बिलासपुर/नई दिल्ली। बिलासपुर स्थित अपोलो अस्पताल एक बार फिर राष्ट्रीय स्तर पर बहस के केंद्र में आ गया है। इस बार मामला सीधे केंद्र सरकार के आवासन एवं शहरी कार्य राज्य मंत्री तोखन साहू द्वारा केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जे.पी. नड्डा को भेजे गए डेमी ऑफिशियल (D.O.) पत्र से जुड़ा है। पत्र में अपोलो अस्पताल के संचालन, सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं के क्रियान्वयन और भूमि आवंटन की शर्तों के पालन को लेकर कई गंभीर सवाल उठाए गए हैं।

14 मार्च 2026 को भेजे गए पत्र (D.O. No. MoS/H&UA/VIP/BSP/2026/1157) में मंत्री ने स्पष्ट लिखा है कि अविभाजित मध्य प्रदेश शासन ने 21 नवंबर 1990 को साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (SECL) के माध्यम से लिंगियाडीह, सीपत रोड स्थित अपोलो अस्पताल को विशेष शर्तों के साथ भूमि आवंटित की थी, लेकिन जिस उद्देश्य के लिए यह भूमि दी गई थी, उसका पालन होता दिखाई नहीं दे रहा है।
यही नहीं, मंत्री ने पत्र के जरिए कई ऐसे मुद्दे उठाए हैं जो सीधे लाखों मरीजों, पूर्व सैनिकों और सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं के लाभार्थियों से जुड़े हैं।
भूमि आवंटन की शर्तों पर पहला बड़ा सवाल
पत्र में कहा गया है कि वर्ष 1990 में अस्पताल को विशेष शर्तों के साथ जमीन उपलब्ध कराई गई थी, लेकिन वर्तमान परिस्थितियों में यह प्रश्न खड़ा हो गया है कि क्या अस्पताल उस मूल उद्देश्य के अनुरूप सेवाएं दे रहा है, जिसके लिए सरकारी भूमि उपलब्ध कराई गई थी?
यही बिंदु पूरे मामले का सबसे महत्वपूर्ण पहलू माना जा रहा है।
ECHS को लेकर केंद्रीय मंत्री ने उठाई शिकायत
तोखन साहू ने पत्र में लिखा है कि उन्हें लगातार शिकायतें मिल रही हैं कि भूतपूर्व सैनिकों एवं उनके आश्रितों को Ex-Servicemen Contributory Health Scheme (ECHS) का लाभ अस्पताल में नहीं मिल पा रहा है।
यह मुद्दा इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि ECHS केंद्र सरकार की प्रमुख स्वास्थ्य योजनाओं में शामिल है और इसका लाभ देशभर के लाखों पूर्व सैनिकों को दिया जाता है।
2021 से भेजे जा रहे पत्र… फिर भी नहीं हुआ पंजीयन?
पत्र में एक और बड़ा दावा किया गया है।
तोखन साहू ने लिखा कि मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO), बिलासपुर द्वारा वर्ष 2021 से लगातार अपोलो अस्पताल को पत्र भेजे जाते रहे, जिनमें अस्पताल को निम्न योजनाओं के अंतर्गत पंजीयन कराने के लिए कहा गया—
आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना
डॉ. खूबचंद बघेल स्वास्थ्य सहायता योजना
मुख्यमंत्री विशेष सहायता योजना
लेकिन मंत्री के अनुसार अस्पताल प्रबंधन द्वारा इन निर्देशों का पालन किया जाना नहीं पाया गया।
सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिलने से मरीजों पर आर्थिक बोझ
पत्र में कहा गया है कि केंद्र और राज्य सरकार द्वारा संचालित स्वास्थ्य योजनाओं का लाभ मरीजों तक नहीं पहुंचने के कारण आम नागरिकों और उनके परिवारों को गंभीर आर्थिक और मानसिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
इसमें विशेष रूप से उल्लेख किया गया है कि—
आयुष्मान भारत योजना
डॉ. खूबचंद बघेल स्वास्थ्य योजना
मुख्यमंत्री विशेष सहायता योजना
का लाभ मरीजों को नहीं मिल पा रहा है।
देशभर से आते हैं मरीज, लेकिन योजनाओं का लाभ नहीं
तोखन साहू ने अपने पत्र में लिखा कि केवल बिलासपुर संसदीय क्षेत्र ही नहीं बल्कि छत्तीसगढ़ सहित देश के विभिन्न राज्यों से बड़ी संख्या में मरीज इलाज के लिए अपोलो अस्पताल पहुंचते हैं।
लेकिन यदि सरकारी योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन नहीं होगा तो इसका सीधा असर दूर-दराज़ से आने वाले मरीजों पर पड़ता है।
नड्डा से मांगा हस्तक्षेप
पत्र के अंतिम हिस्से में केंद्रीय राज्य मंत्री ने स्वास्थ्य मंत्री जे.पी. नड्डा से अनुरोध किया है कि मामले को व्यापक जनहित से जोड़कर देखा जाए और वरिष्ठ अधिकारियों का ध्यान आकर्षित करते हुए आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए जाएं।
पत्र में उठाए गए प्रमुख मुद्दे
21 नवंबर 1990 के भूमि आवंटन की शर्तों के पालन पर सवाल।
ECHS के लाभ से पूर्व सैनिकों और उनके आश्रितों के वंचित रहने की शिकायत।
वर्ष 2021 से CMHO द्वारा भेजे गए पत्रों के बावजूद आयुष्मान भारत, डॉ. खूबचंद बघेल स्वास्थ्य योजना और मुख्यमंत्री विशेष सहायता योजना में पंजीयन नहीं होने का उल्लेख।
सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं का लाभ मरीजों तक नहीं पहुंचने से आर्थिक और मानसिक परेशानी।
बिलासपुर ही नहीं, देशभर से आने वाले मरीजों के हित प्रभावित होने की बात।
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री से हस्तक्षेप और आवश्यक कार्रवाई का अनुरोध।



