बिलासपुर। छत्तीसगढ़ में धान खरीदी शुरू होने से ठीक पहले सहकारी समितियों का संकट अपने चरम पर पहुंच चुका है। चार सूत्रीय मांगों को लेकर समिति कर्मचारी और समर्थन मूल्य धान खरीदी के कंप्यूटर ऑपरेटर 8वें दिन भी अनिश्चितकालीन आंदोलन पर डटे हुए हैं। सोमवार को भी हजारों कर्मचारी बिलासपुर संभाग के आठ जिलों से जुटकर धरने पर बैठे रहे, जबकि सोमवार को आंदोलनकर्त्ताओं ने ‘सद्बुद्धि यज्ञ’ आयोजित कर सरकार को चेतावनी दी है कि अब भी समाधान नहीं निकला तो धान खरीदी की पूरी व्यवस्था चरमरा जाएगी।
7 दिनों से समिति बंद, किसानों की पंजीयन प्रक्रिया ठप — धान खरीदी से पहले हड़कंप



03 नवंबर से चल रहे इस आंदोलन का सीधा असर राज्य की धान खरीदी व्यवस्था पर पड़ रहा है। जहां समितियों में ताले लटके हैं, वहीं खेतों से लेकर फड़ तक की तैयारी ठप पड़ी है। धान खरीदी 15 नवंबर से शुरू होनी है, लेकिन:
- समितियों में फड़ की सफाई नहीं
- किसानों के पंजीयन की प्रक्रिया पूरी तरह बंद
- हजारों किसान पंजीयन के लिए भटक रहे
- कंप्यूटर सिस्टम ठप, डेटा एंट्री नहीं
आंदोलनकारियों का कहना है कि राज्य सरकार को कई बार खाद्य विभाग, सहकारिता विभाग से लेकर पंजीयक और मुख्यमंत्री स्तर तक ज्ञापन दिया गया, लेकिन “18 साल से शोषित” डाटा एंट्री ऑपरेटरों की आवाज कोई नहीं सुन रहा।
चार सूत्रीय मांगें — जिन पर अड़ी है संयुक्त मोर्चा
सहकारी समिति कर्मचारी संघ और धान खरीदी कंप्यूटर ऑपरेटर संघ की प्रमुख मांगें:
- धान में ‘सुखत भरपाई’ — समितियों में धान का उठाव समय पर न होने से जो नुक़सान होता है, उसकी भरपाई धान में सुखत देकर की जाए।
- डेटा एंट्री ऑपरेटरों का 12 माह वेतन और नियमितीकरण
- 2007 से संविदा पर नियुक्त
- 18 वर्षों से कार्यरत
- इस वर्ष आउटसोर्सिंग भर्ती प्रक्रिया का विरोध
- 12 माह वेतन की मांग
- विभाग निर्धारित कर नियमितीकरण की मांग
- प्रबंधकीय अनुदान — मध्य प्रदेश की तर्ज पर 2058 सहकारी समितियों को 3-3 लाख का अनुदान, ताकि कर्मचारियों को समय पर वेतन मिल सके।
- सेवानियम 2018 में संशोधन और नया वेतनमान
- पुनरीक्षित वेतनमान लागू
- जिला सहकारी बैंक भर्ती में 50% आरक्षण समिति कर्मचारियों के लिए
“हमने व्यवस्था संभाली, और अब हमें ही नज़रअंदाज़ किया जा रहा”
आंदोलनकारियों की भावनाएँ बेहद आक्रोशित हैं। उनका आरोप है:
- सरकार “समृद्धि” कार्यक्रमों में व्यस्त
- 18 साल से काम कर रहे कर्मचारियों की कोई सुनवाई नहीं
- जिन कर्मचारियों ने ऑनलाइन पैक्स कम्प्यूटरीकरण चलाया, उन्हीं को बाहर का रास्ता दिखाने की तैयारी
कर्मचारियों का कहना है कि उनकी उम्र सरकारी सेवा देने में निकल गई, लेकिन अभी तक न वेतन स्थिर है, न नियमितीकरण।
सद्बुद्धि यज्ञ से सरकार को चेतावनी
रविवार को भी कर्मचारियों ने भारी संख्या में उपस्थिति दर्ज कराई।
सोमवार को बिलासपुर संभाग के आठों जिलों से लगभग 2700 कर्मचारी सद्बुद्धि यज्ञ में शामिल हुए, जिसमें सरकार के प्रति अपना आक्रोश और समाधान की मांग को प्रतीकात्मक रूप से व्यक्त करेंगे।
किसानों में बढ़ती बेचैनी, सिस्टम पर गंभीर सवाल
धान खरीदी से पहले समितियों में यह ठहराव सरकार की पूरी सप्लाई चेन पर बड़ा संकट खड़ा कर रहा है।
- किसान परेशान
- धान खरीदी व्यवस्था अव्यवस्थित
- समिति कर्मचारी आंदोलन पर अड़े
- सरकार की चुप्पी सवालों के घेरे में
आंदोलनकारियों ने स्पष्ट संदेश दिया है—
“जब तक चार सूत्रीय मांगें पूरी नहीं होतीं, समिति के ताले नहीं खुलेंगे।”



