00 बुधवार की देर रात तेज गर्जना के साथ जमकर बरसे मेघ, सुबह-सुबह जल भराव की समस्या से जूझते रहे लोग
Mohammed israil, Bilaspur Chhattisgarh बिलासपुर। देश का दूसरा सबसे स्मार्ट और स्वच्छ शहर बनने का तमगा मिलते ही बिलासपुर सुर्खियों में आ गया, लेकिन बुधवार की रात की झमाझम बारिश ने इस ‘स्मार्टनेस’ की पोल खोल दी। हर गली-मोहल्ले में जलभराव, बिजली गुल और मच्छरों से जूझते लोग – ये हाल है उस शहर का, जिसे राष्ट्रपति के हाथों सम्मानित किया गया। नेता और अफसर पीठ थपथपा रहे हैं, लेकिन जनता पूछ रही है – “क्या इसी को कहते हैं स्मार्ट सिटी?”



बिलासपुर को हाल ही में स्वच्छता और स्मार्ट सिटी सर्वेक्षण में पूरे देश में दूसरा स्थान मिला। दिल्ली में आयोजित सम्मान समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उप मुख्यमंत्री अरुण साव, महापौर पूजा विधानी और नगर निगम आयुक्त अमित कुमार को यह पुरस्कार सौंपा। यह उपलब्धि पूरे शहर के लिए गर्व का क्षण थी, लेकिन जमीनी सच्चाई इससे बिल्कुल उलट नजर आ रही है।
बुधवार की देर रात हुई तेज बारिश ने पूरे शहर की स्मार्ट प्लानिंग की पोल खोल दी। बादलों की तेज गर्जना के साथ हुई झमाझम बारिश से शहर के लगभग हर वार्ड में जलभराव की स्थिति बन गई। नालियां ओवरफ्लो हो गईं, सड़कों पर पानी बहने लगा और लोग घंटों तक बिजली गुल रहने से परेशान होते रहे।
रातभर जगे लोग, बिजली और मच्छरों से त्रस्त
कई कॉलोनियों में बिजली कटौती के कारण लोग पूरी रात अंधेरे में गुजारने को मजबूर हुए। पानी भरने से घरों के अंदर तक सीलन और बदबू फैल गई। उधर, मच्छरों का आतंक इतना था कि लोगों को चैन की नींद तक नसीब नहीं हुई। बच्चों और बुजुर्गों को सबसे ज्यादा परेशानी झेलनी पड़ी।
विपक्ष मौन, जनता परेशान
इस गंभीर स्थिति के बावजूद न तो विपक्ष कोई ठोस सवाल उठा रहा है और न ही सत्तापक्ष के पास इसका जवाब है। जनता सवाल कर रही है – “क्या सिर्फ अवॉर्ड लेकर ही शहर स्मार्ट हो जाता है? क्या धरातल की परेशानियों को नज़रअंदाज किया जा सकता है?”
पीठ थपथपाते नेता, आंखें मूंदे अफसर
पुरस्कार मिलने के बाद नगर निगम और प्रशासन के अधिकारियों ने प्रेस विज्ञप्तियों और सोशल मीडिया पर जमकर प्रचार किया। लेकिन आम जनता की शिकायतों पर न तो त्वरित समाधान मिल रहा है और न ही जिम्मेदारी तय हो रही है।
यह सम्मान खोखला ना साबित हो
बिलासपुर का स्मार्ट और स्वच्छ शहर बनना कागजों पर भले ही बड़ी उपलब्धि हो, लेकिन अगर जमीन पर हालात नहीं सुधरे तो यह सम्मान जनता के लिए खोखला प्रतीत होगा। स्मार्ट सिटी का असली चेहरा चमचमाते सर्टिफिकेट में नहीं, बल्कि बारिश की एक रात में बर्बाद हो रही नींद और जिंदगी में दिखता है।



