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बिलासपुर में भीषण ट्रेन हादसा: मालगाड़ी और मेमू ट्रेन की टक्कर में 8 की मौत, 20 घायल — राज्य गठन के बाद छत्तीसगढ़ में 20 वां बड़ा रेल हादसा

Mohammed Israil
Mohammed Israil  - Editor
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हादसे में घायल एक बच्चा।

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मोहम्मद इसराइल बबलू | बिलासपुर (छत्तीसगढ़)
देश की सबसे व्यस्त रेल लाइनों में से एक बिलासपुर रेल मंडल मंगलवार शाम एक भीषण रेल हादसे का गवाह बना। स्टेशन यार्ड के पास मेमू लोकल ट्रेन और खड़ी मालगाड़ी की टक्कर में कम से कम 8 लोगों की मौत हो गई, जबकि 20 यात्री गंभीर रूप से घायल हैं।
दुर्घटना इतनी जबरदस्त थी कि मेमू ट्रेन के दो कोच पूरी तरह पटरियों से उतर गए और कई यात्री डिब्बों में फंस गए। हादसे के बाद स्टेशन परिसर में अफरातफरी का माहौल बन गया।
रेलवे ने तत्काल राहत व बचाव अभियान युद्धस्तर पर शुरू किया और रातभर एसडीआरएफ व रेलवे सुरक्षा बल (RPF) की टीमें मलबा हटाने में जुटी रहीं। घायलों को CIMS बिलासपुर और अपोलो हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया है।
रेलवे प्रशासन ने मृतकों के परिजनों को ₹10 लाख, गंभीर घायलों को ₹5 लाख और सामान्य घायलों को ₹1 लाख की सहायता राशि देने की घोषणा की है।
कोरबा से आ रही मेमू ट्रेन (Train No. 08706) को बिलासपुर स्टेशन में प्लेटफॉर्म नंबर-1 पर लाया जा रहा था। उसी समय लाइन पर खड़ी मालगाड़ी को सिग्नल में गड़बड़ी के चलते हरी झंडी मिल गई।
मेमू ट्रेन तेज रफ्तार में आगे बढ़ी और मालगाड़ी से भिड़ गई।
प्राथमिक जांच में सिग्नलिंग सिस्टम की विफलता और मानवीय त्रुटि दोनों को कारण माना जा रहा है।
रेलवे सुरक्षा आयुक्त (CRS) ने हादसे की उच्चस्तरीय जांच शुरू कर दी है और रिपोर्ट एक सप्ताह के भीतर मांगी गई है।
राहत व बचाव
रेलवे के वरिष्ठ अधिकारी, DRM बिलासपुर, IG रेल पुलिस और जिला प्रशासन मौके पर मौजूद रहे।
घायलों को तत्काल एम्बुलेंस के जरिए अस्पताल भेजा गया।
हेल्पलाइन नंबर जारी किए गए:
▪️ बिलासपुर – 7777857335, 7869953330
▪️ चांपा – 8085956528
▪️ रायगढ़ – 9752485600
▪️ पेंड्रा रोड – 8294730162
▪️ कोरबा – 7869953330
▪️ उसलापुर – 7777857338
रेल प्रशासन ने कहा है कि “स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है और सभी यात्रियों को हर संभव सहायता दी जा रही है।”
छत्तीसगढ़ में रेल हादसों का सिलसिला — 2000 के बाद से अब तक 20 से अधिक बड़ी दुर्घटनाएँ
राज्य गठन के बाद छत्तीसगढ़ लगातार रेल हादसों से जूझ रहा है। कोयले और खनिजों के परिवहन का दबाव झेल रहे इस क्षेत्र में हर कुछ सालों में बड़ी दुर्घटना सामने आती है।
वर्षस्थान / घटनाजनहानि2002, रायगढ़मालगाड़ी के 15 डिब्बे डिरेलकोई नहीं2006, बिलासपुर डिवीजनयात्री ट्रेन-मालगाड़ी भिड़ंत2 मृतक2011, तार बहार12 लोगों की ट्रेन की चपेट में मौत12 मृतक2013, सरबेहराकोयला लदी मालगाड़ी के 27 डिब्बे डिरेल–2015, कोरबाबोलेरो-ट्रेन टक्कर6 मृतक2018, रायपुर के पासपैसेंजर ट्रेन के 8 डिब्बे पटरी से उतरेकई घायल2022, जामगांव (रायगढ़)मालगाड़ी के 18 डिब्बे डिरेल–2023, दुर्ग-भिलाई सेक्शनकोच में आग लगना2 घायल2024, पेंड्रा रोड17 बोगियां डिरेल–2025, बिलासपुर स्टेशनमेमू-मालगाड़ी टक्कर8 मृतक, 17 घायल
विशेषज्ञों की राय: “रेल ट्रैफिक लोड क्षमता से तीन गुना अधिक”
रेलवे सुरक्षा विशेषज्ञ का कहना है —
“छत्तीसगढ़ में ट्रैक मेंटेनेंस सिस्टम बहुत पीछे है। कोयले की मालगाड़ियों का भार इतना अधिक है कि रेल सेक्शन की क्षमता तीन गुना पार कर चुकी है। अगर ट्रैक मॉडर्नाइजेशन नहीं हुआ तो यह हादसे और बढ़ेंगे।”
रेलवे यूनियन के सदस्य आर.एल. शर्मा ने कहा —
“सिग्नलिंग सिस्टम को ऑटोमेटिक करने के बावजूद कई जगहों पर मैनुअल ऑपरेशन होता है।
हादसे मानवीय त्रुटि से ज्यादा सिस्टम फेल्योर का नतीजा हैं।”
रेलवे का जवाब
दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे (SECR) ने बयान जारी करते हुए कहा —
“दुर्घटना के कारणों की जांच CRS द्वारा की जाएगी। राहत कार्य पूरा कर लिया गया है और रेलवे ट्रैक को रातभर में बहाल कर दिया गया है। सभी अस्पतालों में घायलों के लिए निःशुल्क चिकित्सा की व्यवस्था की गई है।”
रेल मंत्रालय ने दिल्ली से विशेष निगरानी दल रवाना किया है और इस हादसे को “गंभीर श्रेणी की घटना” के रूप में दर्ज किया गया है।
ग्राउंड सीन: स्टेशन पर चीखें, रेलकर्मी घंटों तक जुटे रहे मलबा हटाने में
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, हादसे के बाद पूरा स्टेशन धुएं और टूटे डिब्बों के मलबे से भर गया था।
यात्री खुद शीशे तोड़कर बाहर निकले।
रातभर रेलवे कर्मियों और फायर ब्रिगेड की 6 टीमें राहत कार्य में जुटी रहीं।
घायलों में बच्चे और महिलाएं भी शामिल हैं।
बड़ी तस्वीर: सिस्टम फेल या प्रशासनिक लापरवाही?
छत्तीसगढ़ जैसे औद्योगिक राज्य में हर दिन 500 से अधिक मालगाड़ियाँ गुजरती हैं, जिनमें कोयला, स्टील, लौह अयस्क और सीमेंट का परिवहन होता है।
लेकिन रेल इंफ्रास्ट्रक्चर वर्षों से जर्जर स्थिति में है।
ट्रैक मॉनिटरिंग, सिग्नलिंग अपडेट और मानव संसाधन के अभाव ने यह हादसा एक सिस्टम फेल्योर के रूप में उजागर कर दिया है।
बिलासपुर रेल हादसा केवल एक दुर्घटना नहीं, बल्कि देश की रेलवे सुरक्षा प्रणाली के लिए एक अलार्म है।
भारत हर साल औसतन 100 से अधिक रेल दुर्घटनाएं झेलता है, और छत्तीसगढ़ इसमें सबसे संवेदनशील इलाकों में गिना जाता है।
अब जरूरी है कि रेलवे सिर्फ राहत राशि की घोषणा तक सीमित न रहे — बल्कि
ट्रैक से लेकर सिग्नल तक, हर स्तर पर सुरक्षा सुधार लागू करे।

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