नेताओं को बीच-बचाव करना पड़ा और पूरा ‘यूनिटी मार्च’ क्षण भर को सियासी धक्का-मुक्की का दृश्य बन गया।
बिलासपुर में ‘एकता’ का बड़ा मंच… और उसी मंच पर ‘असहमति’ का तनाव


सरदार पटेल की 150वीं जयंती पर बिलासपुर में आयोजित यूनिटी मार्च के लिए माहौल भव्य था। मां काली मंदिर परिसर से केंद्रीय मंत्री तोखन साहू, पूर्व विधानसभा अध्यक्ष धरमलाल कौशिक, बिलासपुर विधायक अमर अग्रवाल, बेलतरा विधायक सुशांत शुक्ला, जिला पंचायत अध्यक्ष राजेश सूर्यवंशी, कलेक्टर संजय अग्रवाल, SSP राजनेश सिंह सहित शीर्ष प्रशासनिक और राजनीतिक नेतृत्व की मौजूदगी ने कार्यक्रम को बड़ा स्वरूप दिया। लेकिन जैसे ही रैली की शुरुआत हुई, पहले पंक्ति में स्थान को लेकर शक्तिप्रदर्शन साफ दिखने लगा।
पहली पंक्ति पर ‘दावेदारी’ — भिड़े दो नेता, बीच में पड़े कद्दावर चेहरे

रैली के नेतृत्व में केंद्रीय मंत्री तोखन साहू के साथ चलने को लेकर विधायक सुशांत शुक्ला और प्रदेश मंत्री हर्षिता पांडे आमने-सामने आ गए। दोनों नेताओं ने अपने-अपने पद और प्रोटोकॉल का हवाला देकर फर्स्ट लाइन में खड़े होने का दावा जताया। देखते ही देखते नोकझोंक सार्वजनिक होती चली गई। शुक्ला ने आगे बढ़ने की कोशिश की, तो पांडे ने उन्हें पीछे धकेल दिया। मौके पर मौजूद वरिष्ठ नेता धरमलाल कौशिक और अन्य दिग्गजों ने समझाइश देकर स्थिति संभालने की कोशिश की।
इस भिड़ंत ने बीजेपी के भीतर चल रही लंबी खामोश खींचतान को अचानक से सार्वजनिक कर दिया—वह भी उस दिन, उस मंच पर, जो पार्टी की “एकता” को प्रदर्शित करने के लिए चुना गया था।
भव्य आयोजन, विशाल भीड़ — लेकिन सुर्खियों में आया आपसी संघर्ष
रैली में हजारों युवा शामिल हुए, ‘भारत माता की जय’, ‘वंदे मातरम’ और ‘सरदार पटेल अमर रहें’ के नारों से शहर गूंजा, मुख्य मार्गों पर फूल बरसे, छात्र 100 मीटर तिरंगा लेकर मार्च में शामिल हुए। रथ यात्रा, पुष्प वर्षा, जनसहभागिता… सब कुछ था। लेकिन इन सबके बीच पहली लाइन में हुए टकराव ने यूनिटी मार्च के संदेश को सियासी विवाद की दिशा में मोड़ दिया।
वरिष्ठ नेताओं के भाषणों में ‘एकता’ का संदेश—लेकिन इशारों में दिखा दबाव
केंद्रीय मंत्री तोखन साहू ने सरदार पटेल को अखंडता का प्रतीक बताते हुए 561 रियासतों के एकीकरण का हवाला दिया। धरमलाल कौशिक ने युवाओं से देश की एकता के लिए आगे आने की अपील की। बेलतरा विधायक सुशांत शुक्ला और प्रदेश मंत्री हर्षिता पांडे दोनों ने अपने-अपने मंच से सरदार पटेल के योगदान पर जोर दिया। मंच पर यह सब एकता का संदेश देता रहा, जबकि सड़क पर उसी दौरान BJP के दो चेहरे शक्ति संतुलन की लड़ाई में उलझे हुए दिखाई दिए।
कार्यक्रम भव्य, भीड़ मजबूत—लेकिन भीतर का टेंशन छिपा नहीं
सबरी महाविद्यालय में कार्यक्रम का समापन हुआ, स्वच्छता दीदियों का सम्मान किया गया, महिला समूहों के स्टॉलों का निरीक्षण हुआ, स्वदेशी अपनाने का संकल्प लिया गया। अधिकारियों, सामाजिक संगठनों, खिलाड़ियों और छात्रों की व्यापक उपस्थिति ने कार्यक्रम की गरिमा बढ़ाई। परंतु इस पूरे आयोजन में वह पल जो राजनीतिक गलियारों में सबसे ज्यादा चर्चा में रहा, वह था—पहली पंक्ति में खड़े होने की होड़ और धक्का-मुक्की के बीच उजागर हुई सियासी दरार।
बिलासपुर के “यूनिटी मार्च” का मंच जिस एकता के प्रदर्शन के लिए तैयार किया गया था, वहीं पर नेताओं के बीच दावेदारी का सार्वजनिक टकराव एक बार फिर इस सवाल को केंद्र में ला खड़ा करता है कि पार्टी की आंतरिक संरचना में शक्ति संतुलन की जंग किस दिशा में बढ़ रही है।

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