कोई छत मांग रहा था, कोई इंसाफ, कोई रोज़गार; हर आवेदन के पीछे संघर्ष की एक नई कहानी”
बाढ़, बेघरपन, डूबी फसल, टूटी सड़क, खराब ट्राइसाइकिल, मुआवजा, बिजली, शिक्षक, जमीन और रोजगार… बिलासपुर के जनदर्शन में उमड़ा समस्याओं का सैलाब






बिलासपुर। मंगलवार को बिलासपुर कलेक्टोरेट का दृश्य किसी सरकारी कार्यालय से अधिक उस जगह जैसा दिखाई दिया, जहां हर चेहरे के पीछे संघर्ष की अलग कहानी थी। यहां किसी हिंदी फिल्म का हाउसफुल शो नहीं चल रहा था, बल्कि ‘जनदर्द का हाउसफुल दरबार’ लगा था। लंबी कतारों में खड़े लोगों के हाथों में टिकट नहीं, आवेदन थे; चेहरे पर उत्साह नहीं, उम्मीद थी। कोई बाढ़ में उजड़ा घर बचाने की गुहार लेकर आया था, कोई डूबी हुई फसल का दर्द लेकर, कोई टूटी सड़क से परेशान था तो कोई दिव्यांग अपनी जिंदगी का सहारा बनी मोटराइज्ड साइकिल ठीक कराने के लिए भटक रहा था।
साप्ताहिक जनदर्शन में कलेक्टर संजय अग्रवाल के सामने शहर से लेकर दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों तक की समस्याएं एक-एक कर पहुंचती रहीं। कलेक्टर ने अधिकांश मामलों में मौके पर ही संबंधित अधिकारियों को जांच कर कार्रवाई के निर्देश दिए। जनदर्शन में नगर निगम आयुक्त प्रकाश कुमार सर्वे और जिला पंचायत सीईओ संदीप अग्रवाल भी मौजूद रहे।
जनदर्शन में सबसे ज्यादा दिखा बाढ़ का दर्द
इस बार जनदर्शन पर सबसे गहरी छाप बाढ़ प्रभावित परिवारों की रही। कोई मकान ढहने की पीड़ा लेकर पहुंचा तो कोई घर का पूरा सामान बह जाने के बाद राहत की उम्मीद में कलेक्टर कार्यालय पहुंचा।
दिव्यांग महिला की सबसे मार्मिक कहानी
सरकंडा के खमतराई की रहने वाली दिव्यांग महिला अपने पति के साथ जनदर्शन पहुंची। बाढ़ में उसका मकान रहने लायक नहीं बचा। खाने-पीने का सामान बह गया और तीन साल पहले समाज कल्याण विभाग से मिली मोटराइज्ड साइकिल भी खराब हो गई।
दंपती के अनुसार, कलेक्टर ने उन्हें समाज कल्याण विभाग भेजा, लेकिन वहां नियमों का हवाला देकर वापस लौटा दिया गया। इसके बाद दोनों फिर कलेक्टर के सामने पहुंचे। महिला ने बताया कि वह दिव्यांग होने के कारण पूरी तरह मोटराइज्ड साइकिल पर निर्भर है। उसकी बात सुनने के बाद कलेक्टर ने साइकिल की मरम्मत कराने का आश्वासन दिया।
बारिश ने छीनी छत, अब पीएम आवास की आस
शंकर नगर निवासी निशा प्रधान ने बताया कि तेज बारिश में उनका मकान पूरी तरह ढह गया। घर का सामान भी नष्ट हो गया और अब रहने के लिए दूसरा घर नहीं बचा। उन्होंने आर्थिक सहायता और प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत नया मकान दिलाने की मांग की।
किसानों का फूटा गुस्सा—’नाला पाटा, फसल डुबो दी’
जनदर्शन में ग्राम सेंदरी और कछार के किसानों का बड़ा समूह भी पहुंचा। किसानों ने आरोप लगाया कि प्राकृतिक बरसाती नाले को पाट देने और पानी की निकासी बाधित होने से खेत जलमग्न हो गए। धान की फसल पूरी तरह बर्बाद हो गई।
किसानों ने कहा कि पहले 20 से 25 फीट चौड़े नाले को संकरा कर पाइप डाल दिया गया, जिससे बरसात का पानी खेतों में भर गया। उन्होंने कब्जा हटाने, स्थायी जल निकासी और संबंधित लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।
दलदल बनी सड़क, बच्चों की सुरक्षा पर सवाल
ग्राम अमेरी के सतनाम नगर वार्ड-3 के रहवासी भी बड़ी संख्या में पहुंचे। उन्होंने बताया कि वर्षों से सड़क नहीं बनी है। बारिश में पूरा इलाका दलदल बन जाता है। स्कूल जाने वाले बच्चों को रोज इसी रास्ते से गुजरना पड़ता है। नाली और कचरा उठाव की समस्या ने हालात और खराब कर दिए हैं।
जली गृहस्थी का मुआवजा अब तक नहीं
बेलगहना तहसील के ग्राम बहरामुड़ा निवासी लक्ष्मण सिंह ने बताया कि जनवरी 2026 में शॉर्ट सर्किट से उनका मकान और पूरा घरेलू सामान जलकर राख हो गया था। आवेदन देने के बावजूद अब तक मुआवजा नहीं मिला।
दिव्यांग ने मांगा रोजगार, किसी ने ट्राइसाइकिल
ग्राम बाम्हू खैरा के दिव्यांग चंदन कुमार ने सरकारी तालाब में मत्स्य पालन की अनुमति मांगी। उनका कहना था कि वे अन्य काम करने में सक्षम नहीं हैं और मछली पालन से आत्मनिर्भर बनना चाहते हैं।
वहीं सरकंडा की बबीता यादव ने ट्राइसाइकिल उपलब्ध कराने की मांग रखी।
बिजली, शिक्षक और गाय तक की गुहार
मंगला की दीनदयाल कॉलोनी के लोगों ने बार-बार खराब हो रहे ट्रांसफार्मर की शिकायत की। धनगवां के स्कूल प्रबंधन समिति ने हाई स्कूल में लंबे समय से गणित शिक्षक नहीं होने का मुद्दा उठाया। अमेरी के रोहित कुमार ने मोपका गौशाला में बंद अपनी गाय वापस दिलाने की मांग की।
रेशम पालन के नाम पर सरकारी राशि के दुरुपयोग का आरोप
मस्तुरी क्षेत्र के ग्राम पंचायत दर्राभांठा के सरपंच ने आवेदन देकर शासकीय भूमि पर संचालित रेशम पालन परियोजना में सरकारी राशि के कथित दुरुपयोग की शिकायत की। आवेदन में कई वर्षों से अलग-अलग खातों के माध्यम से लाखों रुपये के दुरुपयोग का आरोप लगाया गया।
हर आवेदन के पीछे एक अलग संघर्ष
कलेक्टोरेट परिसर में मंगलवार को केवल आवेदन जमा नहीं हुए, बल्कि बाढ़, गरीबी, खेती, रोजगार, शिक्षा, बिजली, सड़क, आवास, दिव्यांगजन की समस्याएं, मुआवजा और प्रशासनिक शिकायतों की दर्जनों कहानियां एक साथ सामने आईं। शहर से लेकर गांव तक के लोग अपनी-अपनी उम्मीदों के साथ जनदर्शन पहुंचे, जहां हर आवेदन किसी परिवार, किसी किसान, किसी मजदूर, किसी दिव्यांग और किसी मोहल्ले के संघर्ष की कहानी बयां कर रहा था।



