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छत्तीसगढ़ बिग ब्रेकिंग खबर….सूरजपुर मां-बेटी हत्याकांड: दो साल बाद अदालत का फैसला, तीन को फांसी और चौथे को मरते दम तक उम्रकैद

Mohammed Israil
Mohammed Israil  - Editor
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सूरजपुर, बिलासपुर |
छत्तीसगढ़ के सूरजपुर में 13 अक्टूबर 2024 की वह रात सिर्फ एक परिवार के लिए त्रासदी नहीं थी। उसने पूरे शहर को झकझोर दिया था। एक प्रधान आरक्षक के घर में घुसकर उसकी पत्नी और 11 साल की बेटी की हत्या, मां के साथ दुष्कर्म, शवों को घर से दूर ले जाकर सुनसान जगह पर फेंकना और इसके बाद भड़का जनाक्रोश—इस पूरे घटनाक्रम ने सूरजपुर को राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियों में ला दिया था।
करीब दो साल बाद इस मामले में अदालत ने अपना सबसे कठोर फैसला सुनाया है।
सूरजपुर की फास्ट ट्रैक कोर्ट ने मुख्य आरोपी कुलदीप साहू समेत तीन दोषियों को फांसी की सजा सुनाई है। चौथे दोषी आर्यन विश्वकर्मा उर्फ गोल्डी को मरते दम तक उम्रकैद दी गई है।
मामले में 29 सितंबर को अदालत ने कुलदीप साहू, फूल सिंह उर्फ रिंकू, चंद्रकांत चौधरी उर्फ सीके और आर्यन विश्वकर्मा को हत्या, दुष्कर्म और पॉक्सो एक्ट से जुड़े आरोपों में दोषी ठहराया था। 8 अक्टूबर को अदालत ने सजा का ऐलान किया।
वह रात जिसने सूरजपुर को हिला दिया
13 अक्टूबर 2024 की रात सूरजपुर कोतवाली में पदस्थ प्रधान आरक्षक तालिब शेख ड्यूटी पर थे। उनका परिवार शहर में किराए के मकान में था।
इसी रात मुख्य आरोपी कुलदीप साहू की पुलिस से झड़प हुई। पुलिस के मुताबिक, उसे पकड़ने की कोशिश के दौरान उसने एक आरक्षक घनश्याम सोनवानी पर खौलता हुआ तेल फेंक दिया। इसके बाद पुलिस ने उसकी तलाश तेज कर दी।
आरोप है कि इसी घटनाक्रम के बीच कुलदीप साहू अपने साथियों के साथ प्रधान आरक्षक के घर पहुंचा।
इसके बाद जो हुआ, वह इस मुकदमे का सबसे भयावह हिस्सा बन गया।
अभियोजन के मुताबिक, घर में मौजूद प्रधान आरक्षक की पत्नी के साथ दुष्कर्म किया गया और फिर धारदार हथियार से उसकी हत्या कर दी गई। इसके बाद उनकी 11 वर्षीय बेटी को भी मार डाला गया।
दोनों शवों को घर से करीब पांच किलोमीटर दूर ले जाकर फेंक दिया गया।
जब पुलिसकर्मी घर लौटा तो सामने था खौफनाक मंजर
ड्यूटी खत्म कर प्रधान आरक्षक जब घर पहुंचे तो घर का दरवाजा टूटा हुआ था। सामान अस्त-व्यस्त था और फर्श तथा दीवारों पर खून के निशान थे।
पत्नी और बेटी दोनों गायब थीं।
रातभर तलाश के बाद अगले दिन दोनों के शव घर से कुछ दूरी पर बरामद हुए। इस बरामदगी ने पूरे मामले को और गंभीर बना दिया।
शुरुआती जांच में ही पुलिस को हत्या के पीछे कुलदीप साहू की भूमिका पर संदेह हुआ। बाद में जांच आगे बढ़ी और कई आरोपियों को गिरफ्तार किया गया।
लेकिन कहानी सिर्फ हत्या से शुरू नहीं हुई थी
इस मामले की पृष्ठभूमि में पुलिस और कुलदीप साहू के बीच पहले से चला आ रहा तनाव भी था।
कुलदीप साहू को पुलिस रिकॉर्ड में आदतन अपराधी और निगरानीशुदा बदमाश बताया गया था। उसके खिलाफ लूट, मारपीट, छेड़छाड़, हथियार अधिनियम समेत कई मामले दर्ज होने की जानकारी सामने आई थी। 2024 में गिरफ्तारी के समय उसके खिलाफ 17 आपराधिक मामलों का उल्लेख पुलिस रिकॉर्ड के हवाले से किया गया था।
वह पहले जिला बदर भी किया जा चुका था और उसके खिलाफ लगातार पुलिस कार्रवाई होती रही थी।
यही पुलिस से पुरानी अदावत इस हत्याकांड की पृष्ठभूमि में महत्वपूर्ण कड़ी बनकर सामने आई।
खौलता तेल, पुलिस पर कार चढ़ाने की कोशिश और फिर डबल मर्डर
13 अक्टूबर की घटनाओं को अगर क्रम से देखें तो यह रात कई अपराधों की श्रृंखला में बदल गई थी।
पहले आरक्षक पर खौलता तेल फेंका गया।
इसके बाद आरोपी को पकड़ने पहुंची पुलिस टीम पर वाहन चढ़ाने की कोशिश का आरोप लगा।
फिर प्रधान आरक्षक के घर में मां-बेटी की हत्या हुई।
कुलदीप साहू पर पुलिस टीम पर फायरिंग करने का आरोप भी लगा था, हालांकि उस मामले में बाद में अदालत ने पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिलने पर उसे और एक अन्य आरोपी को दोषमुक्त कर दिया।
पुलिस पर वाहन चढ़ाने के मामले में हालांकि अदालत ने कुलदीप साहू को दोषी माना और उसे 10 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई।
हत्याकांड के बाद सूरजपुर में फूट पड़ा जनाक्रोश
जब मां-बेटी की हत्या की खबर शहर में फैली तो सूरजपुर में गुस्सा सड़कों पर उतर आया।
लोग बड़ी संख्या में आरोपी के खिलाफ कार्रवाई की मांग करते हुए जमा हुए। हालात इतने बिगड़े कि भीड़ ने आरोपी के घर और उससे जुड़े वाहनों में आग लगा दी।
स्थिति नियंत्रित करने पहुंचे तत्कालीन एसडीएम पर भी भीड़ के हमले की खबर सामने आई।
सूरजपुर में कानून-व्यवस्था को लेकर प्रशासन को अतिरिक्त पुलिस बल लगाना पड़ा।
यह मामला अब सिर्फ एक आपराधिक घटना नहीं रह गया था। यह पुलिस व्यवस्था, आदतन अपराधियों पर कार्रवाई और कानून के डर से जुड़े सवालों का प्रतीक बन चुका था।
फरारी ज्यादा लंबी नहीं चली
हत्या के बाद कुलदीप साहू फरार हो गया।
पुलिस ने जिले की सीमाओं के साथ आसपास के इलाकों में उसकी तलाश शुरू की। आखिरकार उसे बलरामपुर जिले में एक बस से पकड़ा गया। पुलिस के मुताबिक वह झारखंड की ओर भाग गया था और बाद में वापस छत्तीसगढ़ की ओर आ रहा था।
उसकी गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने मामले में अन्य आरोपियों को भी गिरफ्तार किया।
मुख्य हत्याकांड में अंततः चार आरोपियों के खिलाफ मुकदमा चला:
कुलदीप साहू
फूल सिंह उर्फ रिंकू
चंद्रकांत चौधरी उर्फ सीके
आर्यन विश्वकर्मा उर्फ गोल्डी
इन चारों को अदालत ने दोषी करार दिया।
करीब दो साल बाद आया निर्णायक मोड़
मामले की सुनवाई फास्ट ट्रैक कोर्ट में चली। न्यायाधीश आनंद प्रकाश वारियाल की अदालत में अभियोजन पक्ष ने गवाहों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर अपना पक्ष रखा।
29 सितंबर 2026 को अदालत ने चारों को दोषी माना।
इसके बाद सबसे बड़ा सवाल था—सजा कितनी होगी?
पीड़ित पक्ष की ओर से अधिवक्ता संजय अंबस्ट ने इसे ‘रेयरेस्ट ऑफ रेयर’ मामला बताते हुए अदालत से अधिकतम दंड की मांग की थी।
8 अक्टूबर को अदालत ने तीन दोषियों के लिए फांसी और आर्यन विश्वकर्मा के लिए मरते दम तक उम्रकैद का फैसला सुनाया।
दोषी करार होने के बाद कुलदीप की मुस्कान ने भी खींचा ध्यान
29 सितंबर को जब कुलदीप साहू को दोषी करार दिया गया, तब अदालत परिसर से बाहर निकलते समय उसका मुस्कुराता हुआ वीडियो सामने आया था।
रिपोर्टों के मुताबिक उसने मीडिया से अपनी मुस्कुराती हुई तस्वीर लेने को कहा।
एक ऐसे मामले में, जिसमें उसकी पत्नी और नाबालिग बेटी की हत्या के आरोप में उसे दोषी ठहराया जा चुका था, उसका यह व्यवहार सोशल मीडिया और सार्वजनिक चर्चा का विषय बन गया।
उस समय हत्या के मामले में सजा सुनाई जानी बाकी थी।
आज अदालत के फैसले के साथ उसी मामले में सजा का सबसे कठोर अध्याय सामने आया है।
अदालत का फैसला अंतिम पड़ाव नहीं
हालांकि फास्ट ट्रैक कोर्ट ने मौत की सजा सुनाई है, लेकिन कानूनी प्रक्रिया यहीं समाप्त नहीं होती।
मौत की सजा के मामले में उच्च न्यायालय की न्यायिक पुष्टि आवश्यक होती है। दोषियों को फैसले के खिलाफ अपील का अधिकार भी है। इसलिए आज का फैसला ट्रायल कोर्ट के स्तर पर बेहद महत्वपूर्ण है, लेकिन सजा के अंतिम क्रियान्वयन से पहले आगे की न्यायिक प्रक्रिया बाकी रहेगी।
सवाल जो इस मामले ने पीछे छोड़े
सूरजपुर हत्याकांड का सबसे बड़ा सवाल सिर्फ यह नहीं था कि मां-बेटी की हत्या किसने की।
इस घटना ने यह सवाल भी उठाया कि—
क्या बार-बार अपराध करने वाले लोगों के खिलाफ मौजूदा कानून-व्यवस्था पर्याप्त थी?
एक ऐसे आरोपी पर प्रभावी नियंत्रण क्यों नहीं बन पाया, जिसे पुलिस पहले से निगरानीशुदा अपराधी मानती थी?
क्या पुलिस और अपराधी के बीच पुरानी रंजिश ने इस हिंसा को जन्म दिया?
और सबसे बड़ा सवाल—
क्या किसी परिवार को इसलिए निशाना बनाया जा सकता है क्योंकि उसका सदस्य पुलिस में है?
सूरजपुर की इस घटना ने इन सवालों को सिर्फ स्थानीय बहस तक सीमित नहीं रखा। इसने पूरे छत्तीसगढ़ में अपराध, पुलिसिंग और न्याय व्यवस्था पर बहस छेड़ी।
फैसले का सार
मुख्य आरोपी कुलदीप साहू — फांसी
फूल सिंह उर्फ रिंकू — फांसी
चंद्रकांत चौधरी उर्फ सीके — फांसी
आर्यन विश्वकर्मा उर्फ गोल्डी — मरते दम तक उम्रकैद
दो साल पहले जिस घटना ने सूरजपुर को हिंसा और आक्रोश के बीच खड़ा कर दिया था, आज अदालत के फैसले ने उसे न्यायिक प्रक्रिया के एक निर्णायक मुकाम तक पहुंचाया है। लेकिन मौत की सजा पर अंतिम मुहर और उसके बाद की प्रक्रिया अभी बाकी है।

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