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‘सिर्फ फर्जी डॉक्टर नहीं, उसे नियुक्त करने वाले अस्पताल प्रबंधन की भी तय हो जवाबदेही’: अपोलो प्रबंधन को कथित क्लीन चिट पर कांग्रेस के तीखे सवाल

Mohammed Israil
Mohammed Israil  - Editor
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एसएसपी को ज्ञापन सौंपकर निष्पक्ष पुनर्विवेचना की मांग; नियुक्ति प्रक्रिया, दस्तावेजों के सत्यापन और प्रबंधन की भूमिका की जांच पर जोर, कार्रवाई नहीं होने पर जनआंदोलन की चेतावनी


बिलासपुर। अपोलो अस्पताल में सामने आए कथित फर्जी डॉक्टर प्रकरण में अस्पताल प्रबंधन को कथित रूप से दी गई क्लीन चिट को लेकर कांग्रेस ने पुलिस जांच पर गंभीर सवाल उठाए हैं। पूर्व जिला कांग्रेस अध्यक्ष एवं बेलतरा विधानसभा के पूर्व विधायक प्रत्याशी विजय केशरवानी के नेतृत्व में कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल ने वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को ज्ञापन सौंपकर अपोलो अस्पताल प्रबंधन की भूमिका की स्वतंत्र, निष्पक्ष और उच्चस्तरीय पुनर्विवेचना कराने की मांग की।
विजय केशरवानी ने कहा कि इस पूरे प्रकरण का सबसे महत्वपूर्ण सवाल केवल कथित फर्जी डॉक्टर तक सीमित नहीं है, बल्कि उसे नियुक्त करने वाले अस्पताल प्रबंधन की भूमिका भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। उनका कहना है कि यदि किसी चिकित्सक की नियुक्ति अस्पताल प्रबंधन ने की थी, तो उसकी शैक्षणिक योग्यता, मेडिकल पंजीयन, अनुभव और अन्य दस्तावेजों का सत्यापन करना प्रबंधन की कानूनी एवं नैतिक जिम्मेदारी थी। ऐसे में यदि नियुक्ति प्रक्रिया में किसी प्रकार की गंभीर चूक हुई है तो उस

की जवाबदेही केवल एक व्यक्ति तक सीमित नहीं रह सकती।
उन्होंने कहा कि थाना सरकंडा में दर्ज अपराध क्रमांक 0563/2025 में कथित फर्जी डॉक्टर के साथ-साथ अपोलो अस्पताल प्रबंधन के विरुद्ध भी अपराध दर्ज किया गया था। ऐसे में विवेचना के दौरान यदि प्रबंधन को कथित रूप से क्लीन चिट दी गई है, तो यह कई गंभीर सवाल खड़े करता है। कांग्रेस ने पूछा कि जब एफआईआर में प्रबंधन की भूमिका की जांच आवश्यक मानी गई थी, तो आखिर ऐसे कौन से ठोस और निर्णायक तथ्य सामने आए जिनके आधार पर उसकी जवाबदेही समाप्त मान ली गई।
कांग्रेस का कहना है कि यह मामला केवल एक आपराधिक प्रकरण नहीं, बल्कि स्वास्थ्य व्यवस्था में संस्थागत जवाबदेही का भी विषय है। विजय केशरवानी ने कहा कि प्रदेश के पूर्व विधानसभा अध्यक्ष स्वर्गीय राजेंद्र प्रसाद शुक्ला सहित लगभग 27 लोगों की मृत्यु तथा सैकड़ों मरीजों के उपचार से जुड़े इस मामले में यदि संस्थागत स्तर पर जिम्मेदारी तय नहीं होती है, तो इससे पीड़ित परिवारों के साथ न्याय प्रभावित होगा और न्यायिक प्रक्रिया पर आम लोगों का विश्वास भी कमजोर पड़ेगा।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी ने इस मामले को शुरू से प्रमुखता से उठाया है। पीड़ित परिवारों को न्याय दिलाने के उद्देश्य से धरना-प्रदर्शन, ज्ञापन और “स्वास्थ्य न्याय यात्रा” जैसे आंदोलन चलाए गए। उनके अनुसार इन आंदोलनों का उद्देश्य केवल कथित फर्जी डॉक्टर के खिलाफ कार्रवाई कराना नहीं था, बल्कि नियुक्ति करने वाले अस्पताल प्रबंधन की भूमिका की भी निष्पक्ष जांच सुनिश्चित कराना था।
ज्ञापन के माध्यम से कांग्रेस ने मांग की है कि अपोलो अस्पताल प्रबंधन को दी गई कथित क्लीन चिट पर तत्काल पुनर्विचार किया जाए, प्रबंधन की भूमिका की उच्चस्तरीय एवं निष्पक्ष पुनर्विवेचना कराई जाए, नियुक्ति प्रक्रिया तथा प्रस्तुत दस्तावेजों के सत्यापन की विस्तृत जांच कराई जाए और यदि जांच में किसी प्रकार की लापरवाही, कर्तव्य में गंभीर चूक अथवा आपराधिक संलिप्तता सामने आती है तो संबंधित दोषियों के विरुद्ध वैधानिक कार्रवाई की जाए।
विजय केशरवानी ने कहा कि यह केवल 27 परिवारों का मामला नहीं, बल्कि उन लाखों लोगों के भरोसे से जुड़ा विषय है जो उपचार के लिए अस्पतालों पर निर्भर रहते हैं। उन्होंने कहा कि कानून सभी के लिए समान है और यदि किसी प्रभावशाली संस्था की भूमिका जांच के दायरे में आती है तो उसकी भी निष्पक्ष जांच होना आवश्यक है।
कांग्रेस ने चेतावनी दी कि यदि इस मामले में निष्पक्ष एवं संतोषजनक कार्रवाई नहीं हुई तो पार्टी पीड़ित परिवारों और आम जनता के साथ लोकतांत्रिक एवं संवैधानिक तरीके से व्यापक जनआंदोलन शुरू करेगी।
ज्ञापन सौंपने के दौरान ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष संतोष गर्ग, ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष (सरकंडा) हितेश देवांगन, दीपक कौशिक, फ़रीद ख़ान, मनोज यादव, अनिमेष रजक, हरीश यादव सहित कांग्रेस के अनेक पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

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