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अपोलो अस्पताल पर लापरवाही का आरोप: बुजुर्ग की मौत के बाद परिजनों ने खोला मोर्चा, निष्पक्ष जांच की मांग

Mohammed Israil
Mohammed Israil  - Editor
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बिलासपुर। बिलासपुर स्थित अपोलो अस्पताल एक बार फिर गंभीर आरोपों के घेरे में है। कोरबा जिले के हरदी बाजार निवासी 81 वर्षीय उदय नारायण जायसवाल की इलाज के दौरान हुई मौत के बाद उनके परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन पर उपचार में लापरवाही, जानकारी छिपाने और पारदर्शिता नहीं बरतने के आरोप लगाए हैं। परिजनों ने प्रेस क्लब में प्रेसवार्ता कर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने तथा दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
मृतक के पुत्र राजेश कुमार जायसवाल ने आरोप लगाया कि उनके पिता को 14 अप्रैल 2026 को केवल दाहिने पैर में दर्द की शिकायत के बाद अपोलो अस्पताल में भर्ती कराया गया था। भर्ती के समय परिवार को उम्मीद थी कि सामान्य उपचार के बाद मरीज स्वस्थ होकर घर लौटेंगे, लेकिन इलाज के दौरान उनकी स्थिति लगातार बिगड़ती गई और 27 अप्रैल को उनकी मृत्यु हो गई।
“मौत कैसे हुई, अस्पताल ने स्पष्ट जानकारी नहीं दी”
परिजनों का आरोप है कि इलाज के दौरान अस्पताल प्रबंधन की ओर से मरीज की वास्तविक स्थिति और उपचार प्रक्रिया को लेकर स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई। उनका कहना है कि कई बार पूछने के बावजूद यह नहीं बताया गया कि मरीज की हालत क्यों बिगड़ रही है और कौन-कौन सी चिकित्सकीय जटिलताएं सामने आई हैं।
राजेश जायसवाल ने प्रेसवार्ता में कहा कि परिवार को आज तक यह संतोषजनक जवाब नहीं मिला कि आखिर पैर दर्द की शिकायत लेकर भर्ती हुए मरीज की मौत किन परिस्थितियों में हुई। उन्होंने आरोप लगाया कि उपचार से जुड़े कई महत्वपूर्ण पहलुओं को लेकर अस्पताल का रवैया पारदर्शी नहीं रहा।
आईसीयू और वेंटिलेटर में रखने पर भी उठाए सवाल
परिजनों ने यह भी आरोप लगाया कि मरीज को आईसीयू और बाद में वेंटिलेटर पर रखा गया, लेकिन इसके पीछे के चिकित्सकीय कारणों की पूरी जानकारी परिवार को नहीं दी गई। उनका कहना है कि अस्पताल को भर्ती से लेकर मृत्यु तक की पूरी उपचार प्रक्रिया सार्वजनिक करनी चाहिए और यह स्पष्ट करना चाहिए कि किस आधार पर इलाज किया गया।
परिजनों ने मांग की है कि मरीज की मेडिकल फाइल, जांच रिपोर्ट, डॉक्टरों की सलाह, उपचार संबंधी निर्णय और अस्पताल में अपनाई गई प्रक्रियाओं की स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराई जाए।
प्रधानमंत्री से लेकर स्थानीय प्रशासन तक भेजी शिकायत
मामले को लेकर परिजनों ने प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री, स्वास्थ्य मंत्री, संभागायुक्त, कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक तथा संबंधित थाना प्रभारी को लिखित शिकायत भेजी है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि यदि उपचार के दौरान किसी प्रकार की लापरवाही हुई है तो उसकी निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाए।
परिजनों का कहना है कि उनका उद्देश्य केवल अपने परिवार को न्याय दिलाना नहीं, बल्कि भविष्य में किसी अन्य मरीज के साथ ऐसी स्थिति न हो, यह सुनिश्चित करना भी है।
अस्पताल की कार्यप्रणाली पर भी उठाए प्रश्न
प्रेसवार्ता के दौरान परिजनों ने अपोलो अस्पताल की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए। उनका आरोप है कि मरीज और परिजनों को उपचार संबंधी निर्णयों की पर्याप्त जानकारी नहीं दी जाती और कई मामलों में पारदर्शिता की कमी दिखाई देती है। उन्होंने कहा कि पूरे घटनाक्रम की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच से ही सच्चाई सामने आ सकेगी।
अस्पताल प्रबंधन का पक्ष सामने आना बाकी
फिलहाल पूरे मामले में केवल परिजनों के आरोप सामने आए हैं। अपोलो अस्पताल प्रबंधन की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सार्वजनिक नहीं की गई है। ऐसे में आरोपों की पुष्टि होना अभी बाकी है। जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि परिजनों द्वारा लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है और उपचार प्रक्रिया में किसी प्रकार की लापरवाही हुई थी या नहीं।
क्या हैं परिजनों के प्रमुख आरोप
इलाज के दौरान पर्याप्त और स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई।
मरीज की हालत बिगड़ने के कारणों को लेकर पारदर्शिता नहीं बरती गई।
आईसीयू और वेंटिलेटर में रखने के कारण स्पष्ट नहीं किए गए।
भर्ती से मृत्यु तक की पूरी मेडिकल प्रक्रिया संदेह के घेरे में।
निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग।

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