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अंधविश्वास की बलि चढ़ी मासूम: मुंगेली में तंत्र-मंत्र के लिए 7 साल की बच्ची की हत्या, रिश्तेदार ही निकले हत्यारे

Mohammed Israil
Mohammed Israil  - Editor
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Mohammed israil

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Bilaspur Chhattisgarh बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के मुंगेली जिले से दिल दहला देने वाली घटना ने पूरे प्रदेश को झकझोर दिया है। अंधविश्वास, तंत्र-मंत्र और धन की लालसा ने इंसानियत को शर्मसार कर दिया, जब महज 7 साल की मासूम बच्ची को उसके ही रिश्तेदारों ने ‘बलि’ के नाम पर मौत के घाट उतार दिया। यह वारदात न सिर्फ प्रदेश में काले जादू की भयावह सच्चाई उजागर करती है, बल्कि यह भी सवाल खड़े करती है कि 21वीं सदी में भी अंधविश्वास का ऐसा अंधेरा क्यों कायम है?मुंगेली।कोसाबाड़ी गांव में 11 अप्रैल 2025 की रात 7 वर्षीय लाली उर्फ महेश्वरी गोस्वामी अपनी मां के साथ घर में सो रही थी। सुबह उठी तो बच्ची गायब थी। माता-पिता ने खोजबीन की, पुलिस में रिपोर्ट दर्ज कराई गई, लेकिन कोई सुराग नहीं मिला। लगभग एक महीने बाद, 6 मई को गांव के ही एक खेत में श्मशान के पास मानव खोपड़ी और अस्थियाँ मिलीं। डीएनए परीक्षण में यह अवशेष उसी लापता बच्ची के निकले।📌 छत्तीसगढ़ में अब तक के बलि कांड – एक नजर मेंजागरूकता है जरूरी

Bilaspur Chhattisgarh बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के मुंगेली जिले से दिल दहला देने वाली घटना ने पूरे प्रदेश को झकझोर दिया है। अंधविश्वास, तंत्र-मंत्र और धन की लालसा ने इंसानियत को शर्मसार कर दिया, जब महज 7 साल की मासूम बच्ची को उसके ही रिश्तेदारों ने ‘बलि’ के नाम पर मौत के घाट उतार दिया। यह वारदात न सिर्फ प्रदेश में काले जादू की भयावह सच्चाई उजागर करती है, बल्कि यह भी सवाल खड़े करती है कि 21वीं सदी में भी अंधविश्वास का ऐसा अंधेरा क्यों कायम है?


मुंगेली।कोसाबाड़ी गांव में 11 अप्रैल 2025 की रात 7 वर्षीय लाली उर्फ महेश्वरी गोस्वामी अपनी मां के साथ घर में सो रही थी। सुबह उठी तो बच्ची गायब थी। माता-पिता ने खोजबीन की, पुलिस में रिपोर्ट दर्ज कराई गई, लेकिन कोई सुराग नहीं मिला। लगभग एक महीने बाद, 6 मई को गांव के ही एक खेत में श्मशान के पास मानव खोपड़ी और अस्थियाँ मिलीं। डीएनए परीक्षण में यह अवशेष उसी लापता बच्ची के निकले।

बलि का खौफनाक सच:
पुलिस जांच में पता चला कि बच्ची की हत्या उसके ही रिश्तेदारों ने तांत्रिक पूजा “झरन पूजा” के लिए की थी, जिससे उन्हें मनचाही समृद्धि और धन की प्राप्ति हो सके। इस वीभत्स कांड में चिम्मन गिरी गोस्वामी, उसकी पत्नी ऋतु गोस्वामी, नरेंद्र मार्को, आकाश मरावी और बैगा रामरतन निषाद को गिरफ्तार किया गया। मुख्य साजिशकर्ता ऋतु बताई गई, जिसने बैगा से संपर्क कर बलि की योजना रची।

हत्या की क्रूर साजिश:
आरोपियों ने नरेंद्र को पैसे देकर बच्ची को घर से उठवाया। रात में उसे काले कपड़े पहनाकर तांत्रिक अनुष्ठान किया गया और फिर चाकू से गला रेत कर खेत में शव को दफना दिया गया।

जांच में तकनीकी दक्षता:
एसपी भोजराम पटेल और आईजी डॉ. संजीव शुक्ला के नेतृत्व में गठित विशेष टीम ने साइबर सेल, गवाहों के बयान, सीसीटीवी फुटेज, नार्को, ब्रेन मैपिंग और पॉलिग्राफ टेस्ट की मदद से पूरे मामले को सुलझाया। पूजा सामग्री और हत्या में प्रयुक्त चाकू भी बरामद कर लिया गया।


📌 छत्तीसगढ़ में अब तक के बलि कांड – एक नजर में

वर्ष स्थान पीड़ित कारण आरोपी स्थिति 2014 कांकेर 6 वर्षीय बच्चा बारिश लाने की आस्था गांव के पुजारी व परिजन गिरफ्तार 2016 बलरामपुर किशोरी बीमारी से मुक्ति के लिए बलि तांत्रिक और परिवार दोष सिद्ध 2019 बस्तर 8 साल का बालक समृद्धि की लालसा मामा व बैगा सजा 2023 सरगुजा नवजात शिशु जमीन की प्राप्ति तांत्रिक व माता-पिता दोषी करार 2025 मुंगेली 7 वर्षीय बच्ची धन प्राप्ति रिश्तेदार और बैगा गिरफ्तार

🔴 आम पैटर्न:

  • बच्चा या नवजात बलि का निशाना
  • अंधविश्वास की जड़ में ‘धन, स्वास्थ्य या बारिश’ की चाह
  • काले तांत्रिक अनुष्ठानों में ‘बलि’ को माना जाता है प्रभावशाली उपाय
  • ज़्यादातर मामलों में हत्यारे परिचित या रिश्तेदार ही होते हैं

जागरूकता है जरूरी

यह घटना न सिर्फ एक बच्ची की दर्दनाक हत्या है, बल्कि समाज के उस स्याह कोने की भी झलक है, जहां अंधविश्वास अब भी विज्ञान और मानवता से बड़ा है। ऐसे अपराधों को रोकने के लिए सिर्फ पुलिसिया कार्रवाई नहीं, बल्कि जागरूकता और शिक्षा ही असली समाधान है।

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