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साइंस कॉलेज के रावण पर सियासत … 20 लाख के टेंडर पर कांग्रेस के सवाल—महापौर को जानकारी नहीं तो किसके निर्देश पर निकली निविदा?

Mohammed Israil
Mohammed Israil  - Editor
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एक निगम, दो मैदान, दो रावण! पुलिस ग्राउंड के बाद साइंस कॉलेज में भी निगम का दशहरा क्यों? कांग्रेस ने पूछा—जनता के पैसे से 80 फीट का रावण क्यों?
रावण के लिए 6 लाख, टेंट के लिए 9.96 लाख और आतिशबाजी के लिए 4 लाख का प्रावधान; कांग्रेस का आरोप—त्योहार का सरकारीकरण और सार्वजनिक धन का दुरुपयोग
बिलासपुर। दशहरा आने में अभी कुछ दिन बाकी हैं, लेकिन बिलासपुर में रावण दहन को लेकर सियासत अभी से गरमा गई है। इस बार विवाद सिर्फ रावण के पुतले की ऊंचाई को लेकर नहीं, बल्कि उसके बजट, आयोजन स्थल, निगम की भूमिका, महापौर की जानकारी और राजनीतिक अतिथि को लेकर भी खड़ा हो गया है।
नगर निगम ने साइंस कॉलेज मैदान में पहली बार अपने स्तर पर दशहरा उत्सव कराने की तैयारी शुरू की है। इसके लिए करीब 20 लाख रुपये की निविदा जारी की गई है। निविदा में टेंट, मंच एवं बैठक व्यवस्था के लिए 9.96 लाख रुपये, आतिशबाजी के लिए 4 लाख रुपये और लाइट-साउंड के लिए 6 लाख रुपये का प्रावधान बताया गया है।


यानी तीन मदों में कुल 19.96 लाख रुपये खर्च करने की तैयारी है। इसी को लेकर जिला कांग्रेस कमेटी ने शुक्रवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर नगर निगम और सत्ता पक्ष पर सवालों की बौछार कर दी।


सवाल नंबर-1: क्या नगर निगम साइंस कॉलेज में दशहरा मनाने जा रहा है?
यही कांग्रेस का पहला और सबसे बड़ा सवाल है।
शहर कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष सुधांशु मिश्रा, पूर्व महापौर रामशरण यादव और शहर कांग्रेस कमेटी के पूर्व अध्यक्ष विजय पांडे ने प्रेस वार्ता में कहा कि तीन दिन पहले एक दैनिक समाचार पत्र में नगर निगम की निविदा प्रकाशित हुई।
कांग्रेस नेताओं के मुताबिक निविदा में साइंस कॉलेज मैदान में दशहरा आयोजन के लिए अलग-अलग मदों में राशि तय की गई है।
अब सवाल यह है कि जब नगर निगम का दशहरा आयोजन परंपरागत रूप से पुलिस ग्राउंड में होता रहा है, तो साइंस कॉलेज मैदान में अलग से निगम का आयोजन क्यों?


सवाल नंबर-2: महापौर को जानकारी नहीं तो फिर किसके निर्देश पर निकला 20 लाख का टेंडर?
यह सवाल कांग्रेस ने सीधे नगर निगम की कार्यप्रणाली पर उठाया है।
कांग्रेस नेताओं ने दावा किया कि नगर निगम की महापौर पूजा विधानी ने सार्वजनिक रूप से कहा है कि उन्हें साइंस कॉलेज मैदान में निगम द्वारा दशहरा आयोजन की जानकारी नहीं है। महापौर के अनुसार निगम का दशहरा आयोजन पारंपरिक रूप से पुलिस ग्राउंड में होता रहा है।


यहीं से सवाल और गंभीर हो जाता है—
अगर महापौर को जानकारी नहीं थी तो करीब 20 लाख रुपये की निविदा किस स्तर पर जारी हुई?
क्या इसके लिए एमआईसी की मंजूरी ली गई?
क्या नगर निगम की बैठक में इस आयोजन का प्रस्ताव रखा गया?
अगर प्रस्ताव पास हुआ है तो उसकी जानकारी सार्वजनिक क्यों नहीं की गई?
और अगर प्रस्ताव ही नहीं हुआ तो निविदा किस आधार पर निकली?
कांग्रेस ने इन्हीं सवालों पर नगर निगम से जवाब मांगा है।
सवाल नंबर-3: एक निगम, दो मैदान और दो रावण क्यों?
बिलासपुर में अब दशहरा आयोजन को लेकर सबसे ज्यादा चर्चा इसी बात की है।
एक तरफ पुलिस ग्राउंड, जहां नगर निगम का पारंपरिक दशहरा आयोजन होता रहा है।
दूसरी तरफ साइंस कॉलेज मैदान, जहां इस बार पहली बार नगर निगम अपने स्तर पर दशहरा उत्सव कराने की तैयारी कर रहा है।
यानी इस बार शहर में निगम के स्तर पर दो अलग-अलग मैदानों में दशहरा आयोजन की तस्वीर सामने आ रही है।
कांग्रेस का सवाल है—
जब एक ही नगर निगम है तो दो जगह निगम का आयोजन क्यों?
अगर पुलिस ग्राउंड में दशहरा हो रहा है तो साइंस कॉलेज में अलग आयोजन की जरूरत क्या है?
और अगर साइंस कॉलेज में अलग आयोजन जरूरी है तो शहर के दूसरे क्षेत्रों—सकरी, तिफरा और अन्य इलाकों में नगर निगम की क्या भूमिका होगी?
सवाल नंबर-4: 80 फीट का रावण और लाखों का खर्च—कांग्रेस बोली, “क्या सोने का रावण जलाएंगे?”
साइंस कॉलेज मैदान में इस बार करीब 80 फीट ऊंचे रावण के पुतले की तैयारी की जा रही है।
आयोजन को भव्य बनाने के लिए झांकी, पंडाल, आतिशबाजी, लाइट-साउंड और दर्शकों के बैठने की व्यवस्था की योजना है।
लेकिन कांग्रेस ने सबसे ज्यादा सवाल खर्च को लेकर उठाया है।
कांग्रेस नेताओं ने कहा कि सामान्य तौर पर 50-60 हजार रुपये में अच्छा-खासा रावण का पुतला तैयार हो सकता है।
ऐसे में सवाल उठाते हुए उन्होंने पूछा—
जब रावण के पुतले पर 6 लाख रुपये का प्रावधान है तो आखिर इतनी बड़ी राशि किस आधार पर तय की गई?
प्रेस वार्ता में कांग्रेस नेताओं ने तंज कसते हुए पूछा—
“क्या नगर निगम इस बार सोने का रावण जलाने जा रहा है?”
यह कांग्रेस का राजनीतिक आरोप और सवाल है। इसका जवाब अब नगर निगम की ओर से आना बाकी है।
सवाल नंबर-5: त्योहार का सरकारीकरण क्यों?
कांग्रेस ने पूरे आयोजन को सिर्फ खर्च का मामला नहीं बताया, बल्कि इसे त्योहारों के सरकारीकरण से जोड़ते हुए सवाल उठाया।
कांग्रेस नेताओं का कहना है कि दशहरा धार्मिक और सामाजिक उत्सव है। वर्षों से अलग-अलग समितियां और नागरिक संगठन अपने स्तर पर आयोजन करते रहे हैं।
ऐसे में नगर निगम को लाखों रुपये खर्च कर आयोजन अपने हाथ में लेने की जरूरत क्यों पड़ी?
कांग्रेस का कहना है कि यदि आयोजन करना ही है तो पारदर्शी तरीके से किया जाए और सार्वजनिक धन के इस्तेमाल का पूरा हिसाब जनता के सामने रखा जाए।


सवाल नंबर-6: साइंस कॉलेज ही क्यों?
प्रेस कॉन्फ्रेंस में कांग्रेस ने आयोजन स्थल पर भी सवाल उठाए।
नेताओं ने पूछा कि साइंस कॉलेज मैदान को ही नगर निगम के दशहरा आयोजन के लिए क्यों चुना गया?
जबकि शहर में—
लाल बहादुर शास्त्री मैदान, बस स्टैंड, रेलवे इंस्टिट्यूट, मुंगेली नाका और वसंत विहार जैसे अन्य स्थान भी हैं।
कांग्रेस ने पूछा—
इन जगहों पर दशहरा कौन कराएगा?
क्या नगर निगम वहां भी आयोजन करेगा?
अगर नहीं, तो साइंस कॉलेज के लिए अलग व्यवस्था क्यों?
सवाल नंबर-7: जिस मैदान में सालों से समिति रावण जलाती रही, वहां निगम ने खुद कमान क्यों संभाली?
साइंस कॉलेज मैदान में दशहरा आयोजन नया नहीं है।
यहां लंबे समय से अरपांचल दशहरा उत्सव समिति की ओर से आयोजन किया जाता रहा है।
लेकिन पिछले वर्ष यहां आयोजन को लेकर दो समितियों के बीच विवाद सामने आया था। विवाद बढ़ने के बाद मामला प्रशासनिक स्तर तक पहुंचा और मुख्यमंत्री तक भी इसकी शिकायत पहुंचने की बात सामने आई थी।
इसके बाद इस वर्ष नगर निगम ने खुद आयोजन की जिम्मेदारी संभालने का निर्णय लिया है।
निगम की ओर से इसे विवाद से बचने और आयोजन को व्यवस्थित तरीके से कराने की कवायद के तौर पर देखा जा रहा है।
लेकिन कांग्रेस का सवाल है—
क्या स्थानीय समिति से चर्चा की गई?
क्या उनसे सहमति ली गई?
क्या आयोजन को लेकर कोई औपचारिक संवाद हुआ?
सवाल नंबर-8: रामसेतु के सौंदर्याकरण के 2.62 करोड़ कहां हैं?
कांग्रेस ने दशहरा आयोजन को शहर के दूसरे विकास कार्यों से भी जोड़ दिया है।
प्रेस वार्ता में रामसेतु के सौंदर्याकरण के लिए स्वीकृत 2.62 करोड़ रुपये का मुद्दा उठाया गया।
कांग्रेस का कहना है कि रामसेतु के सौंदर्याकरण के लिए करोड़ों रुपये की स्वीकृति के बावजूद काम की प्रगति को लेकर सवाल हैं, जबकि दशहरा आयोजन के लिए करीब 20 लाख रुपये की निविदा प्रक्रिया तेजी से आगे बढ़ रही है।
कांग्रेस ने पूछा—
स्थायी विकास कार्यों पर खर्च की जरूरत और त्योहार के कुछ घंटों के आयोजन पर लाखों रुपये खर्च करने की प्राथमिकता क्या होनी चाहिए?
कांग्रेस ने कहा कि यदि निगम के पास राशि उपलब्ध है तो सड़क, नाली, बिजली और अन्य बुनियादी सुविधाओं पर खर्च किया जाना चाहिए।
हालांकि, रामसेतु सौंदर्याकरण और दशहरा आयोजन अलग-अलग मद और प्रकृति के कार्य हैं। इनकी प्रशासनिक स्वीकृति और खर्च का अंतिम आकलन संबंधित दस्तावेजों के आधार पर ही किया जा सकता है।
सवाल नंबर-9: कांग्रेस बोली—हम चंदा करके कर देंगे रावण दहन
प्रेस कॉन्फ्रेंस में कांग्रेस नेताओं ने कहा कि उन्हें दशहरा आयोजन से आपत्ति नहीं है।
उनका कहना है कि यदि कोई समिति या संस्था आयोजन करना चाहती है तो उसे जिम्मेदारी दी जाए। कांग्रेस कार्यकर्ताओं से चंदा लेकर और अपनी जेब से भी आयोजन का खर्च उठाने की बात कांग्रेस नेताओं ने कही।
उनका कहना था कि विवाद रावण दहन से नहीं बल्कि जनता के पैसे के इस्तेमाल से है।


कांग्रेस का कहना है—
जनता के पैसे का इस्तेमाल हो रहा है तो जनता को यह जानने का अधिकार है कि पैसा कहां और किस आधार पर खर्च किया जा रहा है।

सबसे बड़ा राजनीतिक सवाल… रावण का दहन कौन करेगा?
दशहरा आयोजन की तैयारियों के बीच अब शहर में एक और चर्चा तेज है।
साइंस कॉलेज मैदान में रावण दहन का मुख्य अतिथि कौन होगा?
राजनीतिक हलकों में बिलासपुर विधायक अमर अग्रवाल के नाम की चर्चा है। वहीं बेलतरा विधायक सुशांत शुक्ला के नाम को लेकर भी अटकलें शुरू हो गई हैं।
कांग्रेस नेताओं ने दावा किया कि एमआईसी के प्रस्ताव में नगर निगम के रावण दहन को बिलासपुर विधायक से जोड़कर देखा जा रहा है।
हालांकि, मुख्य अतिथि को लेकर आधिकारिक घोषणा होने तक इन चर्चाओं को अटकल ही माना जाएगा।
निगम की तैयारी क्या है?
नगर निगम ने साइंस कॉलेज मैदान में आयोजन को बड़े स्तर पर कराने की तैयारी शुरू कर दी है।
प्रस्तावित व्यवस्था में—
करीब 80 फीट ऊंचा रावण का पुतला
टेंट और मंच
दर्शकों के बैठने की व्यवस्था
आकर्षक झांकी
लाइट और साउंड
आतिशबाजी
सफाई व्यवस्था
बिजली व्यवस्था
यातायात प्रबंधन
सुरक्षा और भीड़ नियंत्रण
जैसी व्यवस्थाएं शामिल हैं।
अधिकारियों को अलग-अलग जिम्मेदारियां सौंपने के लिए टीम गठित किए जाने की तैयारी है।
अब गेंद नगर निगम के पाले में
कांग्रेस की प्रेस वार्ता के बाद साइंस कॉलेज का रावण सिर्फ दशहरा आयोजन नहीं रह गया है। इसके साथ 20 लाख रुपये की निविदा, एमआईसी की मंजूरी, महापौर की जानकारी, दो मैदानों में निगम के आयोजन, स्थानीय समितियों की भूमिका, 80 फीट के रावण की लागत और रामसेतु के 2.62 करोड़ रुपये के सौंदर्याकरण जैसे कई सवाल जुड़ गए हैं।
अब नजर नगर निगम और सत्ता पक्ष के जवाब पर है।
क्या साइंस कॉलेज मैदान में आयोजन के लिए विधिवत एमआईसी की मंजूरी ली गई?
क्या महापौर को इसकी जानकारी नहीं थी?
करीब 20 लाख रुपये के खर्च का आधार क्या है?
पुलिस ग्राउंड के साथ दूसरे मैदान में निगम का अलग आयोजन क्यों?
स्थानीय दशहरा समितियों से क्या चर्चा हुई?
और सबसे अहम—
साइंस कॉलेज मैदान में रावण दहन के मंच पर आखिर मुख्य अतिथि कौन होगा?
इन सवालों के जवाब आने के बाद ही साफ होगा कि साइंस कॉलेज का यह दशहरा केवल एक उत्सव है या बिलासपुर की राजनीति में एक नया सियासी मुद्दा भी बनने जा रहा है।

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