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सफेद कोट के साथ शुरू हुआ डॉक्टर बनने का सफर… सिम्स बिलासपुर में MBBS बैच-2026 का भव्य व्हाइट कोट सेरेमनी, सेवा-संवेदना और नैतिकता की दिलाई शपथ

Mohammed Israil
Mohammed Israil  - Editor
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इंडक्शन डे में नवप्रवेशित मेडिकल छात्रों को चिकित्सा पेशे की गरिमा का संकल्प; अधिष्ठाता डॉ. रमणेश मूर्ति बोले—ईमानदारी, अनुशासन और सेवा भाव को बनाएं जीवन का आधार
बिलासपुर, 28 सितंबर 2026। छत्तीसगढ़ आयुर्विज्ञान संस्थान (सिम्स), बिलासपुर में सोमवार को चिकित्सा शिक्षा के नए अध्याय की भावनात्मक और गरिमामय शुरुआत हुई। संस्थान में नवप्रवेशित MBBS बैच-2026 के छात्र-छात्राओं के लिए व्हाइट कोट सेरेमनी एवं इंडक्शन डे का भव्य आयोजन किया गया। इस दौरान मेडिकल शिक्षा की दुनिया में कदम रखने वाले विद्यार्थियों को उनके शिक्षकों और विभागाध्यक्षों ने अपने हाथों से सफेद कोट पहनाया। इसके साथ ही उन्हें चिकित्सा पेशे की गरिमा, नैतिकता और मरीजों के प्रति मानवीय संवेदना को सर्वोच्च प्राथमिकता देने का संकल्प दिलाया गया।
कार्यक्रम में नवप्रवेशित विद्यार्थियों के साथ उनके अभिभावक भी मौजूद रहे। बच्चों को डॉक्टर बनने की दिशा में पहला औपचारिक कदम बढ़ाते देख अभिभावकों के चेहरों पर गर्व और भावुकता साफ नजर आई। पूरे सभागार में उत्साह, उमंग और चिकित्सा सेवा के प्रति जिम्मेदारी का माहौल बना रहा।
मां सरस्वती के पूजन से हुई कार्यक्रम की शुरुआत
व्हाइट कोट सेरेमनी की शुरुआत मां सरस्वती की प्रतिमा पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्वलन के साथ हुई। इसके बाद डॉ. सागरिका प्रधान ने नवप्रवेशित विद्यार्थियों और उनके अभिभावकों का आत्मीय स्वागत किया। उन्होंने कार्यक्रम की रूपरेखा और उद्देश्य से सभी को अवगत कराया।
उन्होंने विद्यार्थियों के लिए आयोजित इस समारोह को मेडिकल शिक्षा के सफर में महत्वपूर्ण पड़ाव बताया।
अधिष्ठाता ने बताया सिम्स का गौरवशाली सफर
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि एवं सिम्स के अधिष्ठाता डॉ. रमणेश मूर्ति ने नवप्रवेशित विद्यार्थियों को मेडिकल शिक्षा के नए सफर के लिए शुभकामनाएं दीं। उन्होंने विद्यार्थियों के अभिभावकों को भी बधाई देते हुए कहा कि बच्चों का डॉक्टर बनने का सफर परिवार के सहयोग और विश्वास से ही आगे बढ़ता है।
अपने संबोधन में उन्होंने विद्यार्थियों को सिम्स के गौरवशाली इतिहास, संस्थान की शैक्षणिक उत्कृष्टता, आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं और भविष्य की योजनाओं के बारे में विस्तार से जानकारी दी।
उन्होंने चिकित्सा पेशे की जिम्मेदारियों पर विशेष जोर देते हुए विद्यार्थियों को ईमानदारी, अनुशासन और सेवा भाव को अपने व्यावसायिक जीवन का आधार बनाने के लिए प्रेरित किया।
जब शिक्षकों ने अपने हाथों से पहनाया सफेद कोट
कार्यक्रम का सबसे महत्वपूर्ण और भावनात्मक क्षण उस समय आया, जब अधिष्ठाता डॉ. रमणेश मूर्ति ने समस्त विभागाध्यक्षों के साथ मिलकर नवप्रवेशित MBBS विद्यार्थियों को अपने हाथों से व्हाइट कोट पहनाया।
सफेद कोट पहनने के साथ ही विद्यार्थियों ने औपचारिक रूप से चिकित्सा पेशे की जिम्मेदारियों और गरिमा को स्वीकार किया। इस दौरान उन्हें चिकित्सा सेवा के मूल्यों को आत्मसात करने की शपथ भी दिलाई गई।
यह क्षण विद्यार्थियों के लिए उनके मेडिकल करियर की औपचारिक शुरुआत का प्रतीक बना। सभागार में मौजूद अभिभावकों और शिक्षकों के बीच भी उत्साह और गर्व का वातावरण देखने को मिला।
‘व्हाइट कोट सिर्फ पोशाक नहीं, मरीज के भरोसे की जिम्मेदारी है’
कार्यक्रम में चिकित्सा अधीक्षक डॉ. लखन सिंह ने विद्यार्थियों को प्रेरणादायी संबोधन दिया। उन्होंने कहा कि व्हाइट कोट केवल एक परिधान नहीं है, बल्कि यह त्याग, समर्पण, करुणा और विश्वास का प्रतीक है।
उन्होंने विद्यार्थियों को समझाया कि सफेद कोट धारण करने के साथ ही मरीजों के प्रति उनकी मानवीय संवेदना और नैतिक जिम्मेदारी और अधिक बढ़ जाती है।
डॉ. लखन सिंह ने विद्यार्थियों से सफेद कोट की गरिमा को जीवनभर बनाए रखने का आह्वान किया। उन्होंने चिकित्सा शिक्षा को केवल डिग्री हासिल करने का माध्यम न मानकर मरीजों की सेवा और समाज के प्रति जिम्मेदारी से जोड़ने का संदेश दिया।
इंडक्शन डे ने दिया मेडिकल करियर का पहला संदेश
व्हाइट कोट सेरेमनी के साथ आयोजित इंडक्शन डे का उद्देश्य नए विद्यार्थियों को संस्थान, चिकित्सा शिक्षा की कार्यप्रणाली और डॉक्टर के रूप में उनकी भविष्य की जिम्मेदारियों से परिचित कराना भी रहा।
कार्यक्रम ने विद्यार्थियों को यह संदेश दिया कि मेडिकल कॉलेज में प्रवेश केवल एक शैक्षणिक उपलब्धि नहीं, बल्कि समाज के स्वास्थ्य और जीवन से जुड़ी बड़ी जिम्मेदारी की शुरुआत है।
डॉ. केशव कश्यप ने जताया आभार
कार्यक्रम का समापन मेडिकल एजुकेशन यूनिट के समन्वयक डॉ. केशव कश्यप के धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ। उन्होंने आयोजन को सफल बनाने में प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से सहयोग करने वाले सभी अधिकारियों, चिकित्सकों, शिक्षकों, कर्मचारियों, विद्यार्थियों और अभिभावकों के प्रति आभार व्यक्त किया।
ये रहे प्रमुख रूप से मौजूद
इस अवसर पर डॉ. भूपेन्द्र कश्यप, डॉ. मधुमिता मूर्ति, डॉ. हेमलता ठाकुर, डॉ. अर्चना सिंह, डॉ. संगीता रमन जोगी, डॉ. आरती पांडे, डॉ. शिक्षा जांगड़े, डॉ. समीर जैन, डॉ. साधना बागड़े, डॉ. श्रेया तोड़ी सहित सिम्स के समस्त विभागाध्यक्ष, वरिष्ठ चिकित्सा शिक्षक, नवप्रवेशित MBBS विद्यार्थी और बड़ी संख्या में उनके अभिभावक उपस्थित रहे।
एक कोट, हजारों उम्मीदें
सिम्स बिलासपुर का यह आयोजन सिर्फ नए MBBS विद्यार्थियों के स्वागत तक सीमित नहीं रहा। व्हाइट कोट पहनने का यह समारोह उन युवाओं के लिए चिकित्सा सेवा की जिम्मेदारी स्वीकार करने का पहला सार्वजनिक क्षण बना, जिनसे आने वाले वर्षों में मरीजों की जिंदगी, परिवारों की उम्मीद और समाज के स्वास्थ्य से जुड़े दायित्व निभाने की अपेक्षा होगी। यही वजह रही कि समारोह में कोट से ज्यादा उसके पीछे छिपी जिम्मेदारी, संवेदना और सेवा की भावना केंद्र में रही।

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