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लिव-इन का प्यार या मौत का राज? एक घर में युवती की लाश, दूसरे में सेप्टिक टैंक से निकला शव

Mohammed Israil
Mohammed Israil  - Editor
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लिव-इन रिश्ते के दो चेहरे, दुर्ग में युवती की मौत पर सवाल, कोरबा में सेप्टिक टैंक से शव मिलने के बाद पार्टनर गिरफ्तार

रायपुर, बिलासपुर।छत्तीसगढ़ में लिव-इन रिश्तों से जुड़े दो मामलों ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। दुर्ग में 26 साल की अंजलि घोड़ेस्वर की मौत के बाद परिवार आत्महत्या की कहानी पर सवाल उठा रहा है, जबकि कोरबा में लिव-इन पार्टनर संतोषी की मौत के बाद उसका शव सेप्टिक टैंक से बरामद हुआ और पुलिस ने उसके साथी मनोज उरांव को गिरफ्तार कर लिया। एक मामले में मौत की गुत्थी पोस्टमॉर्टम और जांच रिपोर्ट से सुलझेगी, तो दूसरे में पुलिस पूछताछ के आधार पर हत्या और शव छिपाने का घटनाक्रम सामने आया है। दोनों मामलों में रिश्ते, भरोसा और मौत के बाद सामने आईं परिस्थितियां जांच के केंद्र में हैं।
**दुर्ग में ‘दिल्ली’ की कहानी के पीछे छिपा था दूसरा सच?
दुर्ग के शंकर नगर में 27 सितंबर को CISF जवान करण सिंह के किराए के मकान से 26 वर्षीय अंजलि घोड़ेस्वर की लाश मिलने के बाद मामला अब कई सवालों के बीच पहुंच गया है।
उपलब्ध जानकारी के अनुसार करण का कहना है कि अंजलि ने फांसी लगाकर आत्महत्या की थी। उसका दावा है कि उसने अंजलि को फंदे से नीचे उतारा और उसके बाद शव को अपनी गोद में रख लिया था। घटना की जानकारी भी करण ने ही अंजलि के परिजनों को दी।
लेकिन कहानी का दूसरा हिस्सा अंजलि के परिवार के सामने आने के बाद शुरू होता है।
8 सितंबर को कहा था- दिल्ली जा रही हूं
अंजलि महाराष्ट्र के कल्याण की रहने वाली थी। परिवार के मुताबिक 8 सितंबर को वह पुलिस की नौकरी की तैयारी करने के लिए दिल्ली जाने की बात कहकर घर से निकली थी।
परिजनों को लगातार यही भरोसा रहा कि अंजलि दिल्ली में है। वह परिवार को दिल्ली की कोचिंग क्लास से जुड़ी तस्वीरें भी भेजती रही।
यानी परिवार की नजर में अंजलि दिल्ली में प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रही थी।
लेकिन मौत की सूचना के बाद जो जानकारी सामने आई, उसने परिवार को हैरान कर दिया।
अंजलि दिल्ली में नहीं बल्कि दुर्ग में CISF जवान करण सिंह के साथ रह रही थी।
सोशल मीडिया से शुरू हुई दोस्ती, फिर लिव-इन तक पहुंचा रिश्ता
करण सिंह मूल रूप से पंजाब का रहने वाला बताया जा रहा है और उसकी पोस्टिंग भिलाई में है।
अंजलि और करण की पहचान करीब दो साल पहले सोशल मीडिया के जरिए हुई थी। धीरे-धीरे दोनों के बीच नजदीकी बढ़ी और बाद में दोनों लिव-इन रिलेशनशिप में रहने लगे।
परिवार को इस रिश्ते की जानकारी किस हद तक थी और अंजलि ने दिल्ली में होने की तस्वीरें क्यों भेजीं—ये सवाल अब जांच का हिस्सा हैं।
परिवार को तस्वीरों में दिखी कहानी पर भरोसा नहीं
अंजलि की मौत के बाद परिवार ने संदेह जताया है। परिजनों का कहना है कि सामने आई तस्वीरों को देखने के बाद उन्हें घटना आत्महत्या जैसी नहीं लग रही।
हालांकि, यह परिवार का संदेह है। मौत का वास्तविक कारण पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट, घटनास्थल की जांच और अन्य फोरेंसिक साक्ष्यों से स्पष्ट होगा।
परिजन अंजलि का शव लेने भिलाई पहुंचे हैं। पोस्टमॉर्टम के बाद शव उन्हें सौंपे जाने की प्रक्रिया होगी।
अब जांच के घेरे में ये सवाल
अंजलि दिल्ली जाने की बात कहकर दुर्ग कैसे पहुंची?
परिवार को दिल्ली की कोचिंग की तस्वीरें क्यों भेजती रही?
करण और अंजलि के बीच पिछले दिनों संबंध कैसे थे?
मौत से पहले दोनों के बीच कोई विवाद हुआ था या नहीं?
घटनास्थल पर फंदे और शव की स्थिति क्या थी?
करण के बयान की पुष्टि घटनास्थल और फोरेंसिक साक्ष्य करते हैं या नहीं?
पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट मौत को आत्महत्या बताती है या कोई दूसरी परिस्थिति सामने आती है?
इन सवालों का जवाब जांच पूरी होने के बाद ही मिल सकेगा।
अब कहानी कोरबा की… जहां ‘लापता’ महिला की लाश घर के सेप्टिक टैंक में मिली
दुर्ग की घटना जहां अभी जांच के सवालों में है, वहीं कोरबा के श्यांग थाना क्षेत्र में सामने आया मामला इससे कहीं आगे जा चुका है।
बरपाली गांव में करीब दो साल से मनोज उरांव के साथ लिव-इन में रह रही 33 वर्षीय संतोषी का शव उसी घर के पीछे बने सेप्टिक टैंक से मिला।
पुलिस ने मामले में मनोज उरांव को अंबिकापुर से गिरफ्तार किया है।
रक्षाबंधन पर मायके नहीं पहुंची संतोषी, यहीं से शुरू हुआ शक
संतोषी रक्षाबंधन पर अपने मायके जाकर भाइयों को राखी बांधती थी। लेकिन इस बार वह मायके नहीं पहुंची।
परिजनों ने जब उसके बारे में मनोज से पूछा तो उन्हें बताया गया कि संतोषी घर से चली गई है।
कई दिन तक उसका कोई पता नहीं चला।
इसके बाद परिजनों ने उसकी तलाश शुरू की।
घर के पीछे से आ रही थी तेज बदबू
19 सितंबर को संतोषी के भाई रामभरोस सहित अन्य परिजन मनोज के घर पहुंचे।
घर के पीछे बने सेप्टिक टैंक का ढक्कन आधा खुला था और वहां से तेज दुर्गंध आ रही थी।
संदेह बढ़ा तो पुलिस को सूचना दी गई।
कार्यपालिक मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में सेप्टिक टैंक खुलवाया गया।
अंदर से सड़ा-गला शव बरामद हुआ।
शव की पहचान संतोषी के रूप में की गई। मौके पर फोरेंसिक टीम को भी बुलाया गया था।
विवाद, मारपीट और फिर शव छिपाने का आरोप
पुलिस की जांच में सामने आए घटनाक्रम के मुताबिक 27 अगस्त को मनोज और संतोषी के बीच विवाद हुआ था।
रिपोर्टों में विवाद के पीछे शराब पीने और संतोषी के बार-बार घर से बाहर चले जाने को लेकर होने वाले झगड़े का उल्लेख है। पुलिस के अनुसार विवाद के दौरान मनोज ने संतोषी के साथ मारपीट की।
इसके बाद संतोषी की मौत हो गई।
आरोप है कि मौत के बाद मनोज ने शव को घर के पीछे बने सेप्टिक टैंक में डाल दिया और वहां से फरार हो गया।
करीब एक महीने तक घर में छिपा रहा राज
घटना के बाद संतोषी के परिजन उसे तलाशते रहे।
मनोज की ओर से कथित तौर पर यह बताया गया कि संतोषी घर से चली गई है।
लेकिन जब संतोषी लंबे समय तक वापस नहीं आई और परिजनों ने दोबारा घर पहुंचकर तलाश की, तो सेप्टिक टैंक से आती बदबू ने पूरे मामले की दिशा बदल दी।
यहीं से पुलिस को हत्या और शव छिपाने के एंगल पर जांच आगे बढ़ानी पड़ी।
अंबिकापुर से पकड़ा गया मनोज
घटना के बाद मनोज फरार था। पुलिस ने उसकी तलाश शुरू की और उसे अंबिकापुर से गिरफ्तार किया।
पुलिस पूछताछ में उसके और संतोषी के बीच विवाद तथा घटना के बाद शव छिपाने से जुड़ी जानकारी सामने आने की बात कही गई है।
अब पुलिस की जांच में पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट, फोरेंसिक साक्ष्य और आरोपी के बयान अहम होंगे।
दो केस, एक सवाल—रिश्ते के पीछे छिपी सच्चाई क्या थी?
दुर्ग और कोरबा की दोनों घटनाओं को सिर्फ इसलिए एक जैसा नहीं माना जा सकता कि दोनों में लिव-इन रिलेशनशिप सामने आया है।
दुर्ग में अभी मौत की परिस्थितियों को लेकर सवाल हैं। CISF जवान करण सिंह का बयान आत्महत्या का है, जबकि अंजलि के परिजनों ने संदेह जताया है। पुलिस जांच और पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट निर्णायक होंगे।
कोरबा में पुलिस ने लिव-इन पार्टनर मनोज उरांव को गिरफ्तार किया है और उसके खिलाफ हत्या तथा शव छिपाने के आरोपों की जांच आगे बढ़ रही है।
इन दोनों मामलों में अंतिम निष्कर्ष जांच और न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर ही तय होगा।
दुर्ग में इंतजार है पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट का…
कोरबा में पुलिस के हाथ आरोपी तक पहुंच चुके हैं…
अब दोनों मामलों में अगला बड़ा खुलासा पुलिस जांच और मेडिकल-फोरेंसिक साक्ष्यों से होगा।

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