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धान खरीदी से पहले कर्मचारियों का ‘मोर्चा’: अनिश्चितकालीन आंदोलन के मोड पर सहकारी कर्मचारी और ऑपरेटर संघ

Mohammed Israil
Mohammed Israil  - Editor
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3 नवंबर से हड़ताल की दी थी चेतावनी — चार सूत्रीय मांगों को लेकर सरकार के सामने खुली चुनौती
रायपुर/बिलासपुर।
छत्तीसगढ़ में इस बार धान खरीदी 15 नवंबर से शुरू होने जा रही है, लेकिन खरीदी शुरू होने से पहले ही इसका पूरा ढांचा हिलने लगा है।
राज्यभर के सहकारी समिति कर्मचारी और समर्थन मूल्य ऑपरेटर संघ अब अनिश्चितकालीन आंदोलन के मोड में हैं।
छत्तीसगढ़ सहकारी समिति कर्मचारी महासंघ रायपुर एवं धान खरीदी ऑपरेटर संघ ने सरकार को स्पष्ट चेतावनी दी है —
“जब तक हमारी चार सूत्रीय मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक धान खरीदी का बहिष्कार जारी रहेगा।”
🔹 आंदोलन की उलटी गिनती शुरू
संघ ने 24 अक्टूबर से चरणबद्ध आंदोलन का कार्यक्रम तय कर दिया है, जिसके तहत
24 अक्टूबर को जिला मुख्यालयों में रैली और ज्ञापन,
28 अक्टूबर को संभागीय स्तर पर “महाहुंकार रैली”,
3 से 11 नवंबर तक संभाग स्तरीय प्रदर्शन,
और
12 नवंबर से अनिश्चितकालीन हड़ताल की घोषणा की गई है।
संघ का दावा है कि यदि शासन ने तब तक उनकी मांगें नहीं मानीं, तो धान खरीदी की प्रक्रिया पूरी तरह ठप पड़ जाएगी।
🔹 15,000 कर्मचारी और 39 उपार्जन केंद्र दांव पर
प्रदेशभर में लगभग 15,000 सहकारी समिति कर्मचारी और 39 उपार्जन केंद्रों के संविदा कंप्यूटर ऑपरेटर इस आंदोलन में शामिल होने जा रहे हैं।
संघ का कहना है कि वर्षों से वे अपनी सेवा स्थायित्व, वेतनमान सुधार, पदोन्नति और सुरक्षा संबंधी मुद्दों पर शासन से संवाद कर रहे हैं, मगर अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
कर्मचारी नेताओं के अनुसार —
“पिछले वर्ष भी यही हाल था। धान खरीदी से ठीक पहले आंदोलन हुआ, शासन ने वादा किया कि समस्या सुलझा दी जाएगी। लेकिन एक साल बीत गया, कुछ नहीं बदला।”
सरकार के लिए बढ़ी मुश्किलें
धान खरीदी हर साल नवंबर में शुरू होती है, और इस प्रक्रिया में सहकारी समितियां रीढ़ की हड्डी की भूमिका निभाती हैं।
यदि इस बार कर्मचारी हड़ताल पर चले गए तो धान उपार्जन केंद्रों का संचालन रुक सकता है, जिससे न केवल किसानों की फसल खरीदी अटक जाएगी, बल्कि राज्य सरकार की साख पर भी असर पड़ेगा।
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यह आंदोलन सरकार के लिए एक खुली प्रशासनिक चुनौती बन सकता है।
कर्मचारी महासंघ का रुख साफ है —
“हमारे धैर्य की परीक्षा अब पूरी हो चुकी है, अब निर्णय सरकार को लेना है।”
धान खरीदी से पहले ‘असंतोष की फसल’
प्रदेश में हर साल की तरह इस बार भी किसानों ने फसल तैयार कर ली है, लेकिन अब सवाल यह है कि खरीदार कौन होगा?
क्योंकि जो कर्मचारी धान तौलते, दर्ज करते और भुगतान प्रक्रिया चलाते हैं — वही अब आंदोलन की तैयारी में हैं।
छत्तीसगढ़ की विष्णु देव सरकार के सामने अब यह सबसे बड़ी परीक्षा है —
क्या वह किसानों की उम्मीदों को बनाए रखते हुए कर्मचारियों के असंतोष को शांत कर पाएगी?
आंदोलन
आंदोलनकारी संगठन: छत्तीसगढ़ सहकारी समिति कर्मचारी महासंघ एवं समर्थन मूल्य धान खरीदी ऑपरेटर संघ
मुख्य मांगें: सेवा स्थायित्व, वेतनमान सुधार, सुरक्षा एवं पदोन्नति व्यवस्था
प्रभाव क्षेत्र: राज्य की सभी सहकारी समितियां और उपार्जन केंद्र
आंदोलन कार्यक्रम: 24 अक्टूबर से चरणबद्ध आंदोलन, 12 नवंबर से अनिश्चितकालीन हड़ताल
संभावित असर: धान खरीदी व्यवस्था पर सीधा प्रभाव, किसानों को परेशानी
कर्मचारी नेताओं का बयान
“हम बार-बार अनुरोध करते रहे, पर शासन की चुप्पी अब बर्दाश्त से बाहर है। धान खरीदी को बाधित करने का इरादा हमारा नहीं, मजबूरी सरकार ने बना दी है।”

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