
कैंसर नियंत्रण की दिशा में अहम पहल, माइक्रोबायोलॉजी विभाग कर रहा जीनोटाइपिंग पर रिसर्च
Mohammed israil| बिलासपुर
छत्तीसगढ़ आयुर्विज्ञान संस्थान (सिम्स) बिलासपुर के माइक्रोबायोलॉजी विभाग में ह्यूमन पेपीलोमा वायरस (HPV) को लेकर एक महत्वपूर्ण शोध कार्य शुरू हुआ है। यह शोध भारत सरकार की एचपीवी जांच एवं टीकाकरण योजना के अंतर्गत संचालित हो रहा है, जो देशभर में कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों के रोकथाम हेतु चलाए जा रहे अभियान का हिस्सा है।
इस शोध का मुख्य उद्देश्य HPV वायरस के विभिन्न जीनोटाइप्स की पहचान करना और इसके संक्रमण के स्वरूप को गहराई से समझना है। सिम्स के अधिष्ठाता डॉ. रमणेश मूर्ति के निर्देशन में यह रिसर्च कार्य प्रारंभ किया गया है।
🔍 एचपीवी वायरस क्या है?

📦 जानिए इसके बारे में विस्तार से 🔸 नाम ह्यूमन पेपीलोमा वायरस (HPV) 🔸 प्रकार डीएनए वायरस 🔸 संक्रमण के रास्ते यौन संपर्क, माँ से बच्चे में, संक्रमित वस्तुओं से 🔸 प्रभावित अंग गर्भाशयग्रीवा (Cervix), मुंह, गला, गुदा, योनि 🔸 मुख्य खतरा कैंसर, विशेष रूप से सर्वाइकल कैंसर
🩺 एचपीवी से कौन-सी बीमारियां होती हैं?
📦 बीमारी
- गर्भाशयग्रीवा (सर्वाइकल) कैंसर
- गुदा (Anal) कैंसर
- योनि, लिंग और मुंह का कैंसर
- जननांग मस्से (Genital Warts)
📊 चौंकाने वाले आंकड़े
भारत सरकार के आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2023 तक करीब 3.5 लाख महिलाएं सर्वाइकल कैंसर से पीड़ित थीं।
छत्तीसगढ़ में अकेले इस वायरस से 6862 मरीज प्रभावित पाए गए।
🧪 शोध कार्य के उद्देश्य
📦 जीनोटाइपिंग और स्क्रीनिंग पर केंद्रित शोध
- HPV के विभिन्न प्रकार (Genotypes) की पहचान
- संक्रमण के रुझान और तीव्रता को समझना
- सटीक इलाज और वैक्सीन निर्माण में मदद
- छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों में स्क्रीनिंग की दिशा तय करना
🧑⚕️ वर्जन
“HPV पर यह शोध कार्य इलाज एवं प्रबंधन को नई दिशा प्रदान करेगा।”
— डॉ. रमणेश मूर्ति, अधिष्ठाता, सिम्स, बिलासपुर (छ.ग.)
🗣️ सरकार की बड़ी पहल
यह शोध प्रधानमंत्री जी की देखरेख में चल रहे HPV नियंत्रण अभियान का हिस्सा है। इसके तहत देशभर के मेडिकल संस्थानों में स्क्रीनिंग, वैक्सीन और जनजागरूकता के लिए उच्चस्तरीय शोध हो रहे हैं।
📝 संभावना:
आने वाले समय में यह शोध HPV से जुड़े कैंसर की रोकथाम, शीघ्र निदान और उपचार के लिए नई मेडिकल गाइडलाइन का आधार बन सकता है।



