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अब घर बैठे 1-क्लिक में जमीन का सीमांकन, तहसील दफ्तरों के चक्कर खत्म करने का छत्तीसगढ़ सरकार का नया दावा

Mohammed Israil
Mohammed Israil  - Editor
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लोक सेवा केंद्र, सेवा सेतु और मोबाइल से ऑनलाइन आवेदन की सुविधा; आवेदन से लेकर जांच और प्रगति तक पूरी प्रक्रिया डिजिटल करने का दावा
रायपुर, 29 सितंबर 2026। छत्तीसगढ़ सरकार ने जमीन के सीमांकन से जुड़ी वर्षों पुरानी दफ्तर-केंद्रित प्रक्रिया को डिजिटल बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाने का दावा किया है। राज्य के राजस्व एवं भू-अभिलेख विभाग के अनुसार, जमीन के सीमांकन संबंधी प्रकरणों के त्वरित और सहज निपटारे के लिए नया ऑनलाइन पोर्टल विकसित कर लागू कर दिया गया है। सरकार का कहना है कि नई व्यवस्था लागू होने के बाद नागरिकों को अपनी जमीन की नाप-जोख या सीमांकन कराने के लिए बार-बार तहसील कार्यालय के चक्कर लगाने की जरूरत नहीं होगी।
अब आवेदक घर बैठे मोबाइल से, अथवा नजदीकी लोक सेवा केंद्र, सेवा सेतु या राजस्व विभाग के सिटीजन पोर्टल के माध्यम से सीमांकन के लिए ऑनलाइन आवेदन प्रस्तुत कर सकेंगे। सरकार के मुताबिक, इसका उद्देश्य सीमांकन की प्रक्रिया को आसान बनाने के साथ-साथ उसे अधिक पारदर्शी, समयबद्ध और भ्रष्टाचार-मुक्त बनाना है।
पुरानी व्यवस्था में आवेदन से लेकर स्थिति जानने तक दफ्तरों पर निर्भरता
राज्य सरकार के अनुसार, पुरानी व्यवस्था में जमीन का सीमांकन कराने के लिए आवेदक को स्वयं तहसील कार्यालय पहुंचकर आवेदन जमा करना पड़ता था। आवेदन जमा करने के बाद भी प्रक्रिया की स्थिति जानने के लिए लोगों को कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ते थे।
कई मामलों में आवेदक को यह स्पष्ट जानकारी नहीं मिल पाती थी कि उसका आवेदन किस स्तर पर है, फाइल कहां लंबित है, कार्रवाई में देरी किस वजह से हो रही है या प्रकरण के निपटारे में अभी कितना समय लगेगा। इसके चलते लोगों को हफ्तों और कई बार महीनों तक कार्यालयों के चक्कर लगाने की स्थिति बनती थी।
सरकार का दावा है कि नई ऑनलाइन व्यवस्था इसी दफ्तर-केंद्रित प्रक्रिया को बदलने के लिए लाई गई है।
एक क्लिक से ऑनलाइन आवेदन, सीधे तहसीलदार की लॉगिन में पहुंचेगा प्रकरण
नई व्यवस्था में नागरिक अपनी सुविधा के अनुसार ऑनलाइन आवेदन कर सकेगा। आवेदन लोक सेवा केंद्र, सेवा सेतु अथवा राजस्व विभाग के सिटीजन पोर्टल के माध्यम से जमा किया जा सकेगा।
ऑनलाइन फॉर्म जमा होते ही आवेदन संबंधित क्षेत्र के तहसीलदार की लॉगिन आईडी में पहुंच जाएगा। इसके बाद निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार प्रकरण पर आगे की कार्रवाई शुरू होगी।
इससे आवेदन जमा करने के लिए आवेदक को तहसील कार्यालय जाकर भौतिक रूप से फाइल प्रस्तुत करने की आवश्यकता नहीं होगी।
राजस्व निरीक्षक की जांच रिपोर्ट भी होगी ऑनलाइन
नई डिजिटल व्यवस्था सिर्फ आवेदन तक सीमित नहीं रहेगी। सरकार के अनुसार, सीमांकन प्रक्रिया के तहत संबंधित जमीन की जांच और मौका मुआयना किए जाने के बाद राजस्व निरीक्षक (RI) अपनी जांच रिपोर्ट भी ऑनलाइन प्रस्तुत करेंगे।
यानी आवेदन से लेकर संबंधित अधिकारी की जांच रिपोर्ट तक प्रक्रिया को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर लाने का दावा किया गया है। इससे फाइल की आवाजाही और कार्रवाई की स्थिति ऑनलाइन दर्ज रहेगी।
घर बैठे देख सकेंगे फाइल कहां पहुंची
नए पोर्टल की प्रमुख विशेषताओं में आवेदन की अद्यतन स्थिति और प्रकरण की प्रगति ऑनलाइन देखने की सुविधा शामिल है।
सरकार के अनुसार, आवेदक घर बैठे यह देख सकेंगे कि उनके आवेदन पर क्या कार्रवाई हुई है, प्रकरण किस स्तर पर है और फाइल लंबित होने की स्थिति में उसके पीछे क्या कारण है। संबंधित अधिकारियों की ओर से की गई कार्रवाई की जानकारी भी पोर्टल पर उपलब्ध होने का दावा किया गया है।
इस व्यवस्था से आवेदक को बार-बार कार्यालय जाकर केवल फाइल की स्थिति पूछने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
आपत्ति नहीं तो कार्यालय आने की जरूरत नहीं
नई व्यवस्था में सबसे महत्वपूर्ण बदलाव उन मामलों में बताया गया है, जहां सीमांकन के दौरान किसी पक्ष की ओर से कोई आपत्ति दर्ज नहीं की जाती।
सरकार के अनुसार, यदि सीमांकन प्रक्रिया के दौरान किसी भी पक्ष की ओर से आपत्ति नहीं आती है, तो आवेदक को तहसील कार्यालय में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने की आवश्यकता नहीं होगी।
हालांकि, यदि सीमांकन के दौरान किसी पक्ष की ओर से आपत्ति या जमीन से संबंधित विवाद सामने आता है, तो संबंधित पक्षों को आमने-सामने की कार्रवाई के लिए बुलाया जाएगा।
यानी निर्विवाद मामलों में पूरी प्रक्रिया को अधिकतम डिजिटल माध्यम से पूरा करने और विवादित मामलों में आवश्यक मानवीय हस्तक्षेप बनाए रखने की व्यवस्था की गई है।
पारदर्शिता और जवाबदेही पर सरकार का जोर
छत्तीसगढ़ सरकार इस नई व्यवस्था को राजस्व सेवाओं में पारदर्शिता बढ़ाने और नागरिकों को सुविधा देने से जोड़ रही है। सरकार का कहना है कि आवेदन की स्थिति, प्रकरण की प्रगति, लंबित रहने के कारण और अधिकारियों की कार्रवाई ऑनलाइन उपलब्ध होने से प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ेगी।
साथ ही, डिजिटल ट्रैकिंग के माध्यम से प्रकरणों के समय-सीमा में निपटारे की दिशा में भी मदद मिलने का दावा किया गया है।
सरकार के अनुसार, नई व्यवस्था का व्यापक उद्देश्य यह है कि नागरिक को अपनी ही जमीन के सीमांकन जैसे जरूरी राजस्व कार्य के लिए अनावश्यक रूप से सरकारी कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें।
नई व्यवस्था में क्या बदला?
जमीन के सीमांकन के लिए ऑनलाइन आवेदन की सुविधा।
घर बैठे मोबाइल से आवेदन करने की व्यवस्था।
लोक सेवा केंद्र के माध्यम से आवेदन की सुविधा।
सेवा सेतु से ऑनलाइन आवेदन का विकल्प।
राजस्व विभाग के सिटीजन पोर्टल से आवेदन।
आवेदन सीधे संबंधित तहसीलदार की लॉगिन में पहुंचेगा।
सीमांकन की जांच और मौका मुआयना की प्रक्रिया निर्धारित तरीके से होगी।
राजस्व निरीक्षक अपनी जांच रिपोर्ट ऑनलाइन प्रस्तुत करेंगे।
आवेदक आवेदन की अद्यतन स्थिति ऑनलाइन देख सकेगा।
प्रकरण की प्रगति की जानकारी उपलब्ध होगी।
फाइल लंबित होने का कारण देखने की सुविधा का दावा।
अधिकारियों की ओर से की गई कार्रवाई की जानकारी भी ऑनलाइन मिलेगी।
आपत्ति नहीं होने पर आवेदक को तहसील कार्यालय में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने की जरूरत नहीं होगी।
आपत्ति या जमीन संबंधी विवाद होने पर संबंधित पक्षों को आमने-सामने की कार्रवाई के लिए बुलाया जाएगा।
सरकार का दावा—दफ्तरों के चक्कर से डिजिटल ट्रैकिंग तक
छत्तीसगढ़ सरकार के अनुसार, जमीन के सीमांकन की नई ऑनलाइन व्यवस्था राजस्व सेवाओं को नागरिक-केंद्रित बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण बदलाव है। जहां पुरानी व्यवस्था में आवेदन, फाइल की स्थिति और कार्रवाई की जानकारी के लिए कार्यालय पर निर्भरता रहती थी, वहीं नई व्यवस्था में आवेदन से लेकर प्रकरण की प्रगति तक डिजिटल माध्यम से जानकारी उपलब्ध कराने का दावा किया गया है।
सरकार इसे सुगम, पारदर्शी और भ्रष्टाचार-मुक्त राजस्व सेवा व्यवस्था की दिशा में उठाया गया कदम बता रही है। नई व्यवस्था के प्रभाव का वास्तविक आकलन इसके संचालन के बाद लंबित प्रकरणों के निपटारे, समय-सीमा और नागरिकों को मिलने वाली सुविधाओं के आधार पर किया जा सकेगा।

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