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सिम्स बिलासपुर में गुड क्लिनिकल प्रैक्टिस (GCP) पर राष्ट्रीय स्तर की कार्यशाला — शोध की नैतिकता और गुणवत्ता पर हुआ गहन विमर्श

Mohammed Israil
Mohammed Israil  - Editor
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मोहम्मद इसराइल बबलू | बिलासपुर
छत्तीसगढ़ आयुर्विज्ञान संस्थान (CIMS) बिलासपुर में “गुड क्लिनिकल प्रैक्टिस” (Good Clinical Practice – GCP) पर एक दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला का सफल आयोजन किया गया। इस कार्यशाला का उद्देश्य चिकित्सा अनुसंधान (Clinical Research) से जुड़े पेशेवरों, शोधकर्ताओं और स्नातकोत्तर विद्यार्थियों को नैतिक और वैज्ञानिक मानकों के अनुरूप अनुसंधान कार्यों के संचालन के लिए प्रशिक्षित करना था।
उद्घाटन सत्र: शोध की गुणवत्ता और प्रतिभागियों की सुरक्षा पर बल


कार्यशाला का उद्घाटन संस्थान के अधिष्ठाता डॉ. रमणेश मूर्ति ने किया।
अपने उद्घाटन भाषण में उन्होंने कहा —
“गुड क्लिनिकल प्रैक्टिस का पालन न केवल अनुसंधान की गुणवत्ता सुनिश्चित करता है, बल्कि प्रतिभागियों की सुरक्षा और अधिकारों की रक्षा के लिए भी आवश्यक है। हर शोधकर्ता को यह समझना होगा कि नैतिक अनुसंधान ही सच्चे वैज्ञानिक विकास की नींव है।”
विशेषज्ञों ने रखे विचार — एथिक्स से लेकर डेटा इंटीग्रिटी तक गहन चर्चा
इस कार्यशाला में AIIMS, रायपुर से आमंत्रित विषय विशेषज्ञों ने विभिन्न पहलुओं पर विस्तृत जानकारी दी। इनमें शामिल थे —
डॉ. नितिन गायकवाड़
डॉ. योगेन्द्र के.
डॉ. पुग़ाडैनथन
डॉ. संजीव कांत
इन विशेषज्ञों ने क्लिनिकल ट्रायल की विभिन्न प्रक्रियाएं, नियामक आवश्यकताएं, नैतिक समीक्षा (Ethical Review), दस्तावेजीकरण (Documentation), प्रतिभागियों की सहमति (Informed Consent) और डेटा अखंडता (Data Integrity) जैसे विषयों पर विस्तार से चर्चा की।
कार्यशाला के दौरान प्रतिभागियों को क्लिनिकल रिसर्च के वैश्विक मानकों और भारतीय नियामकीय दिशा-निर्देशों की तुलना पर भी जानकारी दी गई।
100 से अधिक प्रतिभागियों की सक्रिय भागीदारी
इस एक दिवसीय प्रशिक्षण में 100 से अधिक प्रतिभागियों ने भाग लिया, जिनमें डॉक्टर, रिसर्च कोऑर्डिनेटर, और मेडिकल स्नातकोत्तर छात्र शामिल थे।
सत्र के अंत में इंटरैक्टिव चर्चा और प्रश्नोत्तर सत्र आयोजित किया गया, जिसमें प्रतिभागियों ने अपने सवाल विशेषज्ञों के सामने रखे और व्यावहारिक चुनौतियों पर विचार साझा किए।
समापन सत्र: धन्यवाद ज्ञापन और भविष्य की योजना
कार्यशाला का समापन डॉ. मोनिका साहू के धन्यवाद ज्ञापन से हुआ। उन्होंने सभी वक्ताओं, अतिथियों और प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया और घोषणा की कि भविष्य में भी ऐसे शोध-केंद्रित प्रशिक्षण कार्यक्रम नियमित रूप से आयोजित किए जाएंगे।
आयोजन का दायित्व और विभागीय सहयोग
इस कार्यशाला का आयोजन फार्माकोलॉजी विभाग की विभागाध्यक्ष प्रो. डॉ. श्रेया तोड़ी के मार्गदर्शन में किया गया।
विभाग के सभी संकाय सदस्यों ने इस आयोजन में सक्रिय भूमिका निभाई।
साथ ही सिम्स के विभिन्न विभागों के वरिष्ठ चिकित्सकों ने भी भागीदारी निभाई —
डॉ. बी. पी. सिंह, चिकित्सा अधीक्षक, सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल
डॉ. मधुमिता मूर्ति, विभागाध्यक्ष, एनेस्थीसिया विभाग
डॉ. अर्चना सिंह, विभागाध्यक्ष, रेडियोलॉजीनोसिस विभाग
डॉ. संगीता रमन जोगी, विभागाध्यक्ष, प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग
डॉ. हेमलता ठाकुर, विभागाध्यक्ष, सामुदायिक चिकित्सा विभाग
तथा अन्य विभागों के फैकल्टी मेंबर्स की उपस्थिति से कार्यक्रम की गरिमा और बढ़ी।
GCP क्या है?
गुड क्लिनिकल प्रैक्टिस (Good Clinical Practice) विश्व स्वास्थ्य संगठन और अंतरराष्ट्रीय नियामक संस्थाओं द्वारा निर्धारित मानक है, जो यह सुनिश्चित करता है कि —
प्रत्येक क्लिनिकल ट्रायल वैज्ञानिक रूप से सटीक और नैतिक रूप से सही हो।
प्रतिभागियों की सुरक्षा, गोपनीयता और अधिकारों की रक्षा की जाए।
डेटा की विश्वसनीयता और पारदर्शिता बनी रहे।
PG परीक्षा के लिए क्यों जरूरी है GCP प्रशिक्षण
सिम्स बिलासपुर के अधिष्ठाता डॉ. रमणेश मूर्ति के अनुसार,
“गुड क्लिनिकल प्रैक्टिस का प्रशिक्षण अब पोस्टग्रेजुएट (PG) परीक्षा की पात्रता हेतु अनिवार्य है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि आने वाले चिकित्सक और शोधकर्ता अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप क्लिनिकल रिसर्च करने में सक्षम हों।”
कार्यशाला का सार
यह आयोजन सिम्स बिलासपुर की उस पहल का हिस्सा है जिसके तहत संस्थान को राष्ट्रीय स्तर के मेडिकल रिसर्च सेंटर के रूप में स्थापित करने की दिशा में ठोस कदम उठाए जा रहे हैं।
कार्यशाला ने प्रतिभागियों में नैतिक अनुसंधान की समझ, डेटा हैंडलिंग की सावधानियों, और क्लिनिकल रिसर्च की विश्वसनीयता को लेकर गहरी जागरूकता पैदा की।
संस्थान: छत्तीसगढ़ आयुर्विज्ञान संस्थान (CIMS), बिलासपुर
कार्यक्रम तिथि: 8 नवंबर 2025
विषय: गुड क्लिनिकल प्रैक्टिस (GCP)
आयोजक विभाग: फार्माकोलॉजी विभाग
मुख्य अतिथि: डॉ. रमणेश मूर्ति, अधिष्ठाता
समन्वय: प्रो. डॉ. श्रेया तोड़ी
प्रतिभागी: 100+ डॉक्टर, शोधकर्ता और PG विद्यार्थी

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